महाराष्ट्र | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 21 अगस्त 2026
महाराष्ट्र में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संयोजक अभिजीत दीपके ने राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे के इस्तीफे की मांग की है। दीपके अपनी पार्टी के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत लातूर जिले के औसा तहसील के उजनी गांव स्थित जिला परिषद प्राथमिक स्कूल का दौरा कर रहे थे।
दीपके ने सरकारी स्कूलों की स्थिति पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ कक्षाओं में ऐसे बच्चे बैठे मिले जिनके नाम स्कूल के रिकॉर्ड में नहीं थे। उन्होंने स्कूल परिसर में खाली शराब की बोतलें और कथित गांजे की पत्तियां मिलने का भी आरोप लगाया। दीपके के अनुसार, स्कूल में पीने का पानी नहीं था और शौचालय उनकी आने से ठीक पहले साफ किए गए थे। पूरे परिसर को भी एक दिन पहले साफ-सुथरा कर दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनकी यात्रा से पहले दूसरे स्कूल के बच्चों को लाकर दिखावा किया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।
पत्रकारों से बात करते हुए दीपके ने कहा कि सरकारी स्कूलों की खराब हालत के लिए चुने हुए जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “छात्रों की जिंदगी का सवाल है। जब राजनीतिक नेता छात्रों के लिए कुछ नहीं कर रहे तो लोग उन्हें वोट क्यों दें? क्या लोग उन्हें सिर्फ हेलीकॉप्टर में घूमने के लिए वोट देते हैं? लोगों को देखना चाहिए कि उनके बच्चे किन हालात में पढ़ रहे हैं। इन मंत्रियों के कुत्तों को भी इन छात्रों से बेहतर सुविधाएं मिलती हैं।”
दीपके ने आरोप लगाया कि कई सरकारी स्कूलों में अभी भी उचित कक्षाएं, बेंच, शौचालय और सुरक्षित पहुंच मार्ग जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। छात्र टपकती टिन की छतों वाले स्कूलों में बिना पर्याप्त बेंच के पढ़ने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि अगर दस साल में ये बुनियादी समस्याएं नहीं सुलझाई जा सकीं तो सरकार को बताना चाहिए कि उसने क्या हासिल किया।
उन्होंने उन नेताओं पर भी निशाना साधा जो लगातार धर्म और धार्मिक मुद्दों को लेकर राजनीति करते हैं। दीपके का कहना था कि सरकार को धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों से आगे बढ़कर बच्चों की शिक्षा और सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि मंत्री और विधायक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजें ताकि उन्हें वास्तविक स्थिति का अंदाजा हो।
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान पिछले सप्ताह शुरू किया गया था। इससे पहले दीपके ने अपने गृह जिले हिंगोली के संतुक पिंपरी गांव के जिला परिषद स्कूल का भी दौरा किया था। वहां की शिकायतों के बाद स्थानीय ग्राम पंचायत ने मरम्मत का काम शुरू कर दिया था। लातूर दौरे के दौरान उन्होंने ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों के निलंबन की भी मांग की, जो कथित तौर पर आधिकारिक दौरे का हवाला देकर अनुपलब्ध रहे।
महाराष्ट्र में सरकारी स्कूलों की स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय रही है। कई रिपोर्ट्स में ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, शिक्षक-छात्र अनुपात की समस्या और मिड-डे मील व्यवस्था में खामियों का जिक्र होता रहा है। दीपके ने मिड-डे मील वर्कर की स्थिति का भी जिक्र किया, जो कथित तौर पर मात्र दो हजार रुपये मासिक पर खाना पकाने, बर्तन साफ करने और स्कूल की सफाई जैसे कई काम कर रहा था।
सीजेपी नेता ने कहा कि उनका अभियान जारी रहेगा और वे प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों से जवाबदेही की मांग करते रहेंगे। उन्होंने युवा मतदाताओं से अपील की कि वे शिक्षा को प्राथमिकता दें और नेताओं से पहले स्कूल सुधार की मांग करें, फिर वोट दें।
दादा भुसे शिंदे गुट की शिवसेना से हैं और राज्य में स्कूल शिक्षा मंत्री का पद संभाल रहे हैं। दीपके के आरोपों पर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस बीच, सीजेपी का यह अभियान महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
अभिजीत दीपके ने पहले राष्ट्रीय स्तर पर नीट पेपर लीक और शिक्षा संबंधी मुद्दों पर भी सक्रियता दिखाई थी। अब राज्य स्तर पर सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने की मांग को लेकर उनका अभियान तेज हो गया है। लातूर दौरे से साफ है कि वे मैदानी स्तर पर जाकर समस्याओं को उजागर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।



