राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 22 अक्टूबर 2026
दिल्ली स्थित राजस्थान सरकार के स्वामित्व वाले बीकानेर हाउस में फोटोग्राफर और विजुअल आर्टिस्ट रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रदर्शनी में भारत में हाल के विरोध-प्रदर्शनों और युवा आंदोलनों को दर्शाने वाली 105 तस्वीरें लगाई गई थीं। आरोप है कि प्रबंधन ने इनमें से करीब 70 तस्वीरें हटाने को कहा। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने केंद्र की बीजेपी सरकार के शासन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कलात्मक अभिव्यक्ति पर कथित प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठाए हैं। रेहान वाड्रा कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा के बेटे हैं।
कांग्रेस ने सेंसरशिप पर उठाए सवाल
कांग्रेस ने गुरुवार को इस मामले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए चिंता जताई। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान की बीजेपी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि कलाकारों की आवाज दबाना लोकतंत्र पर हमला है। कांग्रेस का सवाल है कि यदि किसी प्रदर्शनी में सामाजिक और राजनीतिक घटनाओं को दर्ज करने वाली तस्वीरें शामिल हैं, तो उन्हें हटाने की मांग किस आधार पर की गई। पार्टी ने इस घटनाक्रम को कलात्मक स्वतंत्रता और असहमति की अभिव्यक्ति के व्यापक संदर्भ में देखा है।
रेहान वाड्रा ने कहा—पहले साझा किया था प्रस्ताव
रेहान वाड्रा ने कहा कि प्रदर्शनी की विस्तृत योजना और रूपरेखा काफी पहले ही बीकानेर हाउस के प्रबंधन के साथ साझा कर दी गई थी। इसके बावजूद प्रदर्शनी में शामिल तस्वीरों को हटाने के लिए कहा गया। विवाद के बाद प्रदर्शनी स्थल के एक हिस्से में तस्वीरें हटाए जाने की स्थिति सामने आई। इस घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा किया कि जब किसी आयोजन की विषयवस्तु और योजना पहले ही प्रबंधन को दे दी गई थी, तो बाद में तस्वीरों को लेकर आपत्ति क्यों उठी।
बीकानेर हाउस प्रबंधन ने क्या कहा?
बीकानेर हाउस के प्रबंधन ने अपने बयान में कहा कि जिन तस्वीरों को परिसर की नीति के अनुरूप पाया गया, उन्हें प्रदर्शित किया जाता रहा। प्रबंधन के इस पक्ष के बाद विवाद का केंद्र यह बन गया है कि तस्वीरों के चयन के लिए कौन-से मानदंड अपनाए गए और किन तस्वीरों को हटाने की जरूरत महसूस हुई। उपलब्ध जानकारी में हटाई गई सभी तस्वीरों के बारे में अलग-अलग कारण स्पष्ट नहीं किए गए हैं। इसलिए यह तय करने के लिए कि कार्रवाई उचित थी या नहीं, प्रबंधन की नीति और संबंधित निर्णय का पूरा विवरण सामने आना जरूरी है।
विरोध-प्रदर्शनों की तस्वीरों पर विवाद
प्रदर्शनी में हाल के विरोध-प्रदर्शनों और युवा आंदोलनों से जुड़ी तस्वीरें शामिल थीं। ऐसी तस्वीरें सामाजिक और राजनीतिक घटनाओं का दस्तावेजीकरण करती हैं और सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बन सकती हैं। दूसरी ओर, किसी सरकारी परिसर में प्रदर्शनी आयोजित करते समय प्रबंधन के अपने नियम भी हो सकते हैं। असली सवाल यह है कि क्या नियम स्पष्ट थे, क्या उन्हें सभी आयोजनों पर समान रूप से लागू किया गया और क्या तस्वीरें हटाने के फैसले के पीछे ठोस कारण बताए गए।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस तेज
इस मामले ने कलाकारों की स्वतंत्रता, सरकारी परिसरों में प्रदर्शनियों के नियमों और राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषयों को प्रस्तुत करने की सीमाओं पर बहस को तेज कर दिया है। कांग्रेस ने इसे सेंसरशिप का मामला बताया है, जबकि बीकानेर हाउस प्रबंधन ने अपनी नीति का हवाला दिया है। अब मामले में पारदर्शिता के लिए जरूरी है कि तस्वीरें हटाने के निर्णय का आधार सार्वजनिक किया जाए और यह स्पष्ट हो कि प्रदर्शनी की रूपरेखा पहले स्वीकार किए जाने के बावजूद बाद में आपत्ति क्यों उठी।



