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नेपाल में ‘Meta निवेश’ का दावा निकला गलत, WorldLink ने कहा— न कोई डील, न कोई समझौता

अंतरराष्ट्रीय / नेपाल | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 9 मई 2026

नेपाल में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर को लेकर अचानक तेज हुई चर्चाओं के बीच बड़ा खुलासा सामने आया है। नेपाल की प्रमुख इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी WorldLink Communications ने उन रिपोर्ट्स को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि Meta नेपाल में करीब 5 अरब नेपाली रुपये का निवेश कर डेटा सेंटर बनाने जा रही है।

नेपाल की मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि Meta, WorldLink के साथ साझेदारी में नेपाल में बड़ा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट शुरू करेगी। लेकिन WorldLink के CEO केशव नेपाल ने साफ कहा कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि “अगर इतना बड़ा विदेशी निवेश आ रहा होता तो हम आधिकारिक कार्यक्रम करके इसकी घोषणा करते। Meta और हमारी कंपनी के बीच कोई एग्रीमेंट या NDA तक साइन नहीं हुआ है।”

इस बयान के बाद नेपाल में डेटा सेंटर और विदेशी निवेश को लेकर फैली चर्चाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी सेवाएं देने और सीधे निवेश करने में बड़ा फर्क होता है, लेकिन कई रिपोर्ट्स दोनों को एक जैसा दिखा रही हैं।

WorldLink फिलहाल अपनी सहायक कंपनी “Data World” के जरिए Tier-3 डेटा सेंटर चला रही है। कंपनी का मानना है कि नेपाल का ठंडा मौसम, जलविद्युत ऊर्जा और कम बिजली लागत भविष्य में डेटा सेंटर उद्योग के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। हालांकि समुद्री केबल से दूरी और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी चुनौतियां अभी भी बड़ी बाधा हैं।

इसी हफ्ते नेपाल की दूसरी कंपनी Bichuten Data Vault ने भी दावा किया था कि वह Google Cloud, AMD और दूसरी अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों के साथ मिलकर बड़ा डेटा सेंटर बना रही है। लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि ये विदेशी कंपनियां केवल तकनीकी सेवाएं और क्लाउड सपोर्ट दे रही हैं, निवेश नहीं कर रहीं। पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश नेपाली कंपनियों का ही है।

डिजिटल इकोनॉमी विशेषज्ञ दिप्ता शाह ने कहा कि नेपाल में विदेशी तकनीकी कंपनियों के साथ साझेदारी को कई बार “विदेशी निवेश” के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि असल में पूंजी स्थानीय कंपनियां लगा रही हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल को डेटा सेंटर हब बनने से पहले बिजली उपलब्धता, इंटरनेट कनेक्टिविटी और लॉन्ग टर्म बिजनेस मॉडल पर गंभीर तैयारी करनी होगी।

विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी कि AI और बड़े डेटा सेंटर भारी मात्रा में बिजली खपत करते हैं। ऐसे में नेपाल को यह ईमानदारी से आंकना होगा कि क्या उसकी वर्तमान और भविष्य की ऊर्जा क्षमता इस महत्वाकांक्षा को संभाल सकती है। इतना साफ हो गया है कि नेपाल में Meta या Google जैसी कंपनियों के सीधे अरबों के निवेश की खबरें वास्तविकता से ज्यादा प्रचार साबित हो रही हैं। हालांकि तकनीकी सहयोग और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर नेपाल में नई संभावनाएं जरूर तेजी से उभर रही हैं।

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