अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वेस्ट बैंक | 13 अगस्त 2026
वेस्ट बैंक के कुसरा गांव में दो फिलिस्तीनी परिवारों के घरों को लेकर तनाव बेहद गंभीर हो गया है। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार से कथित तौर पर इजरायली बस्तीकारों ने अबू रिदी और हसन परिवारों के घरों तक पहुंच को बाधित कर रखा है। परिवारों का कहना है कि पानी और बिजली की आपूर्ति कट गई है, भोजन का भंडार तेजी से खत्म हो रहा है और घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। मानवाधिकार संगठनों ने अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप कर परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
दीवार तोड़कर रास्ता किया बंद, सात लोग घर में फंसे
फिलिस्तीनी सुरक्षा कैमरे की फुटेज के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि रविवार शाम कथित तौर पर कुछ बस्तीकारों ने अबू रिदी परिवार के घर के बाहर की दीवार तोड़ दी और उसके पत्थरों से रास्ता अवरुद्ध कर दिया। इसके बाद परिवार के सात सदस्य, जिनमें दो छोटी बच्चियां भी शामिल थीं, घर से बाहर नहीं निकल सके। स्थानीय लोगों के लिए भी परिवार तक पहुंचना मुश्किल हो गया। परिवार ने सोशल मीडिया के जरिए मदद की अपील करते हुए अपनी स्थिति को गंभीर बताया।
‘हम अपने ही घर में कैद हैं’, परिवार ने लगाई मदद की गुहार
अबू रिदी परिवार की ओर से सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा गया कि वे अपने ही घर और अपनी जमीन पर रह रहे हैं और सिर्फ सुरक्षित तथा सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार चाहते हैं। परिवार के मुताबिक, चारों तरफ से अलग-थलग पड़ जाने के कारण स्थिति लगातार कठिन होती जा रही है। हसन परिवार की आयशा हसन ने भी आरोप लगाया कि बस्तीकारों ने घर का गेट तोड़ने की कोशिश की, पत्थर फेंके और गाली-गलौज की। उन्होंने परिवार में डर और दहशत का माहौल होने की बात कही।
पहले पहुंचे सैनिक, बस्तीकारों के साथ प्रार्थना का वीडियो सामने आया
मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि परिवारों की शुरुआती शिकायत के बाद मौके पर पहुंचे कुछ इजरायली सैनिकों को कथित तौर पर बस्तीकारों के साथ प्रार्थना करते हुए फिल्माया गया। बाद में इस घटना को लेकर सवाल उठे और बुधवार को इजरायली सुरक्षा बलों तथा बस्तीकारों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी। BBC के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया।
करीब एक दर्जन बस्तीकार अब भी मौके पर
रिपोर्ट के अनुसार बुधवार को इजरायली सुरक्षा बलों ने कुसरा गांव में बने इस नए बस्ती चौकीनुमा ठिकाने से पीछे हटने की कार्रवाई की, हालांकि करीब एक दर्जन बस्तीकारों के वहां बने रहने की बात सामने आई है। इजरायली सेना ने नए आउटपोस्ट की स्थापना की निंदा करते हुए कहा कि फिलिस्तीनी घरों में घुसना और उन पर कब्जा करना गैरकानूनी, निंदनीय और अस्वीकार्य गतिविधि है।
सेना ने सुरक्षा कर्मियों पर कार्रवाई की बात कही
इजरायली डिफेंस फोर्सेज यानी IDF ने कहा कि घटनास्थल पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों की गतिविधियों को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय लिया गया है। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को मौके पर पहुंचकर स्थानीय निवासियों से मुलाकात की और स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। यह घटनाक्रम इस सवाल को और महत्वपूर्ण बनाता है कि तनावग्रस्त इलाकों में सुरक्षा बल फिलिस्तीनी नागरिकों और बस्तीकारों के बीच उत्पन्न विवादों से किस तरह निपट रहे हैं।
एंबुलेंस पहुंची तो मिली थोड़ी राहत
मंगलवार देर रात एक फिलिस्तीनी एंबुलेंस को आखिरकार परिवारों तक पहुंचने की अनुमति मिली। एंबुलेंस अपने साथ भोजन लेकर पहुंची और एक बच्चे को इलाज के लिए वहां से बाहर ले गई। लगातार कई दिनों तक रास्ता बाधित रहने के बाद यह परिवारों के लिए तत्काल राहत का महत्वपूर्ण कदम था, लेकिन इलाके में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
पत्रकारों को भी रोकने का आरोप
मामले की रिपोर्टिंग करने पहुंचे इजरायली अखबार Haaretz के पत्रकारों को भी सोमवार को कथित तौर पर बस्तीकारों ने रोका। पत्रकारों के मुताबिक उनकी कार करीब दो घंटे तक आगे नहीं बढ़ सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद सैनिकों ने भी उन्हें सहायता नहीं दी। उन्हें बताया गया कि क्षेत्र बंद सैन्य क्षेत्र है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार इस आदेश को बस्तीकारों पर उसी तरह लागू नहीं किया गया।
मानवाधिकार संगठन ने सेना से तत्काल कार्रवाई मांगी
