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दिल्ली में छात्रों की मौत से हड़कंप! 5 मंजिला पीजी भरभराकर गिरा, 5 की मौत—जिम्मेदार कौन?

सत्य निकेतन में 40-50 साल पुरानी इमारत बनी मलबे का ढेर; 11 लोग निकाले गए, बेसमेंट में चल रहा था मरम्मत का काम, पीजी संचालक के खिलाफ एफआईआर

राष्ट्रीय/ दिल्ली एनसीआर | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 7 सितंबर 2026

एक झटके में मलबे में बदल गई छात्रों की जिंदगी

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को छात्रों से भरी एक पांच मंजिला पीजी इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई। यह इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास छात्रों के पीजी और किराये के कमरों के लिए जाना जाता है। जिस इमारत में हादसा हुआ, उसमें बेसमेंट के अलावा पांच मंजिलें थीं और स्थानीय लोगों के मुताबिक यह इमारत करीब 40 से 50 साल पुरानी थी। हादसे के बाद चारों तरफ चीख-पुकार मच गई और कुछ समय के लिए ऐसा लगा जैसे पूरा इलाका किसी भूकंप से हिल गया हो। पुलिस, दमकल, एनडीआरएफ और दिल्ली आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंचीं और मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू की।

11 लोग मलबे से निकले, अस्पताल पहुंचते-पहुंचते पांच की मौत

बचाव दल ने कुल 11 लोगों को मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। इनमें चार लोगों को एम्स के जेपीएन एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में मृत घोषित किया गया, जबकि एक घायल ने बाद में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई गई और कई छात्रों का एम्स में इलाज चल रहा है। एक घायल की पैर की सर्जरी करनी पड़ी, जबकि एक व्यक्ति को मामूली चोटों के बाद निगरानी में रखकर छुट्टी दे दी गई। एक 19 वर्षीय युवक को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत स्थिर बताई गई। हादसे के बाद एम्स के बाहर छात्रों के परिवारों और दोस्तों की भीड़ जमा रही और हर किसी की नजर अस्पताल के दरवाजे पर लगी थी।

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बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था, अब जांच में उठेंगे बड़े सवाल

पुलिस अधिकारियों के अनुसार हादसे के समय इमारत के बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। स्थानीय लोगों ने भी मरम्मत और बेसमेंट में पानी जमा होने को लेकर सवाल उठाए हैं। अभी यह जांच का विषय है कि इमारत की हालत क्या थी, मरम्मत के दौरान किन सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था और आखिर वह पूरा ढांचा अचानक क्यों ढह गया। पुलिस पीजी चलाने वाले आनंद बंसल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया में है। हादसे के बाद अब यह सवाल बेहद गंभीर हो गया है कि छात्रों को रहने के लिए दी गई इस इमारत की सुरक्षा की नियमित जांच हुई थी या नहीं।

नियमों की अनदेखी का आरोप, पड़ोसी इमारत भी सील

हादसे के बाद एमसीडी ने आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार हादसे से सटी लड़कियों के पीजी वाली इमारत को खाली कराकर सील कर दिया गया है। एमसीडी के मुताबिक जिस इमारत के गिरने की घटना हुई, उसमें निर्माण नियमों का उल्लंघन था और रिकॉर्ड के अनुसार वहां केवल भूतल और पहली मंजिल तक निर्माण की अनुमति थी। अगर यह जानकारी जांच में सही साबित होती है, तो सवाल और बड़ा हो जाता है—आखिर अतिरिक्त मंजिलें कैसे बनीं और इतने समय तक संबंधित विभागों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी?

छात्रों की सुरक्षा पर फिर खड़ा हुआ बड़ा सवाल

सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में देशभर से आए छात्र पीजी में रहते हैं। महंगे किराये के कारण छात्र अक्सर ऐसी इमारतों में कमरा लेने को मजबूर होते हैं जहां जगह और सुविधाओं के मुकाबले सुरक्षा की जानकारी कम होती है। इस हादसे ने दिल्ली में छात्रों के लिए चल रहे पीजी और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या हर पीजी इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा की नियमित जांच होती है? क्या यह देखा जाता है कि जितनी मंजिल की अनुमति है, वास्तव में उतनी ही मंजिलें बनी हैं? और क्या बेसमेंट में होने वाले निर्माण या मरम्मत के काम की निगरानी की जाती है? इन सवालों के जवाब अब केवल सत्य निकेतन के छात्रों के परिवार नहीं, बल्कि दिल्ली के हजारों छात्र और अभिभावक मांग रहे हैं।

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मुख्यमंत्री ने कहा—जिम्मेदार कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा किया और एम्स जाकर घायलों के इलाज की जानकारी ली। उन्होंने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस हादसे के लिए जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी—चाहे वह इमारत का मालिक हो या कोई सरकारी अधिकारी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री, दिल्ली पुलिस आयुक्त और एनडीआरएफ के महानिदेशक से बात कर स्थिति की जानकारी ली। लेकिन अब असली परीक्षा सिर्फ राहत और बचाव की नहीं, बल्कि जांच की है। अगर नियमों का उल्लंघन हुआ था तो वह किसकी निगरानी में हुआ, सुरक्षा जांच क्यों नहीं हुई और छात्रों की जान खतरे में डालने के लिए आखिर जवाबदेही किसकी तय होगी?

मलबा हटेगा, लेकिन सबसे बड़ा सवाल बचा रहेगा

सत्य निकेतन का यह हादसा केवल एक इमारत के गिरने की घटना नहीं है। यह दिल्ली में छात्रों के लिए मौजूद आवासीय सुरक्षा व्यवस्था की पूरी तस्वीर पर सवाल खड़ा करता है। आज मलबा हटाया जा रहा है, घायलों का इलाज चल रहा है और परिवार अपने बच्चों की सलामती के लिए अस्पतालों के बाहर इंतजार कर रहे हैं। लेकिन जब राहत अभियान खत्म हो जाएगा, तब सबसे जरूरी काम शुरू होगा—यह पता लगाना कि पांच लोगों की जान लेने वाली यह इमारत अचानक क्यों गिरी और क्या इसे पहले रोका जा सकता था? अगर लापरवाही सामने आती है, तो केवल एक एफआईआर काफी नहीं होगी; ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जिसमें किसी छात्र को सस्ती छत के बदले अपनी जान का जोखिम न उठाना पड़े।

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