अंतरराष्ट्रीय/ लाइफस्टाइल | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 3 नवंबर 2026
दुनिया स्टीव जॉब्स को उस शख्स के रूप में जानती है, जिसने तकनीक की दुनिया बदल दी। एप्पल के सह-संस्थापक के रूप में उन्होंने iPhone, Macintosh और डिजिटल तकनीक को नई पहचान दी। उनकी सोच, काम करने का जुनून और भविष्य को देखने की क्षमता ने उन्हें दुनिया के सबसे प्रभावशाली उद्यमियों में शामिल किया। लेकिन इसी शख्स की निजी जिंदगी का एक ऐसा अध्याय भी है, जिसमें एक छोटी बच्ची अपने पिता की पहचान और उनके प्यार के लिए तरसती रही।
यह कहानी है लीसा ब्रेनन-जॉब्स की, जो स्टीव जॉब्स और उनकी तत्कालीन साथी क्रिसैन ब्रेनन की बेटी हैं। लीसा का जन्म 17 मई 1978 को हुआ था। उस समय जॉब्स की उम्र महज 23 वर्ष थी। दोनों के रिश्ते में पहले से ही उतार-चढ़ाव थे और बेटी के जन्म के बाद यह रिश्ता और मुश्किल हो गया।
DNA टेस्ट ने साबित की पिता की पहचान
लीसा के जन्म के बाद स्टीव जॉब्स ने लंबे समय तक उन्हें अपनी बेटी मानने से इनकार किया। मामला अदालत तक पहुंचा। जॉब्स ने कानूनी दस्तावेजों में पितृत्व से इनकार करते हुए यहां तक दावा किया कि वे संतान पैदा करने में सक्षम नहीं हैं।
इसके बाद पितृत्व की जांच के लिए DNA टेस्ट कराया गया। जांच में जॉब्स के पिता होने की पुष्टि हुई। उन्हें लीसा के भरण-पोषण के लिए आर्थिक सहायता देने का आदेश दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआत में उन्हें हर महीने 500 डॉलर देने थे।
विडंबना देखिए कि जिस समय लीसा की मां क्रिसैन आर्थिक परेशानियों से जूझ रही थीं, उसी दौर में एप्पल के सार्वजनिक कंपनी बनने के बाद जॉब्स की संपत्ति में जबरदस्त उछाल आया। उनकी मां को घर चलाने के लिए वेट्रेस का काम करना पड़ा और दूसरे घरों में सफाई तक करनी पड़ी। मां-बेटी ने आर्थिक तंगी के दिन देखे।
पिता की दुनिया में जगह बनाने की कोशिश
लीसा की जिंदगी में पिता की मौजूदगी हमेशा अनियमित रही। उनकी आत्मकथा Small Fry में बचपन की यादें दर्ज हैं—कभी पिता के साथ कुछ अच्छे पल, कभी उनसे दूरी, कभी उम्मीद और कभी निराशा।
जब लीसा लगभग आठ वर्ष की थीं, तब जॉब्स ने उनसे मिलना-जुलना शुरू किया। धीरे-धीरे वे पिता की जिंदगी का हिस्सा बनीं। लेकिन यह रिश्ता सहज नहीं था। लीसा के अनुसार, जॉब्स का व्यवहार कभी स्नेहपूर्ण होता तो कभी बेहद ठंडा और आलोचनात्मक।
एक बच्ची के लिए यह समझना कठिन था कि जिस व्यक्ति को पूरी दुनिया जानती है, वह उसका पिता है, लेकिन उसके अपने जीवन में वह कभी मौजूद रहता है और कभी बिल्कुल दूर हो जाता है।
‘लिसा’ कंप्यूटर और बेटी के नाम का रहस्य
इस कहानी का एक दिलचस्प पहलू एप्पल के शुरुआती कंप्यूटरों में शामिल ‘Apple Lisa’ भी है। लीसा को बचपन से लगता था कि इस कंप्यूटर का नाम उनके नाम पर रखा गया है। लेकिन जब उन्होंने पिता से पूछा तो उन्होंने इससे इनकार कर दिया।