इजरायली मानवाधिकार संगठन Yesh Din ने मंगलवार को सेना की Central Command के प्रमुख से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की। संगठन ने मांग की कि घिरे हुए फिलिस्तीनी परिवारों की सुरक्षा की जाए, बस्तीकारों के नए आउटपोस्ट को खाली कराया जाए और कथित हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो।
कुसरा में पहले भी भड़की है हिंसा
कुसरा गांव के मेयर अब्देल अजीम वादी ने BBC को बताया कि गांव को निशाना बनाए जाने का एक लगातार पैटर्न दिखाई देता है। उनके अनुसार पिछले महीने गांव की नवनिर्मित मस्जिद में आग लगा दी गई थी और उसके आसपास हिब्रू भाषा में आपत्तिजनक graffiti भी लिखी गई थी। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि यह घटना गांव में बढ़ते तनाव की बड़ी तस्वीर का हिस्सा है।
पड़ोसी गांव में दो हफ्ते तक घर को घेरा गया था
कुसरा के पास जलूद गांव में भी जुलाई में एक फिलिस्तीनी घर को कथित तौर पर दो सप्ताह से अधिक समय तक बस्तीकारों ने घेरकर रखा था। रिपोर्ट के अनुसार इसके बाद घर के मालिक वहां से चले गए और बस्तीकारों ने उस संपत्ति पर कब्जा कर लिया। इससे स्थानीय फिलिस्तीनियों में यह डर बढ़ा है कि घरों और जमीनों पर दबाव बनाने की घटनाएं आगे भी दोहराई जा सकती हैं।
UN ने कहा—वेस्ट बैंक ‘ब्रेकिंग पॉइंट’ पर
संयुक्त राष्ट्र के मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया के उप विशेष समन्वयक रमिज अलाकबारोव ने सुरक्षा परिषद की बैठक में वेस्ट बैंक की स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि क्षेत्र ‘ब्रेकिंग पॉइंट’ पर पहुंच चुका है। उन्होंने विशेष रूप से बढ़ती बस्तीकार हिंसा और उसके मानवीय प्रभाव पर चिंता जताई।
2026 में हजारों फिलिस्तीनियों के विस्थापन का दावा
UN के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में अब तक करीब 3,800 फिलिस्तीनी बस्तीकार हिंसा, घरों के ध्वस्तीकरण और बेदखली के कारण विस्थापित हुए हैं। इनमें लगभग आधे बच्चे बताए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार जनवरी 2023 से अब तक वेस्ट बैंक की 127 फिलिस्तीनी बस्तियों या समुदायों ने पूर्ण या आंशिक विस्थापन का सामना किया है और 47 समुदाय पूरी तरह विस्थापित हुए हैं।
इस साल दर्जनों फिलिस्तीनियों की मौत का दावा
UN के अनुसार 2026 में वेस्ट बैंक में इजरायली बलों या बस्तीकारों की कार्रवाई में 76 फिलिस्तीनियों की मौत हुई है, जिनमें 18 बच्चे शामिल हैं। इसी अवधि में तीन इजरायली नागरिकों समेत तीन इजरायलियों की भी फिलिस्तीनियों के साथ संघर्ष और एक कथित वाहन हमले में मौत हुई है। ये आंकड़े वेस्ट बैंक में जारी हिंसा की गंभीरता को सामने रखते हैं।
इजरायल ने बस्तियों पर अपना दावा दोहराया
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इजरायल के राजदूत डैनी डैनोन ने बस्तियों को शांति के लिए बाधा मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि इजरायल इन क्षेत्रों में बना रहेगा और बस्तियों का विस्तार जारी रखेगा। उनका तर्क है कि इन इलाकों पर इजरायल के धार्मिक, ऐतिहासिक और कानूनी अधिकार हैं। इससे इजरायल और फिलिस्तीन के बीच जमीन और बस्तियों को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद की संवेदनशीलता और स्पष्ट होती है।
अंतरराष्ट्रीय कानून और बस्तियों पर लगातार विवाद
BBC की रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इजरायली बस्तियों को अवैध माना जाता है, जबकि इजरायल इस व्याख्या को स्वीकार नहीं करता और जमीन पर अपने ऐतिहासिक तथा कानूनी दावे रखता है। कुसरा की घटना इसी व्यापक विवाद के बीच सामने आई है, जहां जमीन, सुरक्षा, बस्ती विस्तार और फिलिस्तीनी नागरिकों के अधिकार एक-दूसरे से सीधे जुड़े हुए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल—परिवारों की सुरक्षा कौन करेगा?
कुसरा की घटना ने एक बार फिर वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी परिवारों की सुरक्षा और बस्तीकार हिंसा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ परिवार अपने घरों में फंसे होने और जरूरी सुविधाएं कटने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इजरायली सेना नए आउटपोस्ट को गैरकानूनी और अस्वीकार्य बता रही है। ऐसे में अब निगाह इस बात पर है कि सुरक्षा बल प्रभावित परिवारों को स्थायी सुरक्षा कैसे देते हैं और कथित हिंसा तथा घरों की घेराबंदी के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।
कुसरा की यह घटना सिर्फ दो परिवारों के घिरे होने की कहानी नहीं है—यह वेस्ट बैंक में जमीन, सुरक्षा और अधिकारों को लेकर बढ़ते टकराव की उस तस्वीर को सामने लाती है, जिसमें आम नागरिक सबसे ज्यादा असुरक्षित दिखाई दे रहे हैं।




