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इंडोनेशिया में ज्वालामुखी का कहर: 50 हजार फीट तक पहुंची राख, 301 उड़ानें प्रभावित, स्कूल और मछली पकड़ने का काम बंद

अनक क्राकाताउ में तेज विस्फोट के बाद आसमान में फैली राख; जकार्ता के मुख्य हवाई अड्डे पर परिचालन रोका गया, सैकड़ों यात्री फंसे

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | जकार्ता | 6 सितंबर 2026

50 हजार फीट तक पहुंचा राख का गुबार

इंडोनेशिया के माउंट अनक क्राकाताउ में शुक्रवार से जारी ज्वालामुखी गतिविधि ने रविवार को गंभीर रूप ले लिया। विस्फोट के बाद ज्वालामुखीय राख का गुबार करीब 50 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया और जावा तथा सुमात्रा के कुछ हिस्सों में फैल गया। राख के कारण हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ और आसपास के इलाकों में सामान्य जनजीवन पर भी असर पड़ा। स्कूलों की कुछ गतिविधियां रद्द करनी पड़ीं और मछुआरों ने भी समुद्र में जाने से परहेज किया।

301 उड़ानें प्रभावित, 58 अंतरराष्ट्रीय सेवाएं

जकार्ता स्थित सुकर्णो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ज्वालामुखीय राख के कारण उड़ान संचालन कुछ समय के लिए रोक दिया गया। हवाई अड्डे के संचालक अंगकासा पुरा के अनुसार इस व्यवधान से 301 उड़ानें प्रभावित हुईं, जिनमें 58 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शामिल थीं। रनवे की जांच में ज्वालामुखीय राख की खतरनाक मात्रा मिलने के बाद यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए परिचालन रोकने का फैसला लिया गया। बाद में हवाई यातायात अधिकारियों ने सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस रोक को आगे भी बढ़ाया।

सैकड़ों यात्री एयरपोर्ट पर फंसे

उड़ानें रद्द और विलंबित होने के कारण सुकर्णो-हट्टा हवाई अड्डे पर यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गईं। कई यात्रियों को घंटों तक अपनी उड़ान का इंतजार करना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, एक यात्री घरेलू उड़ान रद्द होने के बाद एयरपोर्ट पहुंचा था और वहां से बोर्नियो के समारींदा जाने वाली कनेक्टिंग उड़ान पकड़ना चाहता था, लेकिन वह उड़ान भी रद्द हो गई। एयरलाइनों ने यात्रियों से एयरपोर्ट आने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की जानकारी लेने की अपील की है।

सिंगापुर एयरलाइंस और एयरएशिया की उड़ानों पर भी असर

राख के बाद हवाई मार्गों की स्थिति को देखते हुए कई एयरलाइनों को अपने परिचालन में बदलाव करना पड़ा। सिंगापुर एयरलाइंस ने रविवार की जकार्ता से आने-जाने वाली उड़ानें रद्द कर दीं, जबकि एयरएशिया ने भी कई उड़ानों को रद्द या पुनर्निर्धारित किया। गरुड़ इंडोनेशिया ने यात्रियों को अपनी उड़ान की स्थिति और आधिकारिक डिजिटल माध्यमों से जानकारी लेने की सलाह दी है। ज्वालामुखीय राख विमान के इंजन और उड़ान सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है, इसलिए हवाई कंपनियां ऐसी परिस्थितियों में अतिरिक्त सावधानी बरतती हैं।

स्कूलों पर भी पड़ा राख का असर

ज्वालामुखीय राख केवल हवाई यातायात के लिए समस्या नहीं बनी। आसपास के इलाकों में लोगों को आंखों में जलन जैसी परेशानी महसूस हुई, जिसके बाद कुछ स्कूलों ने अपनी गतिविधियां रद्द कर दीं। मछुआरों ने भी समुद्र में जाने का कार्यक्रम रोक दिया। इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने को कहा है और राख के संपर्क में आने वाले लोगों को मास्क और आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा इस्तेमाल करने की सलाह दी है।

राख से बचने के लिए प्रशासन की तैयारी

आपदा प्रबंधन एजेंसी ने राख को कम करने में मदद के लिए मौसम में कृत्रिम बदलाव की योजना पर भी काम करने की बात कही है, जिसमें बादलों में कृत्रिम रूप से बारिश कराने की प्रक्रिया शामिल हो सकती है। लोगों से खुले में कम निकलने, पानी के स्रोतों को ढककर रखने और वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है, क्योंकि सड़क पर जमा राख दृश्यता को कम कर सकती है।

सिर्फ एक नहीं, पांच ज्वालामुखी अलर्ट स्तर-3 पर

इंडोनेशिया में ज्वालामुखीय गतिविधि को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि अनक क्राकाताउ के अलावा चार अन्य ज्वालामुखी—सेमेरू, मेरापी, लेवोटोबी लाकी-लाकी और सिनाबुंग—भी अलर्ट स्तर-3 पर हैं। अनक क्राकाताउ 2 जुलाई से अलर्ट स्तर-3 पर है। रविवार को माउंट सेमेरू में भी विस्फोट हुआ और राख का गुबार उसके शिखर से करीब एक किलोमीटर ऊपर तक पहुंचा। ज्वालामुखी निगरानी एजेंसी ने सेमेरू के क्रेटर से कम से कम पांच किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी है।

क्राकाताउ का इतिहास पहले भी दे चुका है बड़ी तबाही की चेतावनी

अनक क्राकाताउ उसी इलाके में उभरा है जहां कभी प्रसिद्ध क्राकाताउ ज्वालामुखी मौजूद था। 1883 के क्राकाताउ विस्फोट के बाद आई सुनामी में 36 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद 2018 में अनक क्राकाताउ की गतिविधि से सुनामी आई थी, जिसमें जावा और सुमात्रा में 400 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। हालांकि मौजूदा स्थिति में अधिकारियों ने अनक क्राकाताउ से तत्काल सुनामी का खतरा नहीं बताया है, लेकिन पिछले अनुभवों के कारण निगरानी बेहद कड़ी रखी जा रही है।

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