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गरीबों से रोज़गार छीनने की साज़िश मंज़ूर नहीं — प्रियंका गांधी

महेंद्र कुमार | नई दिल्ली 18 दिसंबर 2025

कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार के “विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)” बिल पर तीखा और आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा है कि यह बिल दरअसल मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने की साज़िश है। उन्होंने साफ कहा कि इस बिल का कांग्रेस पूरी ताकत से विरोध करेगी और इस मुद्दे पर सभी विपक्षी दल एकजुट हैं। प्रियंका गांधी के मुताबिक यह सिर्फ कानून बदलने का मामला नहीं है, बल्कि गरीबों से उनका आखिरी सहारा छीनने की कोशिश है।

प्रियंका गांधी ने सरकार के उस दावे पर भी सीधा हमला किया, जिसमें कहा जा रहा है कि नए बिल से मजदूरों को 100 दिन की जगह 125 दिन का काम मिलेगा। उन्होंने इसे खुलकर झूठ और चालाकी बताया। उनका कहना है कि मनरेगा कानूनी गारंटी वाली योजना थी, जिसमें काम मांगने पर काम देना सरकार की जिम्मेदारी थी, जबकि नया बिल रोजगार को बजट और प्रशासनिक फैसलों के भरोसे छोड़ देता है। ऐसे में 125 दिन का वादा सिर्फ कागज़ी आंकड़ा है, ज़मीनी सच्चाई नहीं।

उन्होंने चेतावनी दी कि इस बिल के जरिए राज्य सरकारों पर आर्थिक बोझ डाला जाएगा। जैसे-जैसे राज्यों पर खर्च बढ़ेगा, वैसे-वैसे वे मजबूरी में इस योजना को सीमित करेंगे। इसका सीधा नतीजा यह होगा कि मनरेगा को बिना बंद किए, खामोशी से खत्म कर दिया जाएगा। प्रियंका गांधी ने कहा कि यह तरीका खुलकर योजना बंद करने से भी ज़्यादा खतरनाक है।

प्रियंका गांधी ने जोर देकर कहा कि मनरेगा देश के सबसे गरीब, मज़दूर और बेबस लोगों के लिए जीवन रेखा रही है। कोरोना जैसी भयावह महामारी के समय, जब हर काम-धंधा ठप था, तब भी मनरेगा ने करोड़ों परिवारों को दो वक्त की रोटी का सहारा दिया। ऐसी योजना को खत्म करना या कमजोर करना सीधे-सीधे गरीब-मजदूर विरोधी राजनीति है।

प्रियंका गांधी ने कहा कि यह लड़ाई संसद तक सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सड़कों से सदन तक इस बिल का विरोध करेगी, क्योंकि यह लड़ाई किसी पार्टी की नहीं, बल्कि देश के करोड़ों गरीब मजदूरों के हक और सम्मान की लड़ाई है।

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