राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | रांची | 21 अगस्त 2026
झारखंड हाई कोर्ट ने 11वीं और 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं तथा इन परीक्षाओं के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने यह आदेश पारित किया। इससे उन सैकड़ों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है जिन्होंने परीक्षा पास करने के बाद सरकारी नौकरी ज्वाइन कर ली थी और अब उनकी सेवाएं फिलहाल सुरक्षित हो गई हैं।
याचिका दायर करने वाले अभ्यर्थियों का कहना था कि सरकार ने परीक्षाएं और नियुक्तियां रद्द करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया। प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन हुआ है। बड़ी संख्या में सफल अभ्यर्थी चयन के बाद सरकारी सेवा में शामिल भी हो चुके थे। कोर्ट ने कहा कि स्थायी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने से पहले उन्हें सुनवाई का अवसर देना जरूरी है।
झारखंड सरकार ने 18 अगस्त 2026 को अधिसूचना जारी कर 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं समेत कुल 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया था। इनमें फूड सेफ्टी ऑफिसर की भर्ती भी शामिल थी। सरकार ने परीक्षाओं में गड़बड़ी की शिकायतों और सीआईडी जांच में सामने आए तथ्यों का हवाला दिया था। छात्र और अभ्यर्थी पिछले करीब 25-26 दिनों से रांची में प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए परीक्षाएं रद्द करने और जांच कराने की मांग की थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत के बाद कई परीक्षाएं रद्द करने और जांच का आश्वासन दिया था।
11वीं और 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं के जरिए करीब 342 पदों पर नियुक्तियां हुई थीं। इनमें डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस, असिस्टेंट कलेक्टर, लेबर सुपरिटेंडेंट, असिस्टेंट रजिस्ट्रार और जेल सुपरिटेंडेंट जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल थे। फूड सेफ्टी ऑफिसर पद पर 56 अभ्यर्थी जून 2026 में सेवा में शामिल हो चुके थे। कुल मिलाकर करीब 400 से 450 अभ्यर्थियों की नौकरियां प्रभावित होने वाली थीं। याचिकाकर्ताओं में सोनम कुमारी, दीपमाला, सौरभ सिंह और अवधेश कुमार आदि शामिल थे। उनके अधिवक्ताओं ने कोर्ट में तर्क दिया कि न तो कोई एफआईआर दर्ज हुई है और न ही विभागीय कार्रवाई हुई है, फिर भी नियुक्तियां रद्द कर दी गईं।
हाई कोर्ट ने सरकारी अधिसूचना के संचालन पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को 15 सितंबर 2026 तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई उसी दिन होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतिम फैसला जांच के नतीजों और मामले की सुनवाई पर निर्भर करेगा। फिलहाल चयनित अभ्यर्थी अपनी सेवाएं जारी रख सकेंगे।
यह फैसला छात्र आंदोलन के बाद आया है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने सरकार के आश्वासन के बाद अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था। सीआईडी ने जेपीएससी के चेयरमैन एल. खियांगते को कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार भी किया था। सरकार ने 2014 से अब तक हुई कई परीक्षाओं की जांच का आदेश दिया था।
हाई कोर्ट के इस अंतरिम आदेश से अभ्यर्थियों में राहत की लहर है। कई चयनित अधिकारी पहले से ही विभिन्न विभागों में तैनात थे। अचानक नौकरी जाने का खतरा उनके और उनके परिवारों के लिए बड़ा झटका था। कोर्ट ने प्राकृतिक न्याय और लोक हित को ध्यान में रखते हुए रोक लगाई है।
मामले में आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। सरकार को अपना पक्ष रखना होगा कि किन आधारों पर परीक्षाएं रद्द की गईं। अगर जांच में गंभीर अनियमितताएं साबित होती हैं तो स्थिति बदल सकती है। फिलहाल परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने का सरकारी फैसला अदालत की रोक के दायरे में रहेगा। यह फैसला भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के अधिकारों के बीच संतुलन का उदाहरण बन गया है।
झारखंड में सरकारी नौकरियों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। कई परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप लगते रहे हैं। हाई कोर्ट के इस आदेश से उम्मीद जगी है कि आगे की प्रक्रिया निष्पक्ष और कानूनी तरीके से आगे बढ़ेगी।