कई साल बाद गायक बोनो के सामने बातचीत के दौरान जॉब्स ने स्वीकार किया कि कंप्यूटर का नाम लीसा के नाम पर ही रखा गया था। लीसा के लिए यह स्वीकारोक्ति भावनात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण थी। उन्हें लगा कि उनके बचपन की एक पुरानी उम्मीद आखिरकार सच साबित हुई।
हार्वर्ड तक पहुंचीं, बनीं लेखिका
लीसा ने आगे चलकर हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाई की और वर्ष 2000 में स्नातक की डिग्री हासिल की। वे लेखन के क्षेत्र में आईं और एक जानी-मानी लेखिका बनीं।
2018 में प्रकाशित उनकी आत्मकथा Small Fry ने उनके बचपन, मां के संघर्ष, पिता के साथ जटिल रिश्ते और अपनी पहचान तलाशने की कहानी को सार्वजनिक किया। किताब में उन्होंने पिता को केवल एक महान कारोबारी या खलनायक के रूप में पेश नहीं किया, बल्कि एक ऐसे इंसान के रूप में याद किया जिसके व्यक्तित्व में प्रतिभा, स्नेह, कठोरता और भावनात्मक दूरी—सभी मौजूद थे।
उनकी किताब में यह भी सामने आता है कि किशोरावस्था में वे कुछ समय पिता के साथ रहीं। बाद में एक पारिवारिक विवाद के बाद जॉब्स ने उनकी हार्वर्ड की फीस देना बंद कर दिया। एक पारिवारिक मित्र ने उनकी मदद की, जिसे बाद में जॉब्स ने लौटा दिया।
क्या लीसा ने पिता की संपत्ति ठुकरा दी थी?
सोशल मीडिया पर अक्सर दावा किया जाता है कि लीसा ने 18 वर्ष की उम्र में अपने नाम से ‘Jobs’ सरनेम हटवा दिया और पिता की संपत्ति पर कभी कोई दावा नहीं किया। लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय स्रोत इन दावों की पुष्टि नहीं करते। उनका प्रकाशित नाम आज भी लीसा ब्रेनन-जॉब्स है। इसलिए इन वायरल दावों को स्थापित तथ्य मानना सही नहीं होगा।
स्टीव जॉब्स का निधन 5 अक्टूबर 2011 को हुआ। उनके अंतिम दिनों में पिता और बेटी के रिश्ते में कुछ भावनात्मक सुधार भी आया। लीसा ने अपनी आत्मकथा में उनके बीच हुई अंतिम बातचीत और पिता की ओर से जताए गए पछतावे का उल्लेख किया है।
दौलत से बड़ी होती है रिश्तों की जरूरत
स्टीव जॉब्स की कहानी हमें एक असहज सवाल के सामने खड़ा करती है। क्या दुनिया को बदल देने वाला व्यक्ति अपने घर के भीतर रिश्तों को संभालने में भी उतना ही सफल होता है? क्या अपार धन, तकनीकी प्रतिभा और वैश्विक प्रतिष्ठा किसी बच्चे को पिता का समय, अपनापन और भावनात्मक सुरक्षा दे सकते हैं?
लीसा ब्रेनन-जॉब्स की कहानी का महत्व इस बात में नहीं है कि उन्होंने कथित तौर पर पिता की दौलत ठुकरा दी। इसका महत्व इस बात में है कि उन्होंने अपने बचपन के अनुभवों को अपनी आवाज दी और अपनी अलग पहचान बनाई।
दुनिया ने स्टीव जॉब्स से तकनीक पाई, लेकिन लीसा की कहानी याद दिलाती है कि किसी बच्चे को पिता की सबसे बड़ी विरासत उसकी संपत्ति नहीं, उसका समय, प्यार और स्वीकार्यता होती है।



