पश्चिम बंगाल/ पर्यावरण | ABC NATIONAL NEWS | घाटाल, पश्चिम बंगाल | 30 सितंबर 2026
पश्चिम बंगाल के घाटाल क्षेत्र में हर साल आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए राज्य सरकार ने घाटाल मास्टर प्लान को आगे बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को मौजूदा वित्तीय वर्ष में इस योजना के लिए ₹1,200 करोड़ आवंटित करने की घोषणा की। उन्होंने अधिकारियों और स्थानीय विधायकों को मास्टर प्लान से जुड़े काम में तेजी लाने के निर्देश भी दिए।
सुवेंदु अधिकारी के मुताबिक, घाटाल मास्टर प्लान की कुल लागत में 50 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और बाकी 50 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान के लिए जमीन खरीदने के उद्देश्य से राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग से भी कुछ धनराशि मिलने की उम्मीद है।
घाटाल और आसपास के इलाकों में हर साल मानसून के दौरान बाढ़ एक बड़ी समस्या बन जाती है। भारी बारिश और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण बड़े क्षेत्र में पानी भर जाता है। इसका असर स्थानीय आबादी, खेती, सड़कों और रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। लंबे समय से इलाके में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए व्यापक योजना की जरूरत महसूस की जाती रही है।
इसी उद्देश्य से घाटाल मास्टर प्लान को बाढ़ नियंत्रण और जल निकासी से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। योजना के तहत आवश्यक बुनियादी ढांचे और जल प्रबंधन से जुड़े कार्यों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी है। सरकार का जोर ऐसे उपायों पर है, जिससे मानसून के दौरान जलभराव और बाढ़ के प्रभाव को कम किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को परियोजना से जुड़े काम में अनावश्यक देरी नहीं करने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय विधायकों को भी प्रशासन के साथ समन्वय कर काम में तेजी लाने को कहा गया है। जमीन की उपलब्धता और अधिग्रहण जैसे मुद्दे भी परियोजना के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण होंगे।
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि मास्टर प्लान के लिए जमीन खरीदने को लेकर आपदा प्रबंधन विभाग से मिलने वाली धनराशि का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इससे परियोजना के लिए जरूरी जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
घाटाल मास्टर प्लान में केंद्र और राज्य सरकार की साझा वित्तीय भागीदारी का प्रस्ताव भी महत्वपूर्ण है। योजना के लिए घोषित ₹1,200 करोड़ की राशि मौजूदा वित्तीय वर्ष में आवंटित की जाएगी। इसके साथ केंद्र से मिलने वाली हिस्सेदारी और अन्य विभागीय संसाधनों के जरिए परियोजना को आगे बढ़ाने की योजना है।
घाटाल में बाढ़ की समस्या केवल बारिश के दौरान जलभराव तक सीमित नहीं रहती। बाढ़ का असर किसानों और स्थानीय कारोबारियों पर भी पड़ता है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसल और स्थानीय परिवहन प्रभावित होते हैं। ऐसे में मास्टर प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि घोषित राशि का आवंटन और जमीन से जुड़ी प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और मास्टर प्लान के तहत जमीनी स्तर पर काम कब शुरू होता है। सरकार ने अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को काम में तेजी लाने के निर्देश देकर यह स्पष्ट किया है कि परियोजना को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।



