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ट्रंप ने कराया बड़ा समझौता! नेतन्याहू पीछे हटे, हिज्बुल्लाह ने भी रोके हमले

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वाशिंगटन/बेरूत | 2 जून 2026

लेबनान युद्ध पर फिलहाल ब्रेक, लेकिन ईरान-अमेरिका तनाव बरकरार

पश्चिम एशिया में तीन महीने से जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा किया है। ट्रंप ने कहा है कि उनकी पहल पर इज़राइल और हिज्बुल्लाह दोनों तनाव कम करने पर सहमत हो गए हैं। ट्रंप के अनुसार इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दक्षिणी बेरूत में सेना भेजने की योजना रोक दी है, जबकि हिज्बुल्लाह ने भी इज़राइल के खिलाफ हमले बंद करने का आश्वासन दिया है।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि नेतन्याहू के साथ उनकी “बेहद सकारात्मक और उत्पादक बातचीत” हुई, जिसके बाद इज़राइल ने बेरूत की ओर बढ़ रही अपनी सैन्य टुकड़ियों को वापस बुलाने का फैसला किया। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने हिज्बुल्लाह के प्रतिनिधियों से भी संपर्क किया और दोनों पक्षों ने गोलीबारी रोकने पर सहमति जताई है। ट्रंप के अनुसार अब न तो इज़राइल हिज्बुल्लाह पर हमला करेगा और न ही हिज्बुल्लाह इज़राइल को निशाना बनाएगा।

हालांकि ट्रंप के इस दावे के बावजूद क्षेत्र में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। दिनभर लेबनान, इज़राइल, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बना रहा। इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखी, जबकि हिज्बुल्लाह ने दावा किया कि उसके लड़ाके अभी भी रणनीतिक ब्यूफोर्ट किले के आसपास इज़राइली सैनिकों से मुकाबला कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी लेबनान संकट पर आपात बैठक बुलाने को मजबूर हुई, जिससे स्पष्ट है कि स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है।

उधर ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही अप्रत्यक्ष वार्ताओं को निलंबित कर दिया है। तेहरान का कहना है कि लेबनान में इज़राइली हमलों के चलते युद्धविराम की भावना का उल्लंघन हुआ है और ऐसी स्थिति में किसी भी समझौते पर आगे बढ़ना संभव नहीं है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा है कि लेबनान में युद्धविराम का उल्लंघन पूरे युद्धविराम समझौते का उल्लंघन माना जाएगा और इसके परिणामों की जिम्मेदारी अमेरिका तथा इज़राइल पर होगी।

तनाव केवल लेबनान तक सीमित नहीं है। कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए, जिन्हें अमेरिकी और कुवैती वायु रक्षा प्रणालियों ने नाकाम कर दिया। अमेरिका ने दावा किया है कि उसने कुवैत में अपने सैन्य ठिकानों की ओर दागी गई दो ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। इस घटना ने यह संकेत दे दिया है कि युद्ध का दायरा किसी भी समय पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है।

इस बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी संकट के बादल गहराते दिखाई दे रहे हैं। इज़राइल-लेबनान संघर्ष बढ़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य में अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में दो प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई है। ईरान समर्थित समूहों द्वारा बाब-अल-मंदेब और होर्मुज जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों को बाधित करने की चेतावनी ने दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों को चिंतित कर दिया है।

यूरोपीय संघ, फ्रांस और संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय शक्तियों ने तत्काल युद्धविराम और संयम की अपील की है। यूरोपीय संघ ने इज़राइल से लेबनान में सैन्य कार्रवाई रोकने की मांग की है, जबकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप के युद्धविराम प्रयासों का समर्थन किया है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ईरान, अमेरिका, इज़राइल और हिज्बुल्लाह के बीच व्यापक राजनीतिक समझौता नहीं होता, तब तक क्षेत्र में स्थायी शांति की संभावना बेहद कमजोर रहेगी।

फिलहाल ट्रंप के हस्तक्षेप से तत्काल टकराव टलता हुआ दिखाई दे रहा है, लेकिन जमीन पर जारी सैन्य गतिविधियां यह संकेत दे रही हैं कि पश्चिम एशिया अभी भी बारूद के ढेर पर बैठा है। एक छोटी सी चूक या नया हमला पूरे क्षेत्र को फिर से बड़े युद्ध की आग में झोंक सकता है।

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