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मोदी सरकार ने 12 साल में शिक्षा व्यवस्था बर्बाद कर दी : राहुल गांधी

शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 4 जून 2026

NEET अभ्यर्थी की मौत से गरमाई राजनीति

मध्य प्रदेश की एक NEET अभ्यर्थी की कथित आत्महत्या के बाद देश की शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस घटना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देश की शिक्षा व्यवस्था को इस हद तक कमजोर कर दिया गया है कि आज एक पूरी पीढ़ी उसकी कीमत चुका रही है।

आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत से उठा सवाल

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की रहने वाली NEET अभ्यर्थी आकांक्षा चतुर्वेदी नागपुर में मृत पाई गईं। बताया जा रहा है कि NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं और उससे जुड़ी खबरों के बाद वह मानसिक तनाव और अवसाद में चली गई थीं। हालांकि मामले की जांच जारी है, लेकिन इस घटना ने छात्रों और अभिभावकों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है।

राहुल गांधी का सीधा हमला

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयान में कहा कि देश के युवाओं का भविष्य लगातार असुरक्षित होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के कारण लाखों छात्र मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि बार-बार होने वाले परीक्षा विवाद, पेपर लीक और अनियमितताओं ने छात्रों का भरोसा तोड़ दिया है।

“एक पूरी पीढ़ी कीमत चुका रही है”

कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में जिस प्रकार की नीतियां अपनाई गईं, उनका असर अब साफ दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार लाखों छात्र कठिन परिश्रम के बावजूद अनिश्चितता और असुरक्षा के माहौल में पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और इसका सबसे बड़ा नुकसान देश के भविष्य को हो रहा है।

NEET को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

पिछले कुछ वर्षों में NEET परीक्षा को लेकर कई बार विवाद सामने आए हैं। पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन में कथित खामियां, मूल्यांकन प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर विभिन्न राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। छात्रों और अभिभावकों ने कई बार परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग की है। ऐसे में आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत ने इन चिंताओं को फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।

विपक्ष ने मांगी जवाबदेही

कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल लगातार शिक्षा मंत्रालय और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि बार-बार सामने आने वाली अनियमितताओं के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की जाती। राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है।

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव, सीमित अवसर और लगातार सामने आने वाले विवाद छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी घटनाएं केवल परीक्षा प्रणाली ही नहीं बल्कि छात्रों के लिए बेहतर परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र की आवश्यकता को भी उजागर करती हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर नई बहस

आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत और उसके बाद राहुल गांधी के बयान ने देश में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और युवाओं के भविष्य को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। सरकार जहां परीक्षा सुधारों और पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयासों का दावा करती है, वहीं विपक्ष इन प्रयासों को अपर्याप्त बता रहा है।

NEET अभ्यर्थी की कथित आत्महत्या ने शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को फिर सामने ला दिया है। राहुल गांधी ने इस घटना को आधार बनाकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है और शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग की है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

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