राष्ट्रीय/राज्य | ABC NATIONAL NEWS | भुवनेश्वर | 30 सितंबर 2026
ओडिशा में ट्रैफिक नियमों के पालन और चालान व्यवस्था को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्ट ने चौंकाने वाली तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में हजारों ऐसे चालान काटे गए जिनमें वाहन और उल्लंघन के बीच ही मेल नहीं था। 2,988 दोपहिया वाहनों पर सीट बेल्ट न लगाने के लिए जुर्माना लगाया गया, जबकि 4,786 तीन और चार पहिया वाहनों के खिलाफ हेलमेट नहीं पहनने का चालान किया गया। CAG की रिपोर्ट ओडिशा विधानसभा में पेश की गई है।
CAG की रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े ट्रैफिक निगरानी और चालान जारी करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। सामान्य तौर पर दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट और चार पहिया वाहनों में सीट बेल्ट सुरक्षा नियमों का हिस्सा हैं। ऐसे में दोपहिया वाहन को सीट बेल्ट उल्लंघन और कार या ऑटो-रिक्शा को हेलमेट उल्लंघन के लिए चालान किए जाने से रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है।
रिपोर्ट में केवल ट्रैफिक चालानों से जुड़ी गड़बड़ियां ही नहीं, बल्कि कचरा प्रबंधन से जुड़े रिकॉर्ड में भी गंभीर विसंगतियों का उल्लेख किया गया है। CAG के अनुसार, राउरकेला में 60,058 मीट्रिक टन पुराने कचरे के परिवहन का रिकॉर्ड दर्ज किया गया। हैरानी की बात यह है कि इस रिकॉर्ड में कचरा ढोने के लिए दो मोटरसाइकिल, एक ई-रिक्शा, एक कार और एक ऐसे वाहन का भी उल्लेख था, जिसका अस्तित्व ही नहीं था।
इस रिकॉर्ड ने नगर निकाय और कचरा प्रबंधन व्यवस्था की निगरानी पर भी सवाल खड़े किए हैं। इतनी बड़ी मात्रा में कचरे के परिवहन को लेकर दर्ज किए गए वाहनों की सूची और वास्तविक परिवहन क्षमता के बीच अंतर को CAG ने अपनी जांच में दर्ज किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह की प्रविष्टियां सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज काम और जमीन पर वास्तव में हुए काम के बीच अंतर की ओर इशारा करती हैं।
ओडिशा विधानसभा में पेश CAG की रिपोर्ट में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में प्रक्रियागत खामियों, रिकॉर्ड में गड़बड़ियों और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल से जुड़े मामलों को भी रेखांकित किया गया है। रिपोर्ट का उद्देश्य सरकारी व्यवस्था में सामने आई इन विसंगतियों को दर्ज करना और संबंधित विभागों की जवाबदेही की ओर ध्यान दिलाना है।
ट्रैफिक चालानों से जुड़ा मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चालान व्यवस्था सीधे आम लोगों से जुड़ी होती है। किसी वाहन के खिलाफ गलत श्रेणी में चालान जारी होने पर वाहन मालिक को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ अनावश्यक कानूनी और प्रशासनिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में डिजिटल चालान प्रणाली में दर्ज वाहन के प्रकार, उल्लंघन और कार्रवाई की जानकारी की विश्वसनीयता महत्वपूर्ण हो जाती है।
CAG की रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि हजारों चालानों में वाहन की श्रेणी और उल्लंघन का सही मिलान क्यों नहीं हुआ। साथ ही, जिन अधिकारियों या प्रणालियों के माध्यम से ये चालान जारी हुए, वहां रिकॉर्ड की जांच और सत्यापन की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी, यह भी जांच का विषय बनता है।
राउरकेला के कचरा परिवहन रिकॉर्ड ने मामले को और गंभीर बना दिया है। दो मोटरसाइकिल, एक ई-रिक्शा, एक कार और एक गैर-मौजूद वाहन के माध्यम से 60,058 मीट्रिक टन कचरा परिवहन दर्ज होना सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक गतिविधियों के बीच संभावित विसंगति को सामने लाता है। हालांकि CAG की रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियों का अंतिम प्रशासनिक या कानूनी निष्कर्ष संबंधित विभागों की कार्रवाई और आगे की जांच से स्पष्ट होगा।
CAG की रिपोर्ट का सामने आना सरकारी विभागों में रिकॉर्ड रखने, निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है। ट्रैफिक चालान हो या कचरा परिवहन का रिकॉर्ड—सरकारी व्यवस्था में दर्ज हर आंकड़ा वास्तविक कार्रवाई को सही तरीके से प्रतिबिंबित करे, यही किसी भी सार्वजनिक प्रणाली की विश्वसनीयता की बुनियादी शर्त है।



