शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 2 जून 2026
CBSE की परीक्षा मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच एक और विवाद सामने आ गया है। बोर्ड द्वारा 1 जून को शुरू किए जाने वाले री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिका सत्यापन पोर्टल के तय समय पर सक्रिय नहीं होने से लाखों छात्र और अभिभावक असमंजस की स्थिति में रहे। दिनभर छात्र पोर्टल खुलने का इंतजार करते रहे, लेकिन देर रात तक वेबसाइट पूरी तरह सक्रिय नहीं हो सकी। अधिकारियों ने दावा किया कि पोर्टल मध्यरात्रि से पहले चालू कर दिया जाएगा, लेकिन तकनीकी देरी ने छात्रों की चिंता और बढ़ा दी।
गौरतलब है कि CBSE इस समय पहले से ही अपने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) और OnMark पोर्टल को लेकर विवादों में घिरा हुआ है। हाल ही में मूल्यांकन प्रणाली में तकनीकी खामियों, साइबर सुरक्षा संबंधी सवालों और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आए थे। ऐसे माहौल में री-इवैल्यूएशन पोर्टल का समय पर शुरू न हो पाना बोर्ड की तैयारियों और तकनीकी क्षमता पर नए सवाल खड़े कर रहा है।
छात्र संगठनों और अभिभावकों का कहना है कि परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया समयबद्ध होती है और इसमें हर दिन महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में पोर्टल का निर्धारित तिथि पर उपलब्ध न होना उन छात्रों के लिए परेशानी का कारण बन गया है जो अपने अंकों के सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करना चाहते हैं। कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर शिकायत करते हुए कहा कि उन्हें पूरे दिन वेबसाइट पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली।
इस बीच कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और CBSE पर हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में NEET, CUET, JEE और अन्य बड़ी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही तकनीकी गड़बड़ियां और प्रशासनिक अव्यवस्थाएं शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रही हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि छात्रों को बार-बार सिस्टम की खामियों की कीमत चुकानी पड़ रही है जबकि जिम्मेदार संस्थाएं जवाबदेही से बच रही हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि देश की सबसे बड़ी स्कूली परीक्षा संस्था होने के नाते CBSE से उच्च स्तर की तकनीकी तैयारी और पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है। री-इवैल्यूएशन जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की तकनीकी देरी लाखों छात्रों के मन में अविश्वास पैदा कर सकती है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि बोर्ड को ऐसी सेवाओं के लिए मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करनी चाहिए ताकि भविष्य में छात्रों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
हालांकि CBSE अधिकारियों का कहना है कि पोर्टल को पूरी तरह सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए अंतिम तकनीकी परीक्षण किए जा रहे थे, इसलिए थोड़ी देरी हुई। बोर्ड ने छात्रों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया है कि सभी पात्र विद्यार्थियों को आवेदन के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा और किसी का भी अधिकार प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
फिलहाल यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब CBSE की परीक्षा प्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया और डिजिटल सुरक्षा पहले से ही राष्ट्रीय बहस का विषय बनी हुई है। ऐसे में री-इवैल्यूएशन पोर्टल में हुई यह देरी बोर्ड के सामने भरोसा बहाल करने की एक नई चुनौती बनकर उभरी है।




