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मध्य प्रदेश में जल्द लागू होगा समान नागरिक संहिता, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जनता से मांगे सुझाव

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | भोपाल | 2 जून 2026

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को लागू करने की दिशा में सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को स्पष्ट संकेत दिया कि राज्य में जल्द ही समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे सरकार द्वारा शुरू किए गए विशेष पोर्टल के माध्यम से अपने सुझाव और राय साझा करें, ताकि कानून को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और जनहितकारी बनाया जा सके।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि राज्य सरकार इस महत्वपूर्ण विषय पर तेजी से आगे बढ़ रही है और समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए व्यापक जनसंवाद चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2026 में गठित उच्चस्तरीय समिति, जिसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं, प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर रही है और नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों तथा विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों से सुझाव प्राप्त कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता केवल एक कानूनी सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका कहना है कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान व्यवस्था लागू होने से नागरिकों के अधिकारों को मजबूत करने में मदद मिलेगी और न्यायिक प्रक्रियाओं में भी अधिक स्पष्टता आएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार इस विषय पर किसी भी निर्णय को जल्दबाजी में नहीं लेना चाहती और इसलिए जनता की राय को सर्वोच्च महत्व दिया जा रहा है।

सरकार द्वारा शुरू किए गए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आम नागरिक अपने सुझाव दर्ज करा सकते हैं। राज्य सरकार का दावा है कि प्राप्त होने वाले सभी सुझावों का गंभीरता से अध्ययन किया जाएगा और उसके बाद अंतिम मसौदा तैयार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है और इसलिए सरकार चाहती है कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक इस ऐतिहासिक प्रक्रिया का हिस्सा बने।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद मध्य प्रदेश देश का दूसरा बड़ा राज्य बन सकता है जो इस दिशा में ठोस पहल करेगा। भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से समान नागरिक संहिता को अपने प्रमुख वैचारिक एजेंडे का हिस्सा बताती रही है और अब मध्य प्रदेश में इसकी संभावित शुरुआत राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है।

हालांकि इस मुद्दे पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ समूह इसे समानता और न्याय की दिशा में आवश्यक कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ संगठनों का कहना है कि इस विषय पर सभी समुदायों के साथ व्यापक संवाद और सहमति आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती विभिन्न सामाजिक और धार्मिक परंपराओं के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसा कानून तैयार करना होगा जो संविधान की भावना के अनुरूप हो और सभी वर्गों को स्वीकार्य भी हो।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति के अधिकार जैसे नागरिक मामलों में एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। संविधान के नीति निदेशक तत्वों में भी समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया गया है, लेकिन स्वतंत्रता के बाद से यह विषय लगातार बहस और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना हुआ है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विश्वास जताया कि मध्य प्रदेश इस दिशा में देश के लिए एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत कर सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी सुझावों और चिंताओं पर विचार करने के बाद ऐसा कानून लाने का प्रयास करेगी जो न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करे। आने वाले महीनों में समिति की रिपोर्ट और सरकार की अगली कार्यवाही पर पूरे देश की निगाहें टिकी रहेंगी, क्योंकि मध्य प्रदेश में UCC का लागू होना राष्ट्रीय राजनीति और कानून व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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