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चीन-तिब्बत-नेपाल में कुदरत का कहर: 250 से ज्यादा मौतें, करीब 750 लापता; 133 भारतीय संकट में, भारत ने संभाला राहत मोर्चा

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू/बीजिंग/नई दिल्ली | 27 अगस्त 2026

हिमालयी क्षेत्र में बुधवार को आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने नेपाल से चीन के तिब्बत तक तबाही का ऐसा मंजर पैदा कर दिया है, जिसका असर अब भारत तक दिखाई दे रहा है। नेपाल में भोटेकोशी नदी और उससे जुड़े जलप्रवाह में अचानक आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने गांवों, बाजारों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया, जबकि नेपाल-चीन सीमा के पास चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ग्यिरोंग में भारी भूस्खलन और मलबे ने सीमा क्षेत्र को तहस-नहस कर दिया। उपलब्ध नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार नेपाल में मृतकों की संख्या 200 से अधिक हो चुकी है, जबकि तिब्बत में भी लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबर है। दोनों प्रभावित क्षेत्रों को मिलाकर करीब 750 लोग लापता या संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री शामिल हैं, जबकि नेपाल की अलग-अलग प्रारंभिक सूचियों में 133 भारतीय नागरिकों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी सामने आई है। इस त्रासदी का असर भारत के सीमावर्ती राज्यों तक भी पहुंचा है, जहां संभावित बाढ़ को देखते हुए राहत और बचाव तंत्र को सक्रिय कर दिया गया है।

नेपाल में 200 से ज्यादा मौतें, गांव और बाजार मलबे में तब्दील

नेपाल इस प्राकृतिक आपदा का सबसे भयावह केंद्र बना हुआ है। रासुवा जिले के भोटेकोशी नदी क्षेत्र में अचानक आए अत्यधिक तेज जलप्रवाह और मलबे ने कुछ ही समय में बड़े इलाके को तबाह कर दिया। रासुवा के साथ नुवाकोट, धादिंग और आसपास के क्षेत्रों में मकान, वाहन, सड़कें और पुल पानी तथा मलबे के तेज बहाव में बह गए। कई जगह पूरे बाजार और बस्तियां मलबे में दब गईं। बिजली और संचार व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है और कई प्रभावित इलाकों तक सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल हो गया है। नेपाल पुलिस और स्थानीय अधिकारियों की ओर से जारी अलग-अलग अपडेट में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती रही और देर रात तक नेपाल में 200 से अधिक लोगों की मौत की सूचना सामने आ चुकी थी। राहत एवं बचाव अभियान अभी भी जारी है, इसलिए मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका बनी हुई है। आपदा ने नेपाल के महत्वपूर्ण जलविद्युत ढांचे को भी नुकसान पहुंचाया है और बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित होने की खबर है।

नेपाल में मौतों के साथ बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता या संपर्क से बाहर हैं। प्रभावित क्षेत्र में स्थानीय नागरिकों के अलावा बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक, तीर्थयात्री और कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े लोग मौजूद थे। नेपाल के पर्यटन अधिकारियों की शुरुआती सूचियों में सैकड़ों यात्रियों के अपने टूर ऑपरेटरों से संपर्क में नहीं होने की जानकारी सामने आई थी। बाद के अपडेट में 133 भारतीय नागरिकों के संपर्क से बाहर होने की बात कही गई। हालांकि यह स्पष्ट करना बेहद जरूरी है कि किसी व्यक्ति का संपर्क से बाहर होना उसकी मौत की पुष्टि नहीं है। पहाड़ी क्षेत्रों में संचार व्यवस्था टूटने, सड़कें बंद होने और कई इलाकों तक राहत दलों के नहीं पहुंच पाने के कारण बड़ी संख्या में लोग फिलहाल ट्रैक नहीं हो पा रहे हैं। वास्तविक स्थिति का पता बचाव अभियान आगे बढ़ने और संचार व्यवस्था बहाल होने के बाद ही चलेगा।

चीन के तिब्बत में ग्यिरोंग तबाह, 265 लोग लापता

नेपाल से सटे चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में भी प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है। ग्यिरोंग काउंटी और ग्यिरोंग पोर्ट के आसपास भारी मलबे और भूस्खलन ने सड़क, बिजली तथा संचार व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है। चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार कम-से-कम तीन लोगों की मौत हुई है और 265 लोग लापता बताए गए हैं। हालांकि चीनी अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि आंकड़ों का सत्यापन अभी जारी है और प्रभावित क्षेत्र में संपर्क बहाल होने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। ग्यिरोंग पोर्ट तक पहुंचने वाली सड़कें कई स्थानों पर पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने की खबर है, जिससे बचावकर्मियों की आवाजाही बेहद मुश्किल हो गई है।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने प्रभावित क्षेत्र में लापता लोगों की तलाश और राहत-बचाव अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। चीन ने ड्रोन के माध्यम से नुकसान का आकलन शुरू किया है और हेलीकॉप्टर, परिवहन विमान तथा अन्य बचाव संसाधनों को तैयार रखा है। सीमा क्षेत्र में संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण शुरुआती घंटों में कई लोगों की स्थिति का पता नहीं चल सका। ग्यिरोंग क्षेत्र कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण मार्ग होने के कारण इस आपदा का असर केवल स्थानीय आबादी तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां मौजूद विदेशी यात्रियों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा बन गई है।

करीब 750 लापता, 133 भारतीयों ने बढ़ाई चिंता

नेपाल और तिब्बत से सामने आए अलग-अलग आंकड़ों को मिलाने पर करीब 750 लोग लापता या संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। नेपाल की तरफ लगभग 500 और चीन के तिब्बत क्षेत्र में 265 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट सामने आई है। इन आंकड़ों में स्थानीय नागरिकों के साथ विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री भी शामिल हैं। नेपाल में सामने आया 133 भारतीय नागरिकों का आंकड़ा भारत के लिए विशेष चिंता का विषय बन गया है। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए लोग भी शामिल हैं। तिब्बत के ग्यिरोंग में कैलाश यात्रा से जुड़े एक समूह के 77 लोगों के बाढ़ की चपेट में आने की भी जानकारी सामने आई है। बताया गया कि बाढ़ आने के समय ये लोग एक इमिग्रेशन केंद्र में मौजूद थे और उनके बारे में तत्काल आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पा रही थी।

भारत ने नागरिक सुरक्षा और राहत दोनों मोर्चे संभाले

भारत ने इस संकट के बीच एक तरफ नेपाल और चीन में मौजूद अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने के लिए राजनयिक तंत्र सक्रिय किया है, वहीं दूसरी तरफ नेपाल के राहत अभियान में भी मदद शुरू कर दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अनुसार भारत ने नेपाल को शुरुआती तौर पर 10 टन मानवीय सहायता और जरूरी दवाइयां भेजी हैं। राहत सामग्री में अस्थायी आश्रय सामग्री, कंबल, स्वच्छता किट, सोलर लैंप और चिकित्सा सामग्री शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बातचीत कर जनहानि पर संवेदना जताई और हरसंभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया। नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी भारत की सहायता और एकजुटता के लिए आभार व्यक्त किया है।

भारत ने नेपाल और चीन में भारतीय नागरिकों के लिए आपातकालीन संपर्क व्यवस्था भी सक्रिय की है। भारतीय मिशन स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ संपर्क में हैं, ताकि संपर्क से बाहर भारतीय नागरिकों की स्थिति का पता लगाया जा सके और आवश्यकता पड़ने पर उनकी सुरक्षित निकासी की जा सके। वहीं नेपाल में आई बाढ़ के संभावित असर को देखते हुए भारत के सीमावर्ती राज्यों में भी राहत एवं बचाव तंत्र सक्रिय किया गया है।

बिहार-उत्तर प्रदेश में भी बढ़ा खतरा

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का असर सीमा पार भारत तक पहुंचने की आशंका ने बिहार और उत्तर प्रदेश की चिंता बढ़ा दी है। नेपाल से भारत की ओर आने वाली नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि की आशंका को देखते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है। रिपोर्टों के अनुसार बिहार के छह जिलों से करीब 5,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका था, जबकि प्रशासन ने कुल 10,000 से 12,000 लोगों को संभावित बाढ़ से बचाने के लिए निकासी की तैयारी की थी। उत्तर प्रदेश में भी नेपाल सीमा से लगे जिलों को सतर्क रखा गया है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां नदी के जलस्तर तथा नेपाल से आने वाले संभावित जलप्रवाह पर लगातार नजर रख रही हैं।

हिमालय के लिए बड़ी चेतावनी

शुरुआती वैज्ञानिक और उपग्रह आधारित आकलन इस आपदा के पीछे ग्लेशियर से जुड़े घटनाक्रम, हिमखंड और चट्टानों के खिसकने तथा अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा नदी घाटी में पहुंचने की संभावना की ओर इशारा करते हैं। कुछ रिपोर्टों में आपदा से पहले आए 4.4 तीव्रता के भूकंप को भी संभावित ट्रिगर के रूप में देखा गया है, हालांकि प्राकृतिक आपदा का अंतिम कारण अभी जांच का विषय है। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि हिमालय में ग्लेशियर, भूस्खलन, भूकंपीय गतिविधि और अचानक अत्यधिक जलप्रवाह किस तरह मिलकर कुछ ही मिनटों में बड़े पैमाने पर तबाही पैदा कर सकते हैं।

नेपाल, चीन के तिब्बत और भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों को प्रभावित करने वाली यह त्रासदी अब केवल किसी एक देश की प्राकृतिक आपदा नहीं रह गई है। नेपाल में 200 से ज्यादा मौतें, तिब्बत में भी जनहानि, करीब 750 लोगों का लापता या संपर्क से बाहर होना और 133 भारतीय नागरिकों की स्थिति को लेकर चिंता पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए गंभीर चेतावनी है। अब सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, भारतीय नागरिकों समेत विदेशी यात्रियों की सुरक्षित निकासी, नेपाल को राहत सहायता पहुंचाना और बिहार-उत्तर प्रदेश को संभावित बाढ़ से बचाना है। साथ ही यह आपदा भारत, नेपाल और चीन के बीच रियल-टाइम मौसम सूचना, नदी जलस्तर डेटा, शुरुआती चेतावनी और सीमा-पार आपदा प्रबंधन को मजबूत करने की जरूरत को भी सामने ला रही है।

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