टेक्नोलॉजी/ बिजनेस | ABC NATIONAL NEWS | 27 अगस्त 2026
कभी दुनिया भर में बिटकॉइन की बढ़ती कीमत ने क्रिप्टो कंपनियों को विशाल डेटा सेंटर और हजारों-लाखों शक्तिशाली कंप्यूटर लगाने के लिए प्रेरित किया था। अब वही कंपनियां तेजी से अपना रुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ओर कर रही हैं। वजह साफ है—बिटकॉइन माइनिंग से मिलने वाला आर्थिक लाभ पहले जैसा नहीं रहा, जबकि AI कंपनियों को अपने मॉडल चलाने के लिए भारी कंप्यूटिंग क्षमता और डेटा सेंटर की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जिन कंपनियों ने वर्षों पहले सस्ती बिजली और बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया था, उन्हें अब उसी बुनियादी ढांचे में AI के लिए नया कारोबार नजर आ रहा है।
बिटकॉइन की कमाई घटी, AI ने दिखाया नया रास्ता
बिटकॉइन माइनिंग में बेहद शक्तिशाली कंप्यूटर लगातार काम करते हैं। ये कंप्यूटर बिटकॉइन नेटवर्क पर लेनदेन को सत्यापित करने की प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं और इसके बदले नए बिटकॉइन के रूप में इनाम प्राप्त करते हैं। इसके लिए भारी मात्रा में बिजली और कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है।
पिछले वर्षों में बिटकॉइन की कीमत बढ़ने के साथ माइनिंग कंपनियों ने विशाल डेटा सेंटर बनाए और हजारों शक्तिशाली मशीनों में भारी निवेश किया। लेकिन अक्टूबर 2025 में बिटकॉइन करीब 1.24 लाख डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने के बाद काफी नीचे आया। हाल में इसकी कीमत करीब 80 हजार डॉलर के आसपास पहुंची है और अगस्त में इसमें करीब 30 फीसदी की तेजी भी आई है, लेकिन कई माइनिंग कंपनियों के लिए अब केवल बिटकॉइन की कीमत में सुधार पर्याप्त नहीं माना जा रहा है।
यही वजह है कि कंपनियां अपनी बिजली क्षमता, डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को AI और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग यानी HPC के लिए इस्तेमाल करने लगी हैं।
AI कंपनियों की बढ़ती जरूरत बनी बड़ा अवसर
AI का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और बड़े AI मॉडल चलाने के लिए विशाल संख्या में शक्तिशाली GPU और दूसरे कंप्यूटिंग सिस्टम की जरूरत होती है। AI कंपनियां इसके लिए डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग क्षमता पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं।
यही वह जगह है जहां बिटकॉइन माइनिंग कंपनियों को नया अवसर दिखाई दे रहा है। उनके पास पहले से बड़े डेटा सेंटर, बिजली की उपलब्धता और बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। वर्षों से सस्ती बिजली खोजने और विशाल डेटा सेंटर चलाने का अनुभव भी उनके पास है।
TerraWulf, Ionic Digital, Core Scientific, Iris Energy, Bitdeer, Riot Platforms और Hut 8 जैसी कंपनियां बिटकॉइन माइनिंग से आगे बढ़कर AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रही हैं।
Riot Platforms ने इसी महीने AI कंपनी Anthropic के साथ 9 अरब डॉलर का 20 साल का कंप्यूटिंग समझौता किया है। Bitdeer ने भी Anthropic को कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराने के लिए 16 साल का समझौता किया है। ये सौदे दिखाते हैं कि माइनिंग कंपनियां अब केवल क्रिप्टो बाजार की कीमतों पर निर्भर रहने के बजाय लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट से स्थिर आय हासिल करना चाहती हैं।
कंपनियों की पहचान तक बदल रही है
यह बदलाव सिर्फ कंप्यूटर और डेटा सेंटर के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है। कुछ कंपनियां अपनी वेबसाइट और ब्रांडिंग तक बदल रही हैं।
Applied Blockchain ने अपना नाम बदलकर Applied Digital कर लिया है। वहीं TerraWulf, जो पहले खुद को बिटकॉइन माइनिंग पर केंद्रित इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के रूप में पेश करती थी, अब AI और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दे रही है।
कजाकिस्तान में 2020 में बड़े बिटकॉइन माइनिंग सेंटर के साथ चर्चा में आई Enegix भी अब AI की ओर बढ़ रही है। कंपनी का कहना है कि वह कजाकिस्तान और दूसरे क्षेत्रों में अपनी ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता को धीरे-धीरे AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए इस्तेमाल करने की योजना बना रही है।
लेकिन बदलाव आसान और सस्ता नहीं
बिटकॉइन माइनिंग सेंटर को AI डेटा सेंटर में बदलना सिर्फ कंप्यूटरों का इस्तेमाल बदल देना नहीं है। AI के लिए अलग तरह के GPU, नेटवर्किंग, कूलिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है। इसलिए कई कंपनियों को अपने मौजूदा सिस्टम में भारी निवेश करना पड़ रहा है।
कुछ कंपनियों को इस बदलाव के लिए अपनी बिटकॉइन होल्डिंग तक बेचनी पड़ी है। लेकिन एक बार जब किसी बड़े डेटा सेंटर को AI के लिए तैयार कर दिया जाता है और वहां 10 या 20 साल का अनुबंध हो जाता है, तो वापस बिटकॉइन माइनिंग की ओर लौटना आसान नहीं रहता।
ऊर्जा और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी इंडस्ट्री के विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में कई बड़ी बिटकॉइन माइनिंग कंपनियां अपने माइनिंग हार्डवेयर को कम कर सकती हैं और AI/HPC को प्राथमिकता दे सकती हैं।
बिटकॉइन पूरी तरह खत्म नहीं होगा
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि सभी कंपनियां बिटकॉइन माइनिंग छोड़ रही हैं। Bitdeer जैसी कंपनियां दोनों कारोबार को साथ लेकर चलने की रणनीति अपना रही हैं।
कंपनी का तर्क है कि बिटकॉइन माइनिंग की एक खासियत यह है कि इसे जरूरत के मुताबिक रोका या शुरू किया जा सकता है, जबकि AI कंप्यूटिंग से लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट और अपेक्षाकृत स्थिर आय हासिल की जा सकती है। इसलिए भविष्य में कुछ कंपनियां Bitcoin mining + AI computing का मिश्रित मॉडल अपना सकती हैं।
लेकिन उद्योग में एक बड़ा बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। जिन विशाल डेटा सेंटरों को कभी डिजिटल करेंसी बनाने के लिए तैयार किया गया था, वे अब AI की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं।
बिटकॉइन ने इन कंपनियों को कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का रास्ता दिया था, लेकिन अब AI उसी इंफ्रास्ट्रक्चर को ज्यादा स्थिर और लंबे समय के कारोबार में बदलने का मौका दे रहा है। यह बदलाव सिर्फ क्रिप्टो उद्योग की दिशा बदलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह भी दिखाता है कि AI की कंप्यूटिंग जरूरतें कितनी तेजी से दुनिया के पुराने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपने भीतर समाहित कर रही हैं।




