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परीक्षा सुधार टास्क फोर्स तो बहाना, ‘मोदी की छवि सुधारने की नई नौटंकी’: जयराम रमेश

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 26 जुलाई 2026

NEET और अन्य परीक्षाओं को लेकर देशभर में मचे घमासान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से परीक्षा सुधारों के लिए नई हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाने की घोषणा पर कांग्रेस ने जोरदार हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे परीक्षा व्यवस्था सुधारने की गंभीर पहल के बजाय “प्रधानमंत्री की छवि सुधारने की कोशिश” करार दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित करने की घोषणा की। इसका उद्देश्य NTA की परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाना है। लेकिन कांग्रेस का सवाल है—जब 2024 के परीक्षा विवाद के बाद बनाई गई विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर ही पूरी तरह अमल नहीं हुआ, तो अब एक और टास्क फोर्स क्यों?

जयराम रमेश ने 2024 के परीक्षा विवाद का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि तब भी सरकार ने सुधार के नाम पर समिति बनाई थी। कांग्रेस का कहना है कि पुरानी सिफारिशों को लागू करने के बजाय नई टास्क फोर्स की घोषणा करना जवाबदेही के असली सवालों से ध्यान हटाने की कोशिश है।

यह राजनीतिक हमला ऐसे समय आया है जब NEET पेपर लीक को लेकर चले देशव्यापी छात्र आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं। उनके इस्तीफे के बावजूद विपक्ष सरकार को घेरने के मूड में है। कांग्रेस का सवाल है कि यदि परीक्षा व्यवस्था में इतनी गंभीर खामियां थीं तो जिम्मेदारी केवल एक मंत्री तक सीमित कैसे हो सकती है?

कांग्रेस का तर्क है कि देश के छात्रों को नई समितियों, टास्क फोर्स और बड़ी घोषणाओं से ज्यादा लीक-प्रूफ प्रश्नपत्र, निष्पक्ष परीक्षा, समय पर परिणाम और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहिए।

अब नंदन नीलेकणी की अगुवाई वाली टास्क फोर्स की असली परीक्षा भी यही होगी। सरकार को साबित करना होगा कि यह कवायद केवल राजनीतिक डैमेज कंट्रोल नहीं है और इस बार सिफारिशें सरकारी फाइलों में दबकर नहीं रह जाएंगी।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से शुरू हुआ राजनीतिक डैमेज कंट्रोल अब टास्क फोर्स तक पहुंच गया है, लेकिन कांग्रेस ने निशाना सीधे प्रधानमंत्री मोदी पर साध दिया है। जयराम रमेश का संदेश साफ है—नई कमेटी बनाने से पुराने सवाल खत्म नहीं होंगे; सरकार को बताना होगा कि पिछली सिफारिशों का क्या हुआ और बार-बार पेपर लीक की जवाबदेही आखिर किसकी है?

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