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SEBI की जांच के घेरे में कंपनी, जयराम रमेश ने LIC की हिस्सेदारी पर उठाए सवाल

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 4 जून 2026

राजेश एक्सपोर्ट्स मामले पर कांग्रेस का हमला

कांग्रेस ने स्वर्ण परिष्करण और आभूषण कारोबार से जुड़ी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया है। पार्टी ने कहा है कि जब भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) कंपनी में कथित वित्तीय अनियमितताओं और बड़े घोटाले की जांच कर रहा है, तब यह जानना जरूरी हो जाता है कि भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की संस्था ने इस कंपनी में इतनी बड़ी हिस्सेदारी कैसे और किन आधारों पर हासिल की। कांग्रेस का कहना है कि यह मामला केवल एक निजी कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों पॉलिसीधारकों के पैसे की सुरक्षा और सार्वजनिक संस्थाओं की निवेश प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ है।

जयराम रमेश ने उठाए गंभीर प्रश्न

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि SEBI की 3 जून 2026 की अंतरिम रिपोर्ट में राजेश एक्सपोर्ट्स से जुड़े कथित “विशाल घोटाले” का उल्लेख किया गया है। उन्होंने बताया कि LIC के पास कंपनी की लगभग 10.8 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो किसी भी निवेशक के लिए एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली हिस्सेदारी मानी जाती है। उन्होंने सवाल किया कि यदि कंपनी में इतने बड़े स्तर पर कथित अनियमितताएं चल रही थीं तो क्या LIC उन्हें पहचानने में विफल रही, या फिर इस निवेश के पीछे कोई अन्य कारण था।

क्या राजनीतिक दबाव में हुआ निवेश?

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह जांच का विषय है कि LIC द्वारा कंपनी में इतनी बड़ी हिस्सेदारी खरीदने का निर्णय पूरी तरह व्यावसायिक आधार पर लिया गया था या फिर इसके पीछे सत्ता प्रतिष्ठान का कोई प्रभाव था। जयराम रमेश ने पूछा कि क्या सार्वजनिक क्षेत्र की वित्तीय संस्थाओं के निवेश निर्णय स्वतंत्र रूप से लिए जा रहे हैं या फिर उन पर अप्रत्यक्ष राजनीतिक दबाव काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि उनकी बचत और बीमा प्रीमियम का पैसा किन मानकों के आधार पर निवेश किया जा रहा है।

करोड़ों पॉलिसीधारकों की चिंता का विषय

कांग्रेस का कहना है कि LIC केवल एक निवेशक नहीं बल्कि करोड़ों भारतीय परिवारों की बचत का संरक्षक है। ऐसे में यदि किसी कंपनी के खिलाफ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आते हैं, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठेगा कि निवेश से पहले उचित जांच-पड़ताल (Due Diligence) की गई थी या नहीं। विपक्ष का तर्क है कि यदि किसी कंपनी में जोखिम के संकेत पहले से मौजूद थे, तो LIC के निवेश विशेषज्ञों और प्रबंधन की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए।

SEBI की रिपोर्ट ने बढ़ाई हलचल

SEBI की अंतरिम रिपोर्ट सामने आने के बाद बाजार में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। नियामक संस्था कथित वित्तीय लेनदेन, कंपनी के संचालन और अन्य कारोबारी गतिविधियों की जांच कर रही है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है, लेकिन प्रारंभिक टिप्पणियों ने निवेशकों और वित्तीय बाजारों का ध्यान इस ओर आकर्षित कर दिया है।

विपक्ष ने मांगी पारदर्शिता

कांग्रेस ने मांग की है कि LIC इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करे और बताए कि कंपनी में निवेश के समय किन मानदंडों को अपनाया गया था। पार्टी का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि निवेशकों और पॉलिसीधारकों का भरोसा बना रहे। विपक्ष ने यह भी कहा कि यदि किसी स्तर पर चूक हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

सरकार और LIC की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इस मामले पर सरकार और LIC की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं SEBI की जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। लेकिन कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों ने सार्वजनिक निवेश, नियामकीय निगरानी और वित्तीय जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

राजेश एक्सपोर्ट्स पर SEBI की जांच और उसमें LIC की 10.8 प्रतिशत हिस्सेदारी ने राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस इसे सार्वजनिक धन की सुरक्षा और निवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बता रही है, जबकि अंतिम निष्कर्ष SEBI की जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल यह मामला वित्तीय क्षेत्र और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।

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