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ट्रंप पर रोक: कैलिफोर्निया से पोर्टलैंड नेशनल गार्ड भेजने की योजना पर अदालत की सख्ती

वॉशिंगटन, 6 अक्टूबर

अमेरिका में राजनीतिक तनाव के बीच एक बड़ा कानूनी मोड़ आया है। संघीय न्यायाधीश ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कैलिफोर्निया से पोर्टलैंड में नेशनल गार्ड भेजने की योजना पर रोक लगा दी है। यह आदेश उस समय आया जब ट्रंप ने देशभर में बढ़ती हिंसा और विरोध प्रदर्शनों के बीच “कानून और व्यवस्था” बनाए रखने के नाम पर संघीय शक्ति का इस्तेमाल करने की घोषणा की थी।

अदालत का सख्त रुख

जज ने अपने आदेश में कहा कि राज्यों की स्वायत्तता और संघीय ढांचे की मर्यादा का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संघीय नेतृत्व राज्यों की अनुमति के बिना नेशनल गार्ड की तैनाती करता है, तो यह अमेरिकी संविधान की संघीय संतुलन की भावना के खिलाफ होगा।

कैलिफोर्निया ने जताई थी आपत्ति

कैलिफोर्निया प्रशासन ने पहले ही ट्रंप की इस योजना का कड़ा विरोध किया था। राज्य सरकार का कहना था कि पोर्टलैंड (जो ओरेगन राज्य में है) में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर कैलिफोर्निया की कोई सीधी भूमिका नहीं है और इस तरह की तैनाती न केवल राजनीतिक रूप से प्रेरित है बल्कि संघीय अतिक्रमण का उदाहरण भी है।

पोर्टलैंड बना संघर्ष का केंद्र

हाल के महीनों में पोर्टलैंड राजनीतिक हिंसा, पुलिस विरोधी प्रदर्शनों और चरमपंथी झड़पों का केंद्र बना हुआ है। ट्रंप ने अपने बयानों में बार-बार कहा था कि यदि स्थानीय प्रशासन स्थिति को नियंत्रित नहीं कर सकता, तो वे “कठोर कदम” उठाने से नहीं हिचकेंगे।

विपक्ष का हमला और समर्थकों का बचाव

जहां डेमोक्रेट्स ने ट्रंप पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया, वहीं उनके समर्थकों का कहना है कि “कानून और व्यवस्था” की बहाली के लिए संघीय दखल ज़रूरी था। अदालत का यह आदेश अब ट्रंप की रणनीति के लिए कानूनी और राजनीतिक दोनों ही स्तर पर बड़ा झटका माना जा रहा है।

अब आगे क्या?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की टीम इस आदेश को चुनौती दे सकती है, लेकिन फिलहाल अदालत के फैसले ने संघीय और राज्य अधिकारों की सीमाओं पर एक बार फिर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।

अमेरिका की राजनीति में यह फैसला ‘कानून बनाम संघवाद’ की जंग का ताज़ा अध्याय बन गया है।

 

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