शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 26 जुलाई 2026
NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर देशव्यापी छात्र आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने अब NTA की परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार की दिशा में कदम बढ़ाया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने रविवार को एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की, जिसकी कमान इंफोसिस के सह-संस्थापक Nandan Nilekani को सौंपी गई है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब NEET पेपर लीक विवाद और छात्रों के आंदोलन ने केंद्र सरकार पर भारी दबाव बनाया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद परीक्षा सुधारों को लेकर यह सरकार की सबसे महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक मानी जा रही है।
टास्क फोर्स में नीलेकणि के अलावा पूर्व ISRO चेयरमैन S. Somanath, पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो निदेशक तपन डेका, IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा को शामिल किया गया है। तकनीक, सुरक्षा, शिक्षा प्रशासन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े अनुभवी लोगों को एक मंच पर लाकर सरकार परीक्षा व्यवस्था की कमजोर कड़ियों को पहचानने और उनमें बदलाव की तैयारी कर रही है।
इस टास्क फोर्स का मुख्य फोकस National Testing Agency (NTA) की परीक्षा व्यवस्था में सुधार होगा। हाल के विवादों ने परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और एजेंसी की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में केवल दोषियों पर कार्रवाई के बजाय पूरी व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत करने की चुनौती सरकार के सामने है।
नंदन नीलेकणि को इसकी कमान सौंपना भी महत्वपूर्ण है। बड़े पैमाने पर डिजिटल सिस्टम और टेक्नोलॉजी आधारित सार्वजनिक ढांचे पर काम करने के उनके अनुभव को देखते हुए माना जा रहा है कि परीक्षा प्रणाली में तकनीक के इस्तेमाल, डेटा सुरक्षा और पारदर्शिता को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा सकता है।
लेकिन सरकार के सामने चुनौती केवल तकनीकी सुधार की नहीं है। असली परीक्षा करोड़ों छात्रों और उनके परिवारों का भरोसा वापस जीतने की है। पेपर लीक होने पर एक छात्र का सिर्फ एक प्रश्नपत्र प्रभावित नहीं होता; उसकी वर्षों की तैयारी, परिवार का पैसा और भविष्य की उम्मीद दांव पर लग जाती है। इसलिए किसी भी सुधार की सफलता का पैमाना रिपोर्ट या घोषणाएं नहीं, बल्कि समय पर, निष्पक्ष और सुरक्षित परीक्षा होगी।
जंतर-मंतर से देश के अलग-अलग हिस्सों तक फैले छात्र आंदोलन ने परीक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दे में बदल दिया। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आंदोलन की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा गया और उसके बाद सरकार पर संस्थागत सुधारों के लिए दबाव और बढ़ गया। नई टास्क फोर्स को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।
केंद्र ने परीक्षा में अनुचित साधनों और पेपर लीक के खिलाफ कानून को और कठोर बनाने के लिए संशोधन विधेयक भी प्रस्तावित किया है। इसमें व्यक्तिगत और संस्थागत अपराधियों के लिए सजा तथा आर्थिक दंड बढ़ाने का प्रस्ताव है। यदि कठोर कानून के साथ परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार भी प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो यह मौजूदा संकट से आगे निकलकर दीर्घकालिक बदलाव की शुरुआत हो सकती है।
हालांकि सबसे बड़ा सवाल क्रियान्वयन का है। देश में समितियों और टास्क फोर्स की कमी नहीं रही है। इसलिए छात्र अब केवल नई समिति बनने से संतुष्ट होंगे, यह मानना जल्दबाजी होगी। उन्हें यह देखना होगा कि उसकी सिफारिशें क्या हैं, सरकार उनमें से कितनी स्वीकार करती है और जमीन पर कितनी तेजी से बदलाव दिखाई देता है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब नंदन नीलेकणि की अगुवाई वाली टास्क फोर्स सरकार के परीक्षा सुधार अभियान की नई कसौटी होगी। छात्र आंदोलन ने सरकार को फैसला लेने पर मजबूर किया; अब सरकार के सामने चुनौती यह साबित करने की है कि बदलाव सिर्फ चेहरा बदलने तक सीमित नहीं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था की जड़ों तक पहुंचेगा।




