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दुनिया चीन की चौखट पर: 2026 में 23 देशों के 26 बड़े नेताओं ने बीजिंग में लगाई हाजिरी

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 3 जून 2026

वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में चीन की बढ़ती ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में दुनिया के 23 देशों के 26 शीर्ष नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों ने चीन का दौरा किया है। इनमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, चांसलर, क्राउन प्रिंस और विदेश मंत्री स्तर के नेता शामिल हैं।

ताजा दौरा ब्रिटेन की विदेश मंत्री इवेट कूपर का है, जो तीन दिवसीय यात्रा पर चीन पहुंची हैं। वह बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी और उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात करेंगी। इसके बाद वह चीन के प्रमुख तकनीकी केंद्र शेनझेन भी जाएंगी, जहां विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग पर चर्चा होगी।

2026 में चीन पहुंचने वाले प्रमुख नेताओं में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल हैं। इसके अलावा पाकिस्तान, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, वियतनाम, सिंगापुर, ब्राजील, सर्बिया, आयरलैंड, फिनलैंड और दक्षिण कोरिया सहित कई देशों के शीर्ष प्रतिनिधि भी चीन का दौरा कर चुके हैं।

विशेष बात यह है कि इस वर्ष चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने विदेश यात्राओं की बजाय दुनिया के नेताओं को अपने देश में आमंत्रित करने की रणनीति अपनाई है। इससे बीजिंग एक बार फिर वैश्विक कूटनीति का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है।

विश्लेषकों के अनुसार अधिकांश देश चीन में निवेश, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से पहुंच रहे हैं। कई देश चीन को न केवल एक बड़े बाजार के रूप में देखते हैं बल्कि उसे एक प्रभावशाली कूटनीतिक और भू-राजनीतिक शक्ति भी मानते हैं।

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यूरोप से सबसे अधिक नेताओं का चीन पहुंचना भी ध्यान आकर्षित कर रहा है। ब्रिटेन, जर्मनी, स्पेन, आयरलैंड और फिनलैंड जैसे देशों के शीर्ष नेताओं की यात्राएं यह संकेत देती हैं कि व्यापार, सुरक्षा और रूस से जुड़े मतभेदों के बावजूद यूरोपीय देश बीजिंग के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना चाहते हैं।

व्यापार के मोर्चे पर भी चीन का दबदबा लगातार बढ़ रहा है। चीन का कुल विदेशी व्यापार 2025 में रिकॉर्ड 45 ट्रिलियन युआन (करीब 6.5 ट्रिलियन डॉलर) तक पहुंच गया। इसके साथ ही वह लगातार नौवें वर्ष दुनिया का सबसे बड़ा वस्तु व्यापारिक राष्ट्र बना रहा। पिछले वर्ष पहली बार चीन का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) एक ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया।

अमेरिका अभी भी चीन का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच 2025 में लगभग 414.7 अरब डॉलर का व्यापार हुआ, जबकि वियतनाम, जापान, दक्षिण कोरिया और भारत भी चीन के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं।

निर्यात के क्षेत्र में चीन अब केवल सस्ते कपड़े और उपभोक्ता सामान बनाने वाला देश नहीं रहा। इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर पैनल, मशीनरी, धातु और ऑटोमोबाइल जैसे उच्च तकनीकी उत्पाद उसके सबसे बड़े निर्यात क्षेत्र बन चुके हैं। अकेले इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से 2024 में चीन ने एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक का निर्यात किया।

लगातार बढ़ती विदेशी यात्राओं और व्यापारिक साझेदारियों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि वैश्विक मंच पर चीन का प्रभाव पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है। बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच दुनिया की बड़ी शक्तियां और उभरती अर्थव्यवस्थाएं बीजिंग के साथ अपने रिश्तों को नई दिशा देने में जुटी हुई हैं।

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