राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 30 सितंबर 2026
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी DUSU चुनाव में कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI के खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के भीतर समीक्षा शुरू हो गई है। NSUI केंद्रीय पैनल की चार में से एक भी सीट नहीं जीत सकी। इस हार के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने NSUI प्रभारी कन्हैया कुमार और राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ को बुलाकर चुनाव परिणामों पर जवाब मांगा। बैठक में कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद रहे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक का उद्देश्य NSUI के कमजोर प्रदर्शन के कारणों और छात्र राजनीति में संगठन की रणनीति की समीक्षा करना था।
रिपोर्टों के मुताबिक, राहुल गांधी ने चुनाव प्रबंधन, उम्मीदवारों के चयन और प्रचार रणनीति को लेकर सवाल किए। उन्होंने यह जानना चाहा कि अध्यक्ष पद पर NSUI उम्मीदवार मुकाबले में मजबूत स्थिति में होने के बावजूद संगठन चारों केंद्रीय पदों में से एक भी सीट क्यों नहीं जीत पाया। DUSU चुनाव में ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर जीत दर्ज की, जबकि उपाध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीता।
दीपांशु शौकीन का मुद्दा भी उठा
बैठक में दीपांशु शौकीन का मामला भी चर्चा में आया। शौकीन पहले NSUI से जुड़े रहे हैं और 2023 तथा 2024 के छात्र संघ चुनावों में संगठन के लिए प्रचार कर चुके थे। 2026 में वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे और उपाध्यक्ष पद जीत लिया। उन्हें 30,615 वोट मिले, जबकि ABVP के इशु मौर्य को 16,910 और NSUI के वीर चतरथ को 4,313 वोट मिले।
रिपोर्टों के अनुसार, राहुल गांधी ने बैठक में यह सवाल भी उठाया कि शौकीन संगठन के साथ क्यों नहीं रहे और उन्हें NSUI के टिकट पर चुनाव लड़ाने की स्थिति क्यों नहीं बनी। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि कन्हैया कुमार और विनोद जाखड़ ने शौकीन की कुछ शर्तों का हवाला देते हुए अपना पक्ष रखा। हालांकि, कांग्रेस नेता अमिताभ दुबे ने बाद में शौकीन को टिकट नहीं दिए जाने की बात पर अलग दावा किया। उन्होंने कहा कि शौकीन को अध्यक्ष पद का टिकट दिया गया था, लेकिन उन्होंने उपाध्यक्ष पद से निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया।
NSUI का केंद्रीय पैनल में खाता नहीं खुला
19 सितंबर को घोषित DUSU परिणाम में ABVP के यश डबास ने अध्यक्ष पद पर 24,576 वोट हासिल कर NSUI के विजय शंकर मीणा को हराया, जिन्हें 22,523 वोट मिले। सचिव पद पर ABVP की रिया छावड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्मण राज सिंह विजयी रहे। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन की जीत के साथ ABVP तीन और निर्दलीय उम्मीदवार एक सीट पर रहे।
खास बात यह रही कि शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर NSUI और ABVP दोनों उम्मीदवारों को बड़े अंतर से पीछे छोड़ा। उनके 30,615 वोट इस चुनाव के केंद्रीय पैनल में सबसे अधिक वोटों में शामिल रहे। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, उनकी जीत ने 2009 के बाद DUSU केंद्रीय पैनल में किसी निर्दलीय उम्मीदवार की वापसी दर्ज की।
युवा राजनीति पर कांग्रेस की नजर
DUSU का चुनाव कांग्रेस के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि पार्टी हाल के महीनों में युवाओं और छात्रों के बीच अपना संपर्क बढ़ाने पर जोर दे रही है। राहुल गांधी के “छात्रों की गूंज” अभियान के तहत विभिन्न शहरों में छात्रों से संवाद किया गया है। ऐसे में DUSU में NSUI के प्रदर्शन ने छात्र संगठन की रणनीति और जमीनी पहुंच को लेकर पार्टी के भीतर समीक्षा की जरूरत को सामने ला दिया है।
बैठक में युवा राजनीति और Gen-Z की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी पर भी चर्चा होने की बात सामने आई है। कांग्रेस नेतृत्व के लिए सवाल यह है कि छात्रों के बीच संवाद के राजनीतिक अभियान को मजबूत संगठनात्मक उपस्थिति में कैसे बदला जाए।
कन्हैया कुमार की भूमिका पर सवाल
DUSU नतीजों के बाद कांग्रेस के भीतर और बाहर कन्हैया कुमार की NSUI प्रभारी के तौर पर भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, अभी तक उन्हें पद से हटाने का कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
फिलहाल राहुल गांधी द्वारा चुनाव परिणामों की समीक्षा के लिए कन्हैया कुमार और विनोद जाखड़ को बुलाया जाना इस बात का संकेत है कि पार्टी DUSU में मिली हार को गंभीरता से ले रही है। आगे यह देखना होगा कि समीक्षा के बाद NSUI की संगठनात्मक रणनीति में क्या बदलाव किए जाते हैं और कन्हैया कुमार की जिम्मेदारी को लेकर कांग्रेस नेतृत्व क्या फैसला करता है।



