Home » National » जंतर-मंतर प्रदर्शन की जांच करेगा सुप्रीम कोर्ट का पैनल

जंतर-मंतर प्रदर्शन की जांच करेगा सुप्रीम कोर्ट का पैनल

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 21 अगस्त 2026

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुलाई में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल के इस्तेमाल को लेकर उठे गंभीर सवालों की जांच अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित उच्चस्तरीय समिति करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जज आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (एचपीईसी) बनाई है और उसके सभी सदस्यों के नाम सार्वजनिक कर दिए गए हैं।

समिति में पूर्व पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व जज शालिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड डीजीपी डॉ. एलआर बिश्नोई शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे, ने इस समिति का गठन किया है। अदालत ने कहा कि सदस्यों का चयन उनके अनुभव और विशेषज्ञता के आधार पर किया गया है।

समिति को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की ओर से जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोपों की जांच करनी है। इसमें पैलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल जैसे मुद्दे शामिल हैं। अदालत ने विशेष रूप से महिलाओं प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लक्षित हिंसा, उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोपों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। साथ ही, पुलिसकर्मियों के घायल होने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और प्रदर्शनकारियों द्वारा हिंसा के आरोपों की भी जांच होगी।

20 जुलाई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान जंतर-मंतर से संसद की ओर प्रदर्शनकारियों का जुलूस निकला था। यह प्रदर्शन नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के खिलाफ था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएफ) के बीच झड़प हो गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पर्याप्त चेतावनी के बिना अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया, जिससे कई छात्रों को गंभीर चोटें आईं। कुछ रिपोर्ट्स में पैलेट गन के इस्तेमाल से आंख की रोशनी प्रभावित होने के मामले भी सामने आए। दूसरी ओर, पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की, वाहनों को नुकसान पहुंचाया और सुरक्षा कर्मियों पर हमला किया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, करीब 130 सुरक्षाकर्मी और दर्जनों प्रदर्शनकारी घायल हुए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने समिति को निर्देश दिया है कि वह जांच को निरंतर और समय-समय पर जारी रखे तथा पहला अंतरिम रिपोर्ट जल्द से जल्द पेश करे। समिति यह भी देखेगी कि क्या पुलिस कर्मियों के यूनिफॉर्म और नेमप्लेट स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे थे, क्या निषेधात्मक आदेशों का इस्तेमाल उचित था और क्या मेडिकल सहायता तथा मुआवजे की व्यवस्था पर्याप्त थी। अदालत ने वीडियो फुटेज और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग्स को भी समिति को सौंपने का निर्देश दिया है।

यह जांच इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन का सवाल उठा है। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि कई महिला छात्रों के साथ बदसलूकी हुई और कुछ को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। पुलिस पक्ष का कहना है कि भीड़ नियंत्रण के लिए ग्रेडेड यूज ऑफ फोर्स का पालन किया गया और असामाजिक तत्वों के घुसपैठ के कारण स्थिति बिगड़ी।

समिति के गठन से उम्मीद जगी है कि घटनाओं की स्वतंत्र, निष्पक्ष और व्यवस्थित जांच सामने आएगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह जांच एक बार का अभ्यास नहीं, बल्कि निरंतर मूल्यांकन होगा। समिति की सिफारिशें अदालत के लिए महत्वपूर्ण होंगी और भविष्य में प्रदर्शनों के दौरान बल प्रयोग के दिशानिर्देश तय करने में मददगार साबित हो सकती हैं।

जंतर-मंतर लंबे समय से प्रदर्शनों का केंद्र रहा है। इस घटना ने पूरे देश में चर्चा छेड़ दी थी और कई राज्यों में भी छात्र प्रदर्शन हुए। अब उच्चस्तरीय समिति की जांच से सच्चाई सामने आने की उम्मीद है। अदालत ने सभी पक्षों से सहयोग की अपील की है ताकि जांच सुचारू रूप से पूरी हो सके।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted