अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | गाज़ा सिटी | 7 सितंबर 2026
कफन में पूरा शरीर नहीं, कहीं हड्डियां तो कहीं बच्चों के सामान के निशान
गाज़ा में युद्ध की तबाही का एक बेहद दर्दनाक अध्याय सामने आया है। उत्तरी गाज़ा में करीब 100 फिलिस्तीनियों के अवशेषों को दफनाया जा रहा है, जिनमें लगभग 60 बच्चे बताए गए हैं। ये अवशेष गाज़ा सिटी के ज़ैतून इलाके में तबाह इमारतों के मलबे से निकाले गए। परिवार रविवार को अपने अपनों के अवशेष लेकर ज़ैतून से मध्य गाज़ा सिटी के अल-मामदानी कब्रिस्तान पहुंचे। कई परिवारों के लिए यह इंतजार महीनों नहीं बल्कि वर्षों जितना लंबा और पीड़ादायक रहा। अल जज़ीरा के अनुसार, जिन कफनों को देखकर पहली नजर में लगता था कि उनके भीतर पूरे शव हैं, उनमें कई जगह केवल हड्डियों के अवशेष और मृतकों के सामान के टुकड़े थे। बच्चों के मामले में उनके साथ मिली छोटी-छोटी वस्तुएं भी पहचान का सहारा बन रही हैं। यह दृश्य बताता है कि गाज़ा में मौत का हिसाब केवल उन लोगों तक सीमित नहीं है जिनके शव अस्पतालों और कब्रिस्तानों तक पहुंच सके—मलबे के नीचे दबे हजारों लोगों की कहानी अभी सामने आनी बाकी है।
एक ही परिवार के 55 सदस्य खत्म, अब मलबे से मिल रहे निशान
इन 100 लोगों में बड़ी संख्या मलाका परिवार के सदस्यों की बताई गई है। इस विस्तृत परिवार ने अकेले 55 सदस्यों को खो दिया। सिविल डिफेंस की टीमें और परिवार कई सप्ताह से उन घरों के खंडहरों को खोद रहे थे जो अक्टूबर 2023 से चले युद्ध के दौरान इजरायली हमलों में तबाह हुए थे। परिवारों के लिए अपने प्रियजनों के अवशेष मिलना भी एक ऐसी राहत बन गया है जिसकी कल्पना सामान्य परिस्थितियों में नहीं की जा सकती—कम से कम अब वे उन्हें किसी पहचानी हुई कब्र में दफना सकते हैं और यह जान सकते हैं कि उनका अपना कहां सो रहा है। अल जज़ीरा के संवाददाता गाज़ी अल-अलूल के मुताबिक यह अवसर भी हर परिवार को नहीं मिला है। युद्ध के दौरान गाज़ा के कई कब्रिस्तानों को नुकसान पहुंचा और कुछ स्थानों तक पहुंच लंबे समय तक संभव नहीं रही।
सबसे बड़ा सवाल—मलबे के नीचे अब भी करीब 8 हजार शव?
गाज़ा सिविल डिफेंस के प्रमुख राएद अल-दहशान ने जो आंकड़ा बताया है, वह इस त्रासदी की भयावहता को और बढ़ा देता है। उनके मुताबिक अनुमान है कि करीब 8,000 लोगों के शव अभी भी मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं। उनका कहना है कि उनकी टीमों ने इन लोगों की तलाश और अवशेष निकालने की योजना तैयार कर रखी है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या भारी मशीनों की कमी है। उनके मुताबिक पर्याप्त उपकरण उपलब्ध करा दिए जाएं तो यह काम करीब 90 दिनों में पूरा किया जा सकता है, लेकिन मशीनों और जरूरी सामान को गाज़ा में आने की अनुमति नहीं मिली तो यही काम वर्षों तक खिंच सकता है। उन्होंने कहा कि बचावकर्मियों के पास पर्याप्त खुदाई मशीनें, सुरक्षा उपकरण और मलबे के भीतर अवशेष खोजने के आधुनिक साधन नहीं हैं। जरूरी उपकरणों की विस्तृत सूची अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को दी गई है और सिविल डिफेंस इन्हें अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण में रखे जाने के लिए भी तैयार है।
नाम कैसे पता चलता है? पड़ोसी बताते हैं—हमले के वक्त उस घर में कौन-कौन था
मलबे से केवल हड्डियां या शरीर के छोटे हिस्से मिलने के बाद पहचान करना भी बेहद कठिन है। सिविल डिफेंस के अनुसार टीमें जीवित बचे लोगों और पड़ोसी परिवारों से जानकारी जुटाती हैं कि हमला होने के समय किसी इमारत में कौन-कौन मौजूद था और वे घर के किस हिस्से में थे। इंजीनियरों की टीम मलबे से मिली चीजों और अवशेषों को अलग कर उनका रिकॉर्ड तैयार करती है। राएद अल-दहशान का कहना है कि अभी भी दर्जनों ही नहीं बल्कि सैकड़ों घर ऐसे हैं जहां पूरी तरह खुदाई और तलाश बाकी है। यानी गाज़ा के खंडहर केवल टूटी इमारतें नहीं हैं—उनके भीतर ऐसे परिवारों की अधूरी तलाश दबी है जिन्हें आज तक अपने लोगों के अंतिम अवशेष भी नहीं मिले।
संयुक्त राष्ट्र अधिकारी बोले—हजारों लोग अब भी इसी मलबे में पड़े हैं
कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रमुख अजित सुंघाय ने इन दृश्यों को संघर्ष की क्रूरता की याद दिलाने वाला बताया। उनके अनुसार बरामद किए जा रहे कुछ अवशेष नवंबर 2023 तक पुराने हैं और हजारों लोग अभी भी मलबे के नीचे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गाज़ा के बड़े हिस्से तक पहुंच बेहद कठिन है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां इजरायली सेना का नियंत्रण है। उनके मुताबिक जवाबदेही तय होना जरूरी है और इस दौर में मिले सबूतों को सुरक्षित रखना भी बेहद महत्वपूर्ण है।
73 हजार से ज्यादा मौतों का आंकड़ा, लेकिन मलबा खुला तो संख्या कहां पहुंचेगी?
गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अक्टूबर 2023 से अब तक कम से कम 73,651 फिलिस्तीनी मारे गए और 1,74,592 घायल हुए हैं। लेकिन मलबे के नीचे हजारों लोगों के होने के अनुमान के बीच सवाल यह है कि पूरी तलाश समाप्त होने के बाद वास्तविक मानवीय नुकसान की तस्वीर कितनी बड़ी निकलेगी? हाल के दूसरे अभियानों में भी बड़ी संख्या में अवशेष मिले हैं। अधिकारियों और कार्यकर्ताओं के अनुसार अबू शरिया और हसनिया परिवारों के 100 से अधिक लोगों के शव निकाले गए, जबकि अल-ताज टावर स्थल से 500 से ज्यादा शव बरामद किए गए। ये आंकड़े बताते हैं कि गाज़ा में युद्ध की पूरी कीमत शायद अभी दर्ज ही नहीं हुई है।
60 बच्चों के अवशेष… गाज़ा का वह सवाल जिसका जवाब दुनिया को देना होगा
सबसे विचलित करने वाली बात उन 60 बच्चों की है जिनके अवशेष इन 100 लोगों में शामिल बताए गए हैं। किसी परिवार के लिए अपने बच्चे को वर्षों बाद मलबे से हड्डियों और उसके सामान के निशानों के रूप में वापस पाना किस तरह का दर्द होगा, इसे आंकड़ों में नहीं समझा जा सकता। गाज़ा में अब लड़ाई केवल जीवित लोगों के भोजन, पानी, दवा और सुरक्षित ठिकाने की नहीं है; हजारों परिवार अपने मृतकों को खोजने और सम्मान के साथ दफनाने के अधिकार के लिए भी इंतजार कर रहे हैं। मलबे के नीचे दबे अनुमानित 8 हजार लोगों तक पहुंचने के लिए भारी मशीनें और सुरक्षा उपकरण मांगे जा रहे हैं। सवाल दुनिया के सामने है—जब परिवार अपने बच्चों की कब्र तक के लिए मलबा खोद रहे हों, तब उन्हें जरूरी मशीनों और संसाधनों के लिए आखिर कितना और इंतजार करना पड़ेगा?




