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WATCH VIDEO : देश चलाना कॉम्प्रोमाइज्ड PM के बस की बात नहीं — राहुल गांधी

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 12 मई 2026

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर बेहद तीखा और आक्रामक हमला बोला है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, तेल संकट और देश में संभावित महंगाई के माहौल के बीच राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार अब जनता को “त्याग” का पाठ पढ़ाकर अपनी विफलताओं से बचने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 12 वर्षों में देश को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया गया है जहां अब सरकार लोगों को यह बताने लगी है कि क्या खरीदना है, क्या नहीं खरीदना है और कहां जाना है, कहां नहीं जाना है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपीलों को निशाने पर लिया। दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से ईंधन बचाने, गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने, पेट्रोल-डीजल का सीमित उपयोग करने, सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करने और जरूरत के हिसाब से खर्च करने की अपील की थी। सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक तेल संकट को देखते हुए ऊर्जा बचत और आर्थिक सतर्कता जरूरी है।

लेकिन राहुल गांधी ने इसे सरकार की “नाकामी का प्रमाण” करार दिया।

उन्होंने कहा,
“मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे — सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो। ये उपदेश नहीं, ये नाकामी के सबूत हैं।”

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार हर संकट की जिम्मेदारी जनता पर डाल देती है, जबकि खुद जवाबदेही लेने से बचती है। उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी, ईंधन संकट और आर्थिक दबाव से आम आदमी परेशान है, लेकिन सरकार अपनी नीतिगत विफलताओं को स्वीकार करने के बजाय लोगों को “कम खर्च करो” और “कम इस्तेमाल करो” की सलाह दे रही है।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश की आर्थिक स्थिति ऐसी हो गई है कि अब आम लोगों की जीवनशैली तक पर सरकार की सलाह आने लगी है। राहुल ने कहा कि अगर सरकार सफल होती तो लोगों को यह नहीं बताना पड़ता कि क्या खरीदना है और क्या छोड़ना है।

उन्होंने कहा,
“देश को इस मुकाम पर पहुंचा दिया गया है कि जनता को बताया जा रहा है — क्या खरीदें, क्या न खरीदें, कहां जाएं और कहां न जाएं। हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल दी जाती है ताकि सरकार खुद बच निकले।”

राहुल गांधी यहीं नहीं रुके। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा व्यक्तिगत हमला बोलते हुए कहा कि “देश चलाना अब Compromised PM के बस की बात नहीं है।” कांग्रेस नेता के इस बयान को मोदी सरकार के नेतृत्व और आर्थिक प्रबंधन पर सीधा हमला माना जा रहा है।

दरअसल, हाल के दिनों में ईरान-हॉर्मुज संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध जैसे हालातों ने पूरी दुनिया में तेल बाजार को प्रभावित किया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई होती है। इसी कारण भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सरकारी तेल कंपनियां भारी नुकसान झेल रही हैं और आने वाले समय में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।

सरकार लगातार यह भरोसा दिला रही है कि देश में पर्याप्त तेल और LPG का स्टॉक मौजूद है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में बताया गया कि भारत के पास लगभग 60 दिनों का तेल और गैस भंडार तथा 45 दिनों का LPG स्टॉक उपलब्ध है। इसके बावजूद सरकार लोगों से ईंधन बचाने की अपील कर रही है।

विपक्ष अब इसी मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हो गया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय संकटों का बोझ सीधे जनता पर डाल रही है। उनका कहना है कि आर्थिक कुप्रबंधन और विदेश नीति की कमजोरियों का असर अब आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।

राहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। BJP की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में महंगाई, तेल संकट और आर्थिक हालात को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच बड़ा राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।

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