अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/मॉस्को | 27 अगस्त 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने CIA प्रमुख जॉन रैटक्लिफ की मॉस्को में हुई बेहद गोपनीय और बिना पूर्व घोषणा वाली यात्रा को लेकर बड़ा संकेत दिया है। ट्रंप ने कहा है कि रूस की खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों के साथ रैटक्लिफ की बैठक से “कुछ सामने आ सकता है”। इस बयान ने ऐसे समय में अमेरिका-रूस के बीच पर्दे के पीछे चल रही कूटनीतिक और खुफिया गतिविधियों को लेकर अटकलें तेज कर दी हैं, जब यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की अमेरिकी कोशिशें अब तक किसी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंच पाई हैं। रैटक्लिफ मंगलवार को अमेरिकी सैन्य विमान से मॉस्को पहुंचे और कुछ ही घंटों बाद वहां से रवाना हो गए। यात्रा की आधिकारिक घोषणा पहले नहीं की गई थी और CIA, व्हाइट हाउस तथा पेंटागन ने भी अब तक इस दौरे को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
मॉस्को में क्या हुआ, रूस ने क्या कहा?
रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन ने पुष्टि की है कि रैटक्लिफ की रूस की खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों के साथ बातचीत हुई, लेकिन उनकी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कोई मुलाकात नहीं हुई। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि अमेरिकी CIA प्रमुख के रूसी खुफिया अधिकारियों के साथ संपर्क हुए हैं, लेकिन राष्ट्रपति पुतिन से कोई बैठक नहीं हुई। हालांकि पेस्कोव ने यह भी स्पष्ट किया कि रूसी राष्ट्रपति को ऐसी महत्वपूर्ण गतिविधियों की जानकारी तत्काल दी जाती है। बातचीत के वास्तविक एजेंडे को लेकर क्रेमलिन ने कोई जानकारी नहीं दी है। जब BBC ने पेस्कोव से पूछा कि बैठक में किस मुद्दे पर चर्चा हुई, तो उन्होंने कहा कि इस विषय पर उनके पास पहले कही गई बातों से ज्यादा कुछ जोड़ने के लिए नहीं है। यही गोपनीयता इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना रही है।
ट्रंप ने कहा—‘कुछ सामने आ सकता है’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रैटक्लिफ की मॉस्को यात्रा को लेकर उठ रही अटकलों को खारिज करने की कोशिश की, लेकिन साथ ही अपने बयान से रहस्य और बढ़ा दिया। बुधवार को ट्रंप ने रूढ़िवादी रेडियो होस्ट ग्लेन बेक से बातचीत में इस यात्रा को “सेमी-रूटीन” यानी अर्ध-नियमित संपर्क बताया। उन्होंने कहा कि वह लोगों को निराश नहीं करना चाहते, लेकिन यात्रा को लेकर चल रही कई अफवाहें सही नहीं हैं। इसके बावजूद ट्रंप ने यह भी कहा कि “कुछ सामने आ सकता है” और अमेरिका चाहता है कि यूक्रेन में चल रहा युद्ध खत्म हो। ट्रंप ने अमेरिका-रूस संबंधों की मौजूदा गहरी खाई का जिक्र करते हुए यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया में इस तरह के संपर्क की भूमिका हो सकती है, लेकिन अभी इसके प्रभाव के बारे में निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
क्या यूक्रेन युद्ध को लेकर कोई संदेश था?
रैटक्लिफ की मॉस्को यात्रा ऐसे समय हुई है जब रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने की अमेरिकी कोशिशें किसी बड़े समझौते तक नहीं पहुंच पाई हैं। अमेरिकी और रूसी अधिकारियों के बीच कुछ स्तरों पर बातचीत जारी रही है, लेकिन युद्ध समाप्त करने की दिशा में निर्णायक सफलता अभी दिखाई नहीं दी है। अमेरिकी अधिकारियों ने यात्रा से पहले यूक्रेन को सूचित किया था कि एक वरिष्ठ अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल मॉस्को जा रहा है और एक वरिष्ठ यूक्रेनी अधिकारी के अनुसार कीव से उस अवधि में रूस के खिलाफ हमले रोकने को कहा गया था, जब तक अमेरिकी अधिकारी मॉस्को में मौजूद रहें। हालांकि इस जानकारी की सार्वजनिक पुष्टि अमेरिकी प्रशासन ने नहीं की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रैटक्लिफ का दौरा रूस को कोई कड़ा संदेश देने से भी जुड़ा हो सकता है। BBC से बातचीत करने वाले रूस मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका संभवतः NATO देशों के खिलाफ रूस की कथित गैर-पारंपरिक गतिविधियों को लेकर मॉस्को को चेतावनी देना चाहता है। पिछले एक साल में NATO के कुछ सदस्य देशों ने रूसी ड्रोन या सैन्य विमानों से जुड़ी घटनाओं को लेकर चिंता जताई है। ऐसे में CIA प्रमुख का अचानक मॉस्को पहुंचना केवल सामान्य खुफिया संपर्क से कहीं अधिक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
CIA प्रमुख का मॉस्को दौरा क्यों असामान्य है?
अमेरिकी खुफिया प्रमुख का बिना सार्वजनिक घोषणा के मॉस्को पहुंचना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देशों के संबंध पिछले कई वर्षों से बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। रूस के यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने के हमले के बाद अमेरिका और रूस के बीच राजनीतिक संबंधों में भारी गिरावट आई और रूस पर व्यापक अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए गए। इसके बावजूद दोनों देशों की खुफिया एजेंसियों के बीच संपर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। पेस्कोव ने भी कहा कि खुफिया एजेंसियों के बीच संपर्क बेहद कठिन दौर में भी जारी रह सकता है और इसे सकारात्मक प्रक्रिया माना जा सकता है।
इससे पहले CIA के तत्कालीन निदेशक विलियम बर्न्स ने नवंबर 2021 में मॉस्को का दौरा किया था। उस समय उन्होंने रूस को यूक्रेन पर हमला नहीं करने की चेतावनी दी थी। कुछ ही सप्ताह बाद रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी थी। यही पिछला उदाहरण रैटक्लिफ की मौजूदा यात्रा को लेकर चिंता और उत्सुकता दोनों बढ़ाता है।
क्या पुतिन को सब पता है?
हालांकि क्रेमलिन ने साफ कहा है कि रैटक्लिफ की पुतिन से मुलाकात नहीं हुई, लेकिन पेस्कोव के बयान का दूसरा हिस्सा भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन को ऐसी गतिविधियों की जानकारी तुरंत दी जाती है। इसका अर्थ यह है कि भले ही अमेरिकी CIA प्रमुख और रूसी राष्ट्रपति आमने-सामने नहीं मिले हों, लेकिन मॉस्को में हुई बातचीत रूस के सर्वोच्च नेतृत्व की जानकारी से बाहर होने की संभावना कम है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि रैटक्लिफ मॉस्को क्यों गए थे और वास्तव में वहां क्या बातचीत हुई। अमेरिका ने आधिकारिक रूप से कोई विस्तृत एजेंडा जारी नहीं किया है और रूस ने भी बातचीत के विषय पर चुप्पी साध रखी है। ट्रंप का “कुछ सामने आ सकता है” वाला बयान इस रहस्य को और गहरा करता है। अगर यह यात्रा केवल सामान्य खुफिया संपर्क थी, तो भी उसका समय और तरीका असामान्य है; और अगर इसके पीछे यूक्रेन युद्ध, NATO सुरक्षा या अमेरिका-रूस संबंधों को लेकर कोई बड़ा संदेश था, तो आने वाले दिनों में उसकी तस्वीर साफ हो सकती है।




