Home » Politics » राहुल गांधी PM मोदी-शाह से आगे निकल चुके हैं : संजय राउत

राहुल गांधी PM मोदी-शाह से आगे निकल चुके हैं : संजय राउत

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 27 अगस्त 2026

दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात के बाद शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने ऐसा राजनीतिक दावा कर दिया, जिस पर अब सियासी चर्चा तेज हो गई है। राउत ने राहुल गांधी की तस्वीर साझा करते हुए कहा कि राहुल गांधी राजनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बहुत आगे निकल चुके हैं। राउत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्ष लगातार सरकार को कई मुद्दों पर घेर रहा है और महाराष्ट्र से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक विपक्षी दलों के बीच रणनीतिक बातचीत जारी है।

राहुल गांधी और संजय राउत की मुलाकात में महाराष्ट्र के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम के साथ देश की राजनीतिक स्थिति पर भी चर्चा हुई। मुलाकात के बाद राउत ने राहुल गांधी की जमकर तारीफ की और उनके राजनीतिक कद को प्रधानमंत्री मोदी तथा अमित शाह से भी आगे बताया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस आधार पर राहुल गांधी को दोनों नेताओं से आगे मान रहे हैं। इसलिए राउत का बयान फिलहाल एक राजनीतिक आकलन और व्यक्तिगत राय के रूप में देखा जा रहा है, न कि किसी वस्तुनिष्ठ राजनीतिक माप का निष्कर्ष।

राउत और राहुल गांधी की मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों नेता विपक्षी राजनीति के अलग-अलग घटकों का प्रतिनिधित्व करते हैं। राहुल गांधी कांग्रेस के प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में हैं, जबकि संजय राउत शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख रणनीतिक और मुखर चेहरों में शामिल हैं। महाराष्ट्र में कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के बीच राजनीतिक तालमेल का अपना महत्व है और राज्य के घटनाक्रम का असर विपक्ष की व्यापक रणनीति पर भी पड़ता है।

राहुल गांधी के राजनीतिक सफर की बात करें तो पिछले कुछ वर्षों में उनकी राजनीति का स्वरूप काफी बदला है। भारत जोड़ो यात्रा और बाद में भारत जोड़ो न्याय यात्रा के जरिए उन्होंने सड़क पर व्यापक राजनीतिक संपर्क बनाने की कोशिश की। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई, सामाजिक न्याय, आर्थिक असमानता और संस्थागत मुद्दों को लगातार उठाया। इसके अलावा संसद में भी राहुल गांधी सरकार की नीतियों पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं।

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक आधार और चुनावी अनुभव राहुल गांधी से बिल्कुल अलग है। मोदी लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हैं और प्रधानमंत्री के रूप में लगातार तीसरे कार्यकाल में देश का नेतृत्व कर रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, हालांकि उसे अपने दम पर बहुमत नहीं मिला और नरेंद्र मोदी ने सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार बनाई। दूसरी तरफ कांग्रेस ने 2024 में अपनी लोकसभा सीटों की संख्या 2019 के मुकाबले बढ़ाकर 99 की थी और राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता बने।

अमित शाह की भूमिका भी बीजेपी की चुनावी और संगठनात्मक रणनीति में बेहद महत्वपूर्ण रही है। प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी जोड़ी को बीजेपी की चुनावी राजनीति का सबसे प्रभावशाली नेतृत्व संयोजन माना जाता है। ऐसे में संजय राउत का राहुल गांधी को मोदी-शाह से आगे बताना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक बहस को जन्म देने वाला बयान है।

राउत की राजनीति को समझने के लिए महाराष्ट्र का संदर्भ भी महत्वपूर्ण है। शिवसेना में विभाजन के बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर हैं। इसी राजनीतिक संघर्ष के बीच कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) का साथ महाराष्ट्र की विपक्षी राजनीति का अहम हिस्सा रहा है। इसलिए राहुल गांधी के साथ राउत की मुलाकात को केवल व्यक्तिगत मुलाकात के तौर पर देखने के बजाय महाराष्ट्र और राष्ट्रीय विपक्ष की राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

संजय राउत इससे पहले भी प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी नेतृत्व पर तीखी राजनीतिक टिप्पणियां करते रहे हैं। वह विपक्षी गठबंधन की राजनीति के मुखर प्रवक्ताओं में भी गिने जाते हैं। ऐसे में राहुल गांधी की यह प्रशंसा बीजेपी नेतृत्व के खिलाफ विपक्ष की राजनीतिक धारणा को और स्पष्ट करती है। राउत का संदेश यह है कि विपक्ष के भीतर राहुल गांधी की स्वीकार्यता और राजनीतिक भूमिका पहले की तुलना में मजबूत हुई है।

हालांकि, यहां एक दिलचस्प राजनीतिक सवाल भी है—क्या किसी नेता का राजनीतिक रूप से ‘आगे निकलना’ केवल चुनावी सीटों से तय होता है, या जनसंपर्क, विपक्ष का नेतृत्व, संसद में भूमिका और भविष्य की राजनीतिक संभावना भी इसके पैमाने हैं? राउत का बयान इसी बहस को हवा देता है। चुनावी राजनीति में मोदी की राष्ट्रीय पकड़, बीजेपी का संगठनात्मक नेटवर्क और लंबे समय का सत्ता अनुभव अपनी जगह है, जबकि राहुल गांधी विपक्ष के प्रमुख चेहरे के रूप में अपनी राजनीतिक शैली और मुद्दों को लेकर अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

यही वजह है कि राउत की टिप्पणी को केवल राहुल गांधी की तारीफ मानकर छोड़ देना भी आसान नहीं है। इसके पीछे विपक्ष की बदलती रणनीति और राहुल गांधी को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख चुनौती के रूप में स्थापित करने की कोशिश का संकेत भी देखा जा सकता है। दूसरी तरफ बीजेपी इस तरह के दावों को राजनीतिक बयानबाजी मानकर खारिज कर सकती है।

फिलहाल दिल्ली की इस मुलाकात से एक बात साफ है—राहुल गांधी को लेकर विपक्षी खेमे में राजनीतिक आत्मविश्वास बढ़ा है और संजय राउत ने उसे खुले शब्दों में सामने रख दिया है। लेकिन राहुल गांधी वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह से राजनीतिक रूप से आगे निकल चुके हैं या नहीं, इसका जवाब किसी एक नेता के बयान से नहीं, बल्कि आने वाले चुनाव, जनसमर्थन और भारतीय राजनीति की दिशा तय करेगी।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted