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Standing Counsel के इस्तीफे से बड़ा सवाल: सुप्रीम कोर्ट में अब अरुणाचल का पक्ष कौन रखेगा?

24 अगस्त को Chief Secretary और Principal Secretary (Home) की अहम पेशी से पहले Anil Srivastav ने छोड़ा पद; CBI जांच से जुड़े मामले में कानूनी प्रतिनिधित्व को लेकर बढ़ी निगाहें

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | ईटानगर | 11 अगस्त 2026

अरुणाचल प्रदेश की सुप्रीम कोर्ट में कानूनी पैरवी को लेकर उस समय नया सवाल खड़ा हो गया है, जब राज्य के Additional Advocate General-cum-Standing Counsel, Anil Srivastav, ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। Srivastav लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में अरुणाचल प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं और उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब तीन दशक से राज्य की ओर से शीर्ष अदालत में पैरवी से जुड़े रहे हैं। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के Chief Secretary और Principal Secretary (Home) को 24 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। इसलिए इस समय इस्तीफे ने राज्य की कानूनी रणनीति और आगामी सुनवाई को लेकर सवाल बढ़ा दिए हैं।

CBI जांच के बीच आया इस्तीफा

मामला अरुणाचल प्रदेश में सरकारी ठेकों के कथित आवंटन से जुड़े आरोपों की CBI preliminary enquiry से जुड़ा है। आरोपों में ऐसी कंपनियों को सरकारी काम दिए जाने के दावे शामिल हैं, जिनके संबंध मुख्यमंत्री Pema Khandu के परिवार से होने का आरोप लगाया गया है। इन आरोपों की वास्तविकता और कानूनी स्थिति का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होगा। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राज्य और CBI के बीच रिकॉर्ड और जानकारी उपलब्ध कराने को लेकर स्थिति चर्चा में आई है।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी रिकॉर्ड को लेकर चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने हाल की कार्यवाही के दौरान CBI को राज्य से रिकॉर्ड और जरूरी जानकारी हासिल करने में कथित कठिनाइयों को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री Pema Khandu ने कहा था कि सुनवाई के दौरान राज्य का पक्ष प्रभावी तरीके से प्रस्तुत नहीं हो सका क्योंकि Standing Counsel टीम के कुछ सदस्य अदालत में मौजूद नहीं थे। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस कारण राज्य यह पर्याप्त रूप से नहीं रख पाया कि CBI के साथ सहयोग के संबंध में उसके पास कौन-कौन से रिकॉर्ड और साक्ष्य उपलब्ध हैं।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य के Chief Secretary और Principal Secretary (Home) को 24 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया। ऐसे समय में Standing Counsel का पद छोड़ना स्वाभाविक रूप से राज्य की कानूनी तैयारियों को लेकर सवाल पैदा करता है।

अब सबसे बड़ा सवाल—राज्य की ओर से कौन करेगा पैरवी?

Anil Srivastav के इस्तीफे के बाद सबसे सीधा सवाल यही है कि 24 अगस्त की महत्वपूर्ण सुनवाई में अरुणाचल प्रदेश की ओर से सुप्रीम कोर्ट के सामने कौन उपस्थित होगा। क्या राज्य तत्काल नया Standing Counsel नियुक्त करेगा? क्या किसी वरिष्ठ अधिवक्ता को अंतरिम रूप से जिम्मेदारी दी जाएगी? क्या नई कानूनी टीम को मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड और राज्य की स्थिति समझने के लिए पर्याप्त समय मिल पाएगा?

यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आगामी सुनवाई में राज्य के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति होनी है और मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है।

इस्तीफे की वजह अभी स्पष्ट नहीं

उपलब्ध जानकारी में Anil Srivastav के इस्तीफे का आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं है। इसलिए उनके इस्तीफे को किसी विशेष विवाद, दबाव या प्रशासनिक निर्णय से सीधे जोड़ना फिलहाल उचित नहीं होगा। इस्तीफा अपने आप में किसी कानूनी या राजनीतिक निष्कर्ष का प्रमाण नहीं है। लेकिन समय महत्वपूर्ण है—इस्तीफा उस समय आया है जब राज्य को सुप्रीम कोर्ट में अपनी कानूनी स्थिति बेहद मजबूती से प्रस्तुत करने की जरूरत है।

यही कारण है कि अब नियुक्त होने वाले नए कानूनी प्रतिनिधि की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।

24 अगस्त की सुनवाई पर सबकी नजर

24 अगस्त की सुनवाई अब केवल Chief Secretary और Principal Secretary (Home) की व्यक्तिगत उपस्थिति तक सीमित नहीं रह गई है। इस सुनवाई में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि राज्य CBI को रिकॉर्ड और जानकारी उपलब्ध कराने के संबंध में अपनी स्थिति किस तरह स्पष्ट करता है और सुप्रीम कोर्ट के सामने राज्य की ओर से कानूनी पक्ष कितनी प्रभावी तरीके से रखा जाता है।

यदि राज्य को नया Standing Counsel नियुक्त करना है, तो उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती कम समय में पूरे मामले की पृष्ठभूमि, दस्तावेजों और पिछली सुनवाइयों को समझना होगी।

राजनीतिक सवालों से ज्यादा महत्वपूर्ण है कानूनी तैयारी

यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील जरूर है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में राज्य की सफलता या स्थिति का आकलन राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि रिकॉर्ड और कानून के आधार पर होगा। CBI की preliminary enquiry में लगाए गए आरोप अभी आरोप ही हैं। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्य यह निर्धारित करेंगे कि आगे कोई ठोस कार्रवाई बनती है या नहीं।

राज्य के लिए इसलिए सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि वह अदालत के सामने सभी संबंधित दस्तावेज, CBI के साथ अपने सहयोग का रिकॉर्ड और अपनी कानूनी स्थिति स्पष्ट एवं व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करे।

अरुणाचल के लिए निर्णायक कानूनी मोड़?

Standing Counsel के इस्तीफे ने पहले से संवेदनशील मामले में एक नया प्रशासनिक और कानूनी प्रश्न जरूर खड़ा कर दिया है। लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव 24 अगस्त की सुनवाई के दौरान ही स्पष्ट होगा। यदि राज्य समय रहते सक्षम कानूनी प्रतिनिधि नियुक्त कर लेता है और सभी रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से अदालत के सामने रख देता है, तो इस्तीफा अपने आप में बड़ी बाधा नहीं बनेगा।

लेकिन यदि कानूनी प्रतिनिधित्व को लेकर भ्रम या तैयारी की कमी दिखाई देती है, तो सुप्रीम कोर्ट के सामने राज्य के लिए स्थिति और कठिन हो सकती है।

अब असली सवाल—सुप्रीम कोर्ट में अरुणाचल की आवाज कौन बनेगा?

Anil Srivastav के इस्तीफे ने एक सीधा और महत्वपूर्ण सवाल छोड़ दिया है—24 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के सामने अरुणाचल प्रदेश का पक्ष कौन और किस तैयारी के साथ रखेगा?

Chief Secretary और Principal Secretary (Home) को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना है। CBI जांच से जुड़े सवाल पहले से अदालत के सामने हैं। राज्य की ओर से रिकॉर्ड और सहयोग को लेकर स्पष्टीकरण अपेक्षित है। ऐसे में नई कानूनी टीम की नियुक्ति और उसकी तैयारी अब केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि आगामी सुनवाई की महत्वपूर्ण जरूरत बन गई है।

इस्तीफे की वजह चाहे जो हो, 24 अगस्त की सुनवाई अब अरुणाचल प्रदेश के लिए कानूनी रूप से बेहद अहम हो चुकी है। सवाल सिर्फ यह नहीं कि Standing Counsel कौन होगा—बड़ा सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट के सामने राज्य अपना पक्ष कितनी मजबूती, स्पष्टता और दस्तावेजी आधार के साथ रख पाएगा।

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