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केन्द्र वादे से पीछे हट रहा है? लद्दाख को लेकर सोनम वांगचुक ने उठाए गंभीर सवाल

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | श्रीनगर | 2 जून 2026

लद्दाख के भविष्य और वहां लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली को लेकर एक बार फिर केन्द्र सरकार और स्थानीय नेतृत्व आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और लद्दाख की जनभावनाओं की प्रमुख आवाज बन चुके सोनम वांगचुक ने केन्द्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि 22 मई को नई दिल्ली में हुई महत्वपूर्ण बैठक में जो सहमति बनी थी, गृह मंत्रालय द्वारा बाद में साझा किए गए मसौदे में उसका स्वरूप पूरी तरह बदल दिया गया है। वांगचुक का आरोप है कि केन्द्र सरकार नौकरशाही पर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को सर्वोच्च अधिकार देने के अपने वादे से पीछे हटती दिखाई दे रही है, जिससे लद्दाख के लोगों के बीच अविश्वास और आशंकाएं बढ़ रही हैं। सोनम वांगचुक ने कहा कि 22 मई को हुई उप-समिति की बैठक में स्पष्ट रूप से यह सहमति बनी थी कि लद्दाख में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रशासनिक और नीतिगत मामलों में सर्वोच्च अधिकार दिए जाएंगे। बैठक के दौरान मौजूद सभी पक्षों ने इस दिशा में सकारात्मक सहमति दिखाई थी और इससे क्षेत्र में एक नई उम्मीद जगी थी। लेकिन जब गृह मंत्रालय की ओर से हाल ही में मसौदा दस्तावेज साझा किया गया तो उसमें कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को कमजोर कर दिया गया। वांगचुक के अनुसार यह मसौदा उस सहमति की वास्तविक भावना को प्रतिबिंबित नहीं करता जो बैठक में बनी थी।

उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों ने केन्द्र सरकार के साथ संवाद और सहयोग का रास्ता चुना है। कई महीनों तक चले आंदोलन, उपवास और लोकतांत्रिक संघर्षों के बाद जब बातचीत आगे बढ़ी तो क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बना था। लोगों को विश्वास हुआ था कि उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना जा रहा है। लेकिन अब यदि सहमति वाले बिंदुओं को बदलकर कमजोर किया जाता है तो इससे जनता के बीच यह संदेश जाएगा कि उनकी भावनाओं और अपेक्षाओं का सम्मान नहीं किया जा रहा। वांगचुक ने केन्द्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि वह सकारात्मक माहौल को नकारात्मकता में बदलने की गलती न करे।

लद्दाख नागरिक समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि केन्द्र शासित प्रदेश बनने के बाद से ही लद्दाख में निर्वाचित संस्थाओं की शक्तियों और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर लगातार बहस चल रही है। स्थानीय लोगों की प्रमुख मांग रही है कि क्षेत्र की नीतियों, संसाधनों, भूमि, रोजगार और विकास योजनाओं पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों के पास होना चाहिए। उनका मानना है कि यदि वास्तविक शक्ति केवल नौकरशाही के हाथों में रहेगी तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी और जनता की आकांक्षाओं का उचित प्रतिनिधित्व नहीं हो पाएगा।

सोनम वांगचुक ने यह भी संकेत दिया कि यदि केन्द्र सरकार अपने वादों पर कायम नहीं रहती है तो क्षेत्र में एक बार फिर व्यापक जन आंदोलन खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों ने हमेशा संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के तहत अपनी बात रखी है, लेकिन यदि लगातार आश्वासन देने के बाद भी निर्णयों में पारदर्शिता नहीं दिखाई गई तो जनता में निराशा और असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि लद्दाख केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सामरिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है, इसलिए यहां के लोगों के विश्वास को बनाए रखना केन्द्र सरकार की जिम्मेदारी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लद्दाख का मुद्दा केवल प्रशासनिक अधिकारों का नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय पहचान का भी प्रश्न बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में लद्दाख में संवैधानिक सुरक्षा, स्थानीय रोजगार, भूमि अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर कई बड़े आंदोलन हुए हैं। ऐसे में यदि केन्द्र और स्थानीय नेतृत्व के बीच बनी सहमति पर विवाद पैदा होता है तो इसका असर क्षेत्र की राजनीति और सामाजिक वातावरण पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल केन्द्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि लद्दाख के नागरिक संगठन और स्थानीय नेतृत्व आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने की तैयारी कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या केन्द्र सरकार 22 मई की बैठक में बनी सहमति के अनुरूप संशोधित मसौदा प्रस्तुत करेगी या फिर यह विवाद लद्दाख में एक नए राजनीतिक आंदोलन का रूप लेगा।

लद्दाख के भविष्य, लोकतांत्रिक अधिकारों और स्थानीय स्वायत्तता को लेकर शुरू हुई यह बहस अब राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बनती जा रही है। सोनम वांगचुक की ताजा टिप्पणी ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या केन्द्र वास्तव में लद्दाख के लोगों को निर्णय प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका देने के लिए तैयार है या फिर यह संघर्ष अभी लंबा चलने वाला है।

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