[the_ad id="179"]
Home » International » ट्रंप-शी जिनपिंग शिखर वार्ता पर दुनिया की नजर: व्यापार, ईरान युद्ध और ताइवान समेत कई बड़े मुद्दों पर होगी चर्चा

ट्रंप-शी जिनपिंग शिखर वार्ता पर दुनिया की नजर: व्यापार, ईरान युद्ध और ताइवान समेत कई बड़े मुद्दों पर होगी चर्चा

अंतरराष्ट्रीय | एजेंसी/ ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग/वॉशिंगटन | 14 मई 2026

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump लगभग एक दशक बाद चीन पहुंचे हैं, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping से होने जा रही है। दो दिनों तक चलने वाली यह हाई-प्रोफाइल शिखर वार्ता वैश्विक राजनीति, व्यापार और सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। पूरी दुनिया की नजर इस मुलाकात पर टिकी हुई है क्योंकि अमेरिका और चीन इस समय दुनिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक और सामरिक शक्तियां हैं। बीजिंग पहुंचने पर ट्रंप का भव्य स्वागत किया गया। एयर फोर्स वन के उतरते ही चीन के उपराष्ट्रपति Han Zheng ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। लाल कालीन, सैन्य बैंड और अमेरिकी-चीनी झंडों के बीच ट्रंप का स्वागत ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के रिश्ते कई मोर्चों पर तनावपूर्ण बने हुए हैं।

इस दौरे में ट्रंप के साथ अमेरिका के बड़े उद्योगपति और टेक दिग्गज भी पहुंचे हैं। इनमें Elon Musk, Jensen Huang, Tim Cook और Boeing के प्रमुख Kelly Ortberg शामिल हैं। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि व्यापार और तकनीकी सहयोग इस यात्रा का बड़ा एजेंडा रहेगा।

बीजिंग रवाना होने से पहले ट्रंप ने कहा कि वह राष्ट्रपति शी जिनपिंग से चीन को अमेरिकी उद्योगों और तकनीकी कंपनियों के लिए “और अधिक खोलने” की मांग करेंगे। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां चीन के विकास में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं और दोनों देशों के लिए यह आर्थिक रूप से लाभदायक होगा।

दरअसल अमेरिका और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों से व्यापार युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। ट्रंप के पहले कार्यकाल में शुरू हुआ टैरिफ विवाद उनके दूसरे कार्यकाल में भी जारी रहा। हालांकि पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच एक अस्थायी व्यापार समझौता हुआ था, लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

विशेषज्ञों के अनुसार इस बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा ईरान युद्ध भी रहने वाला है। अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर दबाव बनाए ताकि पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सके। चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार माना जाता है और वह ईरानी तेल का बड़ा खरीदार है। ऐसे में वॉशिंगटन को उम्मीद है कि बीजिंग इस मामले में अहम भूमिका निभा सकता है।

हालांकि ट्रंप ने साफ कहा है कि उन्हें ईरान मामले में चीन की मदद की जरूरत नहीं है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका चीन के प्रभाव का उपयोग करना चाहता है। दूसरी तरफ चीन भी इस युद्ध के जल्द खत्म होने का इच्छुक है क्योंकि तेल कीमतों में बढ़ोतरी का असर उसकी अर्थव्यवस्था और उद्योगों पर पड़ रहा है।

ताइवान का मुद्दा भी इस वार्ता में अहम रहने वाला है। चीन लंबे समय से ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान को सैन्य और राजनीतिक समर्थन देता रहा है। माना जा रहा है कि शी जिनपिंग अमेरिका से ताइवान को हथियार आपूर्ति कम करने की मांग उठा सकते हैं। हालांकि व्हाइट हाउस पहले ही संकेत दे चुका है कि अमेरिका अपनी ताइवान नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा।

इसके अलावा सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर भी बातचीत होने की संभावना है। अमेरिका की टेक इंडस्ट्री चीन से आने वाले कई महत्वपूर्ण संसाधनों पर निर्भर है, जबकि चीन अमेरिकी तकनीकी प्रतिबंधों से परेशान रहा है।

बीजिंग में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। शहर के प्रमुख इलाकों, पांच सितारा होटलों और तियानमेन स्क्वायर के आसपास अतिरिक्त पुलिस और सैन्य बल तैनात किया गया है। चीनी प्रशासन इस दौरे को अपनी वैश्विक ताकत और स्थिरता दिखाने के अवसर के रूप में भी देख रहा है।

गुरुवार को ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में औपचारिक बैठक होगी। इसके बाद राज्य भोज का आयोजन किया जाएगा। शुक्रवार को दोनों नेता Zhongnanhai परिसर में “फ्रेंडशिप फोटो” और विशेष बैठक में हिस्सा लेंगे।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात केवल दो नेताओं की बैठक नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में वैश्विक शक्ति संतुलन की दिशा तय करने वाली घटना साबित हो सकती है। दुनिया यह देखने के लिए उत्सुक है कि क्या दोनों महाशक्तियां प्रतिस्पर्धा और तनाव के बीच सहयोग का नया रास्ता निकाल पाएंगी या फिर वैश्विक टकराव और बढ़ेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *