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पूर्व दिल्ली मुख्य सचिव राकेश मेहता ने की आत्महत्या, नोएडा आवास पर मिला शव

ABC NATIONAL NEWS | नोएडा | 9 सितंबर 2026

75 साल के पूर्व आईएएस अधिकारी की मौत से प्रशासनिक जगत में शोक

दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राकेश मेहता की नोएडा स्थित उनके आवास पर आत्महत्या से मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, यह घटना 6 सितंबर की दोपहर सामने आई, जब करीब 1:28 बजे पुलिस को सूचना मिली। मेहता अपने नोएडा स्थित आवास में अकेले रहते थे। परिवार के लोगों ने जब उनसे संपर्क करने की कोशिश की और लगातार फोन करने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने घर के सुरक्षा गार्ड को इसकी जानकारी दी। गार्ड ने आवास पर पहुंचकर उन्हें मृत पाया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और मामले की जांच शुरू हुई।

सुसाइड नोट में लंबे समय से बीमारी का जिक्र

पुलिस के मुताबिक, घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है। पुलिस का कहना है कि इसमें मेहता ने लंबे समय से चल रही बीमारी को आत्महत्या के पीछे की वजह बताया है। पुलिस के अनुसार, मेहता हाइपरटेंशन और डायबिटीज से पीड़ित थे। हालांकि, पुलिस ने मामले में आगे की जांच जारी होने की बात कही है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सुसाइड नोट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनाक्रम से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम के बाद उनका शव परिवार को सौंप दिया गया और सोमवार को दिल्ली के लोधी रोड श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया।

1975 बैच के आईएएस अधिकारी, 2007 में बने दिल्ली के मुख्य सचिव

राकेश मेहता भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1975 बैच के AGMUT कैडर के अधिकारी थे। दिल्ली की नौकरशाही में उनका लंबा और महत्वपूर्ण कार्यकाल रहा। उन्होंने तत्कालीन शीला दीक्षित सरकार के दौरान दिल्ली प्रशासन में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2007 में उन्हें दिल्ली का मुख्य सचिव बनाया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने राजधानी की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों को संभाला। नवंबर 2010 में वे सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए।

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दिल्ली नगर निगम के आयुक्त भी रहे

मुख्य सचिव के पद के अलावा राकेश मेहता ने दिल्ली नगर निगम के आयुक्त के रूप में भी करीब तीन वर्षों तक जिम्मेदारी संभाली। यह पद राजधानी की नागरिक व्यवस्था के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। उनके कार्यकाल में दिल्ली की सड़कें, सार्वजनिक सुविधाएं, नागरिक सेवाएं और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई विषय प्रशासन की प्राथमिकताओं में रहे। एक वरिष्ठ नौकरशाह के रूप में उनका अनुभव दिल्ली सरकार और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा।

परिवहन, बिजली और बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं से जुड़ा नाम

राकेश मेहता को दिल्ली में कई महत्वपूर्ण परिवहन, बिजली और नागरिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन से भी जोड़ा जाता है। राजधानी में तेजी से बढ़ती आबादी और बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों के बीच उनके प्रशासनिक कार्यकाल में कई बड़े प्रोजेक्ट आगे बढ़े। 2010 में दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान भी वे प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल थे। ऐसे समय में राजधानी में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े काम चल रहे थे।

परिवार ने फोन किया, जवाब नहीं मिला तो खुला मामला

पुलिस के अनुसार, मेहता की पत्नी और उनका बेटा, जो देहरादून में रहता है, उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे। फोन का जवाब नहीं मिलने पर परिवार ने सुरक्षा गार्ड को घर की जांच करने के लिए कहा। गार्ड के पहुंचने के बाद घटना का पता चला। मेहता के एक रिश्तेदार, जो उनके घर के पास ही रहते हैं, भी सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल की जांच के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

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लंबा प्रशासनिक करियर, अचानक हुई मौत

राकेश मेहता ने अपने करीब चार दशक लंबे प्रशासनिक जीवन में दिल्ली के शासन और नागरिक व्यवस्था के कई महत्वपूर्ण दौर देखे। मुख्य सचिव से लेकर नगर निगम आयुक्त तक उन्होंने राजधानी के प्रशासन के शीर्ष स्तर पर जिम्मेदारियां निभाईं। उनके कार्यकाल में दिल्ली में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, परिवहन व्यवस्था, बिजली और नागरिक बुनियादी ढांचे जैसी चुनौतियां प्रमुख थीं। 75 वर्ष की उम्र में उनकी इस तरह मौत ने उनके लंबे प्रशासनिक सफर को अचानक समाप्त कर दिया।

जांच अभी जारी, अंतिम निष्कर्ष बाकी

पुलिस ने फिलहाल सुसाइड नोट और बीमारी को घटना से जोड़ते हुए जानकारी दी है, लेकिन मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच से जुड़े तथ्यों को भी देखा जा रहा है। इसलिए आत्महत्या के पीछे की परिस्थितियों को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी। एक वरिष्ठ पूर्व नौकरशाह की मौत का यह मामला न केवल प्रशासनिक जगत के लिए दुखद है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि सार्वजनिक जीवन में बेहद जिम्मेदार और प्रभावशाली पदों पर रह चुके लोगों के निजी जीवन में भी गंभीर व्यक्तिगत संघर्ष हो सकते हैं।

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