पर्यावरण | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 4 जून 2026
राज्यों को तत्काल एक्शन प्लान लागू करने के निर्देश
भारत समेत दुनिया के कई देशों में आने वाले महीनों में सूखे और मौसम संबंधी गंभीर चुनौतियों का खतरा मंडरा रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के बाद अब संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने भी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि जून से अगस्त 2026 के बीच अल नीनो विकसित होने की संभावना 80 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं नवंबर तक इसके बने रहने की संभावना 90 प्रतिशत या उससे अधिक बताई गई है। WMO के अनुसार प्रशांत महासागर में समुद्री जल के असामान्य रूप से गर्म होने के कारण अल नीनो की स्थिति तेजी से विकसित हो रही है। इसका असर भारत सहित एशिया, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के कई हिस्सों में देखने को मिल सकता है। इससे सूखा, भीषण गर्मी, अनियमित वर्षा, बाढ़ और समुद्री तूफानों जैसी चरम मौसमी घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। मानसून केरल पहुंचने में भी देरी हुई है और इसके 4 जून के आसपास केरल तट पर पहुंचने की संभावना जताई गई है। सामान्य परिस्थितियों में मानसून 1 जून तक केरल पहुंच जाता है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने सभी राज्यों और संबंधित एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि कम बारिश और संभावित सूखे की स्थिति से निपटने के लिए जिलास्तर पर तैयारियां शुरू कर दी जाएं। किसानों तक मौसम संबंधी जानकारी तेजी से पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, कॉल सेंटर और कृषि सलाह सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो तब बनता है जब प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्री हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और दक्षिण अमेरिकी तट के पास समुद्र का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। यह स्थिति वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करती है और दुनिया के कई हिस्सों में मौसम का संतुलन बिगाड़ देती है।
WMO के वैज्ञानिकों ने बताया कि प्रशांत महासागर की सतह के नीचे का पानी सामान्य से लगभग 6 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म पाया गया है। यही अतिरिक्त ऊष्मा समुद्र की सतह को गर्म कर रही है और अल नीनो को मजबूत बना रही है। वैज्ञानिक इसे चिंताजनक संकेत मान रहे हैं।
हालांकि भारत के लिए कुछ राहत की उम्मीद भी बनी हुई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यदि इंडियन ओशन डायपोल (IOD) और मैडेन-जूलियन ऑस्सिलेशन (MJO) सक्रिय बने रहते हैं तो अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इंडियन ओशन डायपोल हिंद महासागर में बनने वाली एक जलवायु प्रणाली है। यदि इसका सकारात्मक चरण सक्रिय रहता है तो यह भारत में अच्छी वर्षा को बढ़ावा देता है और अल नीनो से होने वाले सूखे के असर को कम कर सकता है। वहीं मैडेन-जूलियन ऑस्सिलेशन बादलों और हवाओं का एक वैश्विक चक्र है, जो जब भारत के ऊपर सक्रिय होता है तो कमजोर मानसून के दौरान भी अच्छी बारिश करा सकता है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने भारत समेत सभी संभावित प्रभावित देशों को पहले से तैयारी करने की सलाह दी है। संगठन का कहना है कि समय रहते चेतावनी, जल संरक्षण, कृषि प्रबंधन और आपदा तैयारी जैसे कदम उठाकर नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
गौरतलब है कि 2023-24 का अल नीनो हाल के इतिहास के सबसे शक्तिशाली अल नीनो घटनाक्रमों में शामिल था, जिसने वैश्विक तापमान के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। ऐसे में 2026 में संभावित नए अल नीनो को लेकर वैज्ञानिक और सरकारें विशेष सतर्कता बरत रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले तीन महीने कृषि, जल संसाधन और खाद्य सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि मानसून कमजोर रहता है और अल नीनो मजबूत होता है, तो इसका असर खेती, बिजली उत्पादन, जल उपलब्धता और आम लोगों के जीवन पर भी पड़ सकता है।




