राष्ट्रीय/ राजनीति/ महाराष्ट्र | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 1 सितंबर 2026
ड्राफ्ट सूची ने बढ़ाई चिंता, 2.07 करोड़ नाम शामिल नहीं
महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची ने राज्य की चुनावी तस्वीर को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। SIR शुरू होने से पहले महाराष्ट्र की मतदाता सूची में 9,78,54,049 मतदाता दर्ज थे, लेकिन ड्राफ्ट सूची में इनमें से 7,71,65,562 मतदाताओं यानी 78.86 प्रतिशत के नाम ही शामिल किए गए हैं। इसके विपरीत 2,06,88,487 मतदाता यानी करीब 21.14 प्रतिशत इस चरण में ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हो पाए। हालांकि, इस आंकड़े को लेकर सबसे जरूरी तथ्य यह है कि चुनाव आयोग ने साफ किया है कि ड्राफ्ट से बाहर हुए इन 2.07 करोड़ नामों को अंतिम रूप से मतदाता सूची से हटाया हुआ नहीं माना जा सकता। अभी दावे और आपत्तियों की पूरी प्रक्रिया बाकी है और पात्र मतदाताओं को अपने नाम दोबारा शामिल कराने का अवसर दिया गया है।
पुणे, ठाणे और मुंबई उपनगर में सबसे ज्यादा नाम बाहर
ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए मतदाताओं की संख्या का सबसे बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र के प्रमुख शहरी जिलों में दिखाई देता है। पुणे में 28,66,481, ठाणे में 28,59,377 और मुंबई उपनगर में 26,58,202 मतदाताओं के नाम इस चरण में ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हुए हैं। इन तीनों जिलों को मिलाकर 83,84,060 मतदाता ऐसे हैं जिनके नाम ड्राफ्ट में नहीं आए। यह संख्या पूरे महाराष्ट्र में ड्राफ्ट से बाहर हुए कुल 2,06,88,487 मतदाताओं की लगभग 40.5 प्रतिशत है। इसके बाद नागपुर में 14,43,267, नासिक में 10,27,792, मुंबई शहर में 9,50,720, पालघर में 6,68,709, औरंगाबाद में 6,07,660 और रायगढ़ में 5,84,118 मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए हैं।
76.80 लाख स्थायी रूप से शिफ्ट, 75.52 लाख ‘Absent/Not Found’
चुनाव मशीनरी ने ड्राफ्ट में शामिल नहीं हुए 2.06 करोड़ से अधिक मतदाताओं को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है। इनमें 75.52 लाख मतदाता ‘Absent/Not Found’, जबकि 76.80 लाख ‘Permanently Shifted’ श्रेणी में रखे गए हैं। इसके अलावा 34.81 लाख को मृत, 17.63 लाख को दूसरी जगह पहले से पंजीकृत या डुप्लीकेट और 2.23 लाख को ‘Others’ श्रेणी में रखा गया है। ‘Absent/Not Found’ का अर्थ यह है कि सत्यापन के दौरान संबंधित मतदाता के बारे में अधिकारी यह स्थापित नहीं कर पाए कि वह वर्तमान पते पर मौजूद है या नहीं। वहीं ‘Permanently Shifted’ श्रेणी में ऐसे मतदाता शामिल हैं जिनके बारे में अधिकारियों को जानकारी मिली कि वे अपने पंजीकृत पते से स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए हैं। फिर भी इन श्रेणियों में शामिल किया जाना अपने-आप में अंतिम रूप से मतदाता अधिकार समाप्त होने का प्रमाण नहीं है।
चुनाव आयोग की अहम सफाई—2.07 करोड़ अंतिम कटौती नहीं
महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोक्कलिंगम ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए 2,06,88,487 मतदाताओं की संख्या को अंतिम रूप से हटाए जाने वाले मतदाताओं की संख्या नहीं माना जाना चाहिए। ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद अब एक महीने तक दावे और आपत्तियां दाखिल करने का अवसर दिया गया है। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम शामिल कराने का दावा कर सकता है। अधिकारियों के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में रखे गए आंकड़ों में दावे, आपत्तियों और सत्यापन के बाद बदलाव संभव है। इसलिए मौजूदा आंकड़ा SIR की प्रक्रिया के इस चरण की स्थिति बताता है, अंतिम मतदाता सूची की तस्वीर नहीं।
डुप्लीकेट नाम का मतलब वोटर अधिकार खत्म होना नहीं
ड्राफ्ट में शामिल नहीं किए गए मतदाताओं में 17.63 लाख ऐसे हैं जिन्हें ‘Already Enrolled Elsewhere/Duplicate’ श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि संबंधित व्यक्ति का मतदाता पंजीकरण पूरी तरह समाप्त हो गया है। यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरी जगह वैध रूप से मतदाता के रूप में पंजीकृत है, तो एक स्थान की डुप्लीकेट प्रविष्टि हटाए जाने के बावजूद उसका वैध पंजीकरण दूसरी जगह कायम रह सकता है। इसी तरह ‘Dead’ श्रेणी में दर्ज मामलों में भी चुनावी रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसीलिए ड्राफ्ट सूची में किसी नाम के नहीं होने को अंतिम निष्कासन मानने के बजाय इसे पुनरीक्षण प्रक्रिया का हिस्सा समझना जरूरी है।
ऑनलाइन नाम खोजने में मतदाताओं को हुई परेशानी
ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद मतदाताओं के सामने एक दूसरी समस्या भी आई। शुरुआती तौर पर उपलब्ध कराई गई मतदाता सूची की PDF फाइलों में तस्वीरें नहीं थीं और मतदाता अपने EPIC यानी वोटर आईडी नंबर के जरिए सीधे नाम खोज नहीं पा रहे थे। उन्हें संबंधित क्षेत्र की PDF डाउनलोड करके उसमें मैन्युअली अपना नाम तलाशना पड़ रहा था। इसके साथ ही कई मतदाताओं ने पुराने चुनावी रिकॉर्ड और SIR ड्राफ्ट के बीच पोलिंग स्टेशन के पार्ट नंबर में बदलाव को लेकर भी भ्रम की शिकायत की। कई लोगों को यह आशंका हुई कि पार्ट नंबर बदलने का अर्थ उनका नाम सूची से हट जाना है, जबकि प्रशासनिक पुनर्गठन और मतदान केंद्रों के बदलाव के कारण भी ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है।
नाम खोजने की सुविधा जल्द उपलब्ध कराने का दावा
मतदाताओं की शिकायतों के बाद महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि ऑनलाइन नाम खोजने की सुविधा अभी विकसित की जा रही है और इसे मंगलवार शाम या बुधवार तक उपलब्ध कराने की बात कही गई है। चुनाव अधिकारियों ने यह भी बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची को जिला प्रशासन की वेबसाइटों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा चुनाव आयोग के Voter Service Portal, महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट और संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइटों पर भी ड्राफ्ट सूची उपलब्ध कराई गई है। इससे मतदाताओं को अपने नाम की स्थिति जांचने और जरूरत पड़ने पर दावे की प्रक्रिया शुरू करने का अवसर मिलेगा।
31 अगस्त से 30 सितंबर तक दावे और आपत्तियां
SIR ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद अब 31 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया चलेगी। जिन पात्र मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट में नहीं हैं, वे Form 6 के माध्यम से निर्धारित घोषणा और आवश्यक प्रक्रिया के साथ अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। किसी मतदाता को किसी नाम के शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज करानी हो तो Form 7 का इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि मतदाता सूची में नाम, पता, उम्र या लिंग जैसी जानकारी में सुधार के लिए Form 8 का प्रावधान है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य ड्राफ्ट और अंतिम मतदाता सूची के बीच मौजूद विसंगतियों को दूर करना है।
नए मतदाताओं को भी आवेदन का मौका
SIR की प्रक्रिया केवल मौजूदा मतदाताओं के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। ऐसे नागरिक जो पात्रता पूरी कर चुके हैं और 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं, वे भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसका अर्थ है कि दावे और आपत्तियों की अवधि उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो पहली बार मतदाता बनने के योग्य हो रहे हैं। चुनावी प्रक्रिया में पात्र नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए Form 6 के माध्यम से आवेदन का रास्ता खुला रखा गया है।
288 विधानसभा क्षेत्रों में चलेगी जांच की प्रक्रिया
दावे, आपत्तियों और संबंधित नोटिस की जांच के लिए महाराष्ट्र के 288 विधानसभा क्षेत्रों में Electoral Registration Officers काम करेंगे। इनके साथ 7,000 से अधिक Assistant Electoral Registration Officers भी प्रक्रिया में शामिल होंगे। चुनावी रिकॉर्ड में जिन मतदाताओं के नाम नहीं हैं या जिनके रिकॉर्ड को लेकर आपत्ति है, उनके मामलों की जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया 29 अक्टूबर 2026 तक चलने वाली है। यानी 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट सूची अंतिम पड़ाव नहीं है, बल्कि इसके बाद लगभग दो महीने तक सत्यापन और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया जारी रहेगी।
अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को आने की तैयारी
महाराष्ट्र की SIR प्रक्रिया में अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 4 नवंबर 2026 को निर्धारित किया गया है, जब अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है। तब यह स्पष्ट होगा कि ड्राफ्ट में शामिल नहीं किए गए 2.07 करोड़ नामों में से कितने नाम दावे और सत्यापन के बाद वापस शामिल किए गए, कितने रिकॉर्ड दूसरी जगह स्थानांतरित किए गए और कितने नाम वास्तव में अपात्र पाए गए। इसलिए फिलहाल 2.07 करोड़ की संख्या को अंतिम मतदाता कटौती के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
मतदान केंद्रों की संख्या भी बदली
SIR के दौरान केवल मतदाता सूची ही नहीं, बल्कि मतदान केंद्रों का भी कुछ पुनर्गठन किया गया है। महाराष्ट्र में मतदान केंद्रों की संख्या 1,00,253 से घटकर 1,00,216 हो गई है। इस प्रक्रिया में 394 नए मतदान केंद्र जोड़े गए, जबकि 431 मतदान केंद्र हटाए गए। इसके अलावा 1,403 मतदान केंद्रों के स्थान में बदलाव किया गया। मुंबई शहर, मुंबई उपनगर, ठाणे और पालघर में कुछ मतदान केंद्र पहले अस्थायी परिसरों में संचालित हो रहे थे, जिन्हें उसी मतदान क्षेत्र के भीतर स्थायी परिसरों में स्थानांतरित किया गया है।
SIR की असली तस्वीर अंतिम सूची में सामने आएगी
महाराष्ट्र में सामने आया 2.07 करोड़ का आंकड़ा निश्चित रूप से बड़ा है, लेकिन इसकी सही व्याख्या करना उतना ही जरूरी है। यह संख्या उन मतदाताओं की है जिनके Enumeration Forms इस चरण में एकत्र नहीं हो सके और इसलिए उनके नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए। चुनाव आयोग के मुताबिक इनमें से पात्र मतदाताओं को दावे के जरिए अपना नाम वापस शामिल कराने का अवसर है। लिहाजा अभी इसे ‘2.07 करोड़ वोटरों के नाम काट दिए गए’ कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। SIR की वास्तविक अंतिम तस्वीर 4 नवंबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची से सामने आएगी।




