[the_ad id="179"]
Home » National » असम-बंगाल सीमा पर 300 से ज्यादा ट्रक फंसे, जरूरी सप्लाई प्रभावित होने की आशंका

असम-बंगाल सीमा पर 300 से ज्यादा ट्रक फंसे, जरूरी सप्लाई प्रभावित होने की आशंका

कच्चा पेट्रोलियम कोक लेकर जा रहे ट्रकों की आवाजाही रुकी; आंध्र प्रदेश के ट्रांसपोर्टरों ने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की, करीब आधे ट्रकों में विशाखापत्तनम के लिए माल

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | विजयवाड़ा | 22 अक्टूबर 2026

असम और पश्चिम बंगाल की सीमा पर कच्चा पेट्रोलियम कोक लेकर जा रहे 300 से अधिक ट्रकों के कई दिनों से फंसे होने का मामला सामने आया है। आंध्र प्रदेश लorry ओनर्स एसोसिएशन (APLOA) ने आरोप लगाया है कि जीएसटी नियमों के अनुपालन और एकीकृत जीएसटी (IGST) के भुगतान के बावजूद इन ट्रकों को आगे बढ़ने नहीं दिया जा रहा है। एसोसिएशन ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) से हस्तक्षेप कर ट्रकों की आवाजाही बहाल कराने की मांग की है। ट्रकों के लंबे समय तक रुके रहने से माल परिवहन, ट्रांसपोर्ट कारोबार और संबंधित औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।

विशाखापत्तनम के लिए जा रहा है आधा माल

आंध्र प्रदेश लorry ओनर्स एसोसिएशन के महासचिव वाई.वी. ईश्वर राव के अनुसार, फंसे हुए ट्रकों में से करीब 50 प्रतिशत माल विशाखापत्तनम पहुंचना है। बाकी ट्रक पश्चिम बंगाल के हल्दिया और दुर्गापुर, बिहार के बरौनी तथा ओडिशा के पारादीप के लिए रवाना हुए थे। इन गंतव्यों पर औद्योगिक इकाइयों और अन्य उपभोक्ताओं तक कच्चा पेट्रोलियम कोक पहुंचाया जाना है। एसोसिएशन का कहना है कि ट्रकों की आवाजाही रुकने से आपूर्ति व्यवस्था बाधित हो रही है और माल की समय पर डिलीवरी में देरी हो रही है।

ट्रांसपोर्टरों को आर्थिक नुकसान

ईश्वर राव ने बताया कि ट्रकों के कई दिनों तक सीमा पर खड़े रहने से परिवहन संचालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ट्रक चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ट्रकों के रुकने से वाहन संचालन का खर्च बढ़ता है और निर्धारित समय पर माल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से पूरे मामले की जांच कराने और संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर माल की आवाजाही जल्द शुरू कराने की अपील की है।

जीएसटी भुगतान के बावजूद रोकने का आरोप

एसोसिएशन का मुख्य आरोप है कि संबंधित माल पर जीएसटी नियमों का पालन किया गया है और IGST का भुगतान भी किया जा चुका है, इसके बावजूद ट्रकों को आगे जाने की अनुमति नहीं मिल रही है। हालांकि, ट्रकों को रोके जाने के पीछे संबंधित अधिकारियों का पक्ष और कार्रवाई का विस्तृत कारण उपलब्ध रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं किया गया है। ऐसे में यह जानना जरूरी होगा कि क्या मामला दस्तावेजों के सत्यापन, कर अनुपालन या किसी अन्य प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ा है।

खाने-पीने की सप्लाई पर क्या पड़ेगा असर?

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ट्रकों में कच्चा पेट्रोलियम कोक लदा है, जो औद्योगिक इस्तेमाल का कच्चा माल है। इसे सीधे खाने-पीने की वस्तुओं की खेप नहीं बताया गया है। इसलिए इस घटना से खाद्य पदार्थों की आपूर्ति प्रभावित होने का निष्कर्ष निकालना अभी सही नहीं होगा। हालांकि, यदि परिवहन में रुकावट लंबे समय तक बनी रहती है, तो संबंधित औद्योगिक इकाइयों की आपूर्ति और उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

केंद्र से जल्द समाधान की मांग

आंध्र प्रदेश लorry ओनर्स एसोसिएशन ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय और CBIC से मामले में हस्तक्षेप कर ट्रकों को आगे बढ़ने देने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। अब निगाह इस बात पर है कि संबंधित अधिकारी ट्रकों को रोके जाने के कारणों को स्पष्ट करते हैं या नहीं और माल की आवाजाही बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल 300 से अधिक ट्रकों के फंसे होने का दावा एसोसिएशन की ओर से किया गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *