राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 22 अक्टूबर 2026
वोट चोरी के आरोपों और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच बीजेपी ने एक बार फिर राहुल गांधी को निशाने पर लिया है। कांग्रेस लगातार मतदाता सूची, चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर सवाल उठा रही है। इसी बीच बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी पर विदेशी संगठनों के साथ मिलकर भारत में अराजकता फैलाने और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। बीजेपी के इस हमले को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस के आरोपों का सामना कर रही बीजेपी अब विपक्ष के विदेशी संगठनों से कथित संपर्कों को मुद्दा बना रही है। हालांकि, इन आरोपों को साबित करने के लिए ठोस प्रमाण सामने आना जरूरी है।
विदेशी संगठनों के नाम पर बीजेपी का हमला
गौरव भाटिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में फॉक्स न्यूज डिजिटल की ‘ग्लोबल कैओस इंक’ शीर्षक वाली रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि रिपोर्ट में विभिन्न देशों के 101 संगठनों का जिक्र है, जिन्हें कथित तौर पर विरोध-प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन से जुड़ी गतिविधियों के नेटवर्क के रूप में पेश किया गया है। बीजेपी प्रवक्ता ने प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल और इंडियन अलायंस पेरिस का नाम लेते हुए कांग्रेस नेतृत्व से इन संगठनों के साथ संपर्कों पर स्पष्टीकरण मांगा।
सोनिया और राहुल गांधी से जवाब की मांग
बीजेपी ने विशेष रूप से 28 अप्रैल 2025 को दिल्ली में प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के प्रतिनिधिमंडल के साथ सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मुलाकात पर सवाल उठाए हैं। गौरव भाटिया ने पूछा कि बैठक का उद्देश्य क्या था और उसमें किन मुद्दों पर चर्चा हुई। लेकिन किसी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात होना अपने आप में देशविरोधी गतिविधि या किसी साजिश का प्रमाण नहीं है। बीजेपी के आरोपों की गंभीरता का आकलन तभी किया जा सकता है, जब उनके समर्थन में ठोस दस्तावेज और स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य सामने रखे जाएं।
वोट चोरी के आरोपों से ध्यान हटाने की कोशिश?
विपक्ष की ओर से मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। राहुल गांधी और कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता तथा चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। ऐसे समय में बीजेपी का विदेशी संगठनों से कथित संबंधों का मुद्दा उठाना राजनीतिक बहस को एक नया मोड़ देता है। कांग्रेस समर्थकों का सवाल है कि जब मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर जवाब मांगे जा रहे हैं, तब उन सवालों का स्पष्ट जवाब देने के बजाय विपक्ष के संपर्कों को मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है?
राजनीतिक आरोपों से आगे प्रमाण भी जरूरी
बीजेपी का कहना है कि विदेशी संगठनों की गतिविधियों और भारत में विरोध-प्रदर्शनों के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल होनी चाहिए। लेकिन किसी राजनीतिक दल या नेता के खिलाफ गंभीर आरोप केवल मुलाकातों, संपर्कों या किसी रिपोर्ट में नाम आने के आधार पर साबित नहीं होते। इसके लिए गतिविधियों, वित्तीय संबंधों, निर्देशों और कथित साजिश से जुड़े प्रमाणों की आवश्यकता होती है।
फिलहाल बीजेपी ने राहुल गांधी और सोनिया गांधी से जवाब मांगा है। दूसरी ओर, चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष के सवाल भी राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। लोकतंत्र में दोनों ही पक्षों के दावों की जांच तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए। वोट चोरी के आरोप हों या विदेशी हस्तक्षेप के दावे—जनता को राजनीतिक बयानबाजी से आगे स्पष्ट जवाब, पारदर्शिता और प्रमाण चाहिए।



