एबीसी न्यूज 8 जनवरी 2026
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर तीखा हमला बोला है। तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में दावा किया कि 1 जनवरी 2026 को नए साल के अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास, 1 अणे मार्ग पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें राज्य के विभिन्न हिस्सों से कलाकार, जनता दल (यूनाइटेड) के मंत्री, स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके पुत्र निशांत कुमार मौजूद थे।
तेजस्वी यादव के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान सभी लोग गीत-संगीत और नाट्य कला का आनंद ले रहे थे, तभी दो मगही कलाकारों ने मंच से पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल पर टिप्पणी कर दी। तेजस्वी ने लिखा कि कलाकारों ने लालू प्रसाद यादव के शासनकाल पर व्यंग्य करते हुए ऐसा बयान दिया, जिसके बाद वहां मौजूद जदयू के कई मंत्री—ललन सिंह, अशोक चौधरी, विजय चौधरी, श्रवण कुमार और लेसी सिंह—ठहाके लगाने लगे।
तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में दावा किया कि कलाकारों ने लालू प्रसाद यादव के कार्यों पर मज़ाक उड़ाते हुए एक मगही पंक्ति कही—“लालू त नान्ह जातियन के माथा पर चढ़ा देल्के हा।” उन्होंने इसका अर्थ समझाते हुए लिखा कि इसका मतलब यह निकाला गया कि लालू प्रसाद यादव ने पिछड़ी और छोटी जातियों को ज़्यादा सम्मान और आगे बढ़ने का मौका दिया, और इसी वजह से उन्हें ‘हराना ज़रूरी’ बताया गया।
तेजस्वी यादव ने आगे लिखा कि जब इस टिप्पणी पर महफ़िल में ठहाके गूंजे, तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अचानक गंभीर हो गए। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव भले ही सत्ता से दूर हों या 1 अणे मार्ग की गलियों से अलग कर दिए गए हों, लेकिन उनकी “धमक” को कभी कम नहीं किया जा सकता।
अपने पोस्ट में तेजस्वी यादव ने सामाजिक प्रतीकों का इस्तेमाल करते हुए लिखा कि जब एक जूता सिलने वाला चमार, दूध बेचने वाला यादव, खेतों में सब्ज़ी उगाने वाला कोइरी और मैला ढोने वाला डोम सिर उठाकर आगे बढ़ता है, तब लालू प्रसाद यादव उसी संघर्ष और बदलाव के प्रतीक के रूप में दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि लालू की राजनीतिक विरासत और सामाजिक न्याय की खुशबू आज भी बिहार को “गुलज़ार” कर रही है।
तेजस्वी यादव का यह बयान सामने आते ही बिहार की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। जदयू और राजद के बीच पहले से चल रही सियासी तनातनी के बीच यह पोस्ट सामाजिक न्याय, जातिगत सम्मान और सत्ता की राजनीति को लेकर एक बार फिर केंद्र में आ गई है।




