[the_ad id="179"]
Home » National » लक्षद्वीप में 1,000 से ज़्यादा सरकारी पोस्ट खाली, न्यूनतम वेतन कानून भी लागू नहीं— हम्दुल्ला सईद

लक्षद्वीप में 1,000 से ज़्यादा सरकारी पोस्ट खाली, न्यूनतम वेतन कानून भी लागू नहीं— हम्दुल्ला सईद

एबीसी डेस्क 11 दिसंबर 2025

लोकसभा के सत्र में आज लक्षद्वीप के युवा सांसद हम्मदुल्ला सईद ने अपने द्वीपसमूह की गंभीर प्रशासनिक और सामाजिक समस्याओं को अत्यंत मजबूती और संवेदनशीलता के साथ उठाया। उन्होंने बताया कि भारत के इस सुंदर, रणनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण द्वीप क्षेत्र की वास्तविकता पर्यटकों की तस्वीरों से एकदम अलग है। जहाँ एक तरफ लोग लक्षद्वीप को समुद्री सुंदरता का प्रतीक मानते हैं, वहीं दूसरी तरफ यहाँ के निवासियों का दैनिक जीवन बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक उपेक्षा से जूझ रहा है। सईद ने सदन को जानकारी दी कि लक्षद्वीप एक सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा क्षेत्र है, जहाँ आज भी सरकारी सेवाएँ ही लोगों की मुख्य आजीविका का साधन हैं।

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस, मत्स्य पालन, प्रशासन—लगभग हर विभाग में 1,000 से अधिक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, जिससे सामान्य नागरिकों के जीवन पर गहरा असर पड़ रहा है। अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर और नर्सें नहीं, स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, पुलिस बल में रिक्तियां, मत्स्य पालन विभाग में स्टाफ की अनुपस्थिति और प्रशासनिक ढांचे में लगातार कमी—इन सबने मिलकर लक्षद्वीप की व्यवस्था को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है। सईद ने कहा कि “इन रिक्तियों को देखकर ऐसा लगता है जैसे लक्षद्वीप भारतीय प्रशासन की प्राथमिकता सूची से ही गायब हो चुका है।”

उन्होंने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए बताया कि इन खाली पदों के कारण द्वीपों के लोग न केवल सरकारी सेवाओं से वंचित हैं, बल्कि रोजगार के अवसर भी खत्म हो रहे हैं। लक्षद्वीप में निजी क्षेत्र लगभग नगण्य है, इसलिए यहाँ की जनता मुख्यतः सरकारी नौकरियों पर निर्भर करती है। ऐसे में हजारों पदों का खाली रहना न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि स्थानीय युवाओं के भविष्य के साथ भी अन्याय है।

सईद ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया—Minimum Wages Act, 1948 का लक्षद्वीप में लागू न होना। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज़ादी के 77 साल बाद भी देश का एक हिस्सा अभी तक न्यूनतम वेतन के बुनियादी अधिकार से वंचित है। उन्होंने साफ कहा कि “यह केवल कानून का मुद्दा नहीं है, यह सम्मान, समानता और नागरिक अधिकारों का सवाल है।” स्थानीय कामगारों को आज भी उनके उचित वेतन से वंचित रखा जा रहा है, जिससे आर्थिक विषमता और बढ़ती जा रही है।

हम्मदुल्ला सईद ने सदन में केंद्र सरकार और यूटी प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि रिक्त पदों को तुरंत भरा जाए, स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए और न्यूनतम वेतन कानून को तुरंत लागू किया जाए ताकि लक्षद्वीप के लोगों को वह न्याय और सम्मान मिल सके जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि द्वीपों के सीमित संसाधन, भौगोलिक अलगाव और प्राकृतिक परिस्थितियाँ प्रशासनिक लापरवाही को और गंभीर बना देती हैं, इसलिए लक्षद्वीप को विशेष ध्यान और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है।

लोकसभा में हम्मदुल्ला सईद की यह प्रभावशाली अपील न केवल लक्षद्वीप की आवाज़ थी, बल्कि प्रशासनिक न्याय, संवैधानिक अधिकारों और राष्ट्रीय समानता की भी एक सशक्त पुकार थी। उनके हस्तक्षेप के बाद अब यह उम्मीद की जा रही है कि केंद्र सरकार इन मुद्दों को गंभीरता से लेकर लक्षद्वीप के लिए ठोस और तत्काल कदम उठाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *