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लंदन में जुटे यूरोप के बड़े नेता, यूक्रेन युद्ध पर नई रणनीति की तैयारी

अंतरराष्ट्रीय/ यूरोप | ABC NATIONAL NEWS | लंदन | 8 जून 2026

यूक्रेन युद्ध के लगातार पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुके संघर्ष के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की रविवार को ब्रिटेन पहुंचे, जहां उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। लंदन स्थित डाउनिंग स्ट्रीट में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य यूक्रेन की सुरक्षा, यूरोप की सामूहिक रक्षा व्यवस्था और रूस के खिलाफ आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श करना है।

ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी को यूरोप में यूक्रेन के सबसे मजबूत समर्थकों में गिना जाता है। ये तीनों देश तथाकथित “ई-3 समूह” का हिस्सा हैं और लंबे समय से यूक्रेन को सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक सहायता प्रदान कर रहे हैं। बैठक ऐसे समय हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ध्यान पश्चिम एशिया में ईरान संकट की ओर अधिक केंद्रित हो गया है और यूक्रेन युद्ध अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में अपेक्षाकृत पीछे चला गया है।

लंदन पहुंचने के बाद ज़ेलेंस्की ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि बैठक का मुख्य फोकस युद्ध के दौरान यूक्रेन की रक्षा क्षमता को और मजबूत बनाना, यूरोप की वायु रक्षा प्रणाली में सहयोग बढ़ाना तथा भविष्य की कूटनीतिक संभावनाओं पर साझा दृष्टिकोण विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि यूरोप को किसी भी संभावित शांति वार्ता का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए और महाद्वीप की सुरक्षा को लेकर एक मजबूत तथा एकजुट रुख अपनाना आवश्यक है।

इस बीच यूक्रेन ने रूस पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए हैं। ज़ेलेंस्की ने दावा किया कि रूसी ड्रोन ने चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र के निकट इस्तेमाल किए गए परमाणु ईंधन के भंडारण केंद्र को निशाना बनाया। यूक्रेन की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी एनरगोआटम के अनुसार हमले में भंडारण सुविधा को आंशिक नुकसान पहुंचा, हालांकि किसी प्रकार का रेडिएशन रिसाव नहीं हुआ और आग पर तुरंत काबू पा लिया गया। यूक्रेनी नेतृत्व ने इस घटना को परमाणु सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताते हुए रूस की कड़ी आलोचना की है।

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चेर्नोबिल वही स्थान है जहां 1986 में दुनिया की सबसे बड़ी असैन्य परमाणु दुर्घटना हुई थी। उस दुर्घटना के प्रभाव पूरे यूरोप में महसूस किए गए थे। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र के निकट हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। ज़ेलेंस्की ने इसे “घृणित हमला” बताते हुए कहा कि रूस जानबूझकर महत्वपूर्ण परमाणु बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहा है।

दूसरी ओर रूस और यूक्रेन के बीच सैन्य संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है। हाल ही में यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर सेंट पीटर्सबर्ग और उसके आसपास के क्षेत्रों को निशाना बनाया। रूसी अधिकारियों ने इसे अब तक का “अभूतपूर्व हमला” बताया। बताया जा रहा है कि यूक्रेनी ड्रोन लगभग एक हजार किलोमीटर की दूरी तय कर रूसी क्षेत्र तक पहुंचे। इससे पहले भी यूक्रेन ने रूस के भीतर कई ऊर्जा और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।

युद्ध समाप्त करने के प्रयासों को भी बड़ा झटका लगा है। कुछ दिन पहले ज़ेलेंस्की ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को आमने-सामने बातचीत का प्रस्ताव दिया था और युद्ध समाप्त करने के लिए प्रत्यक्ष वार्ता की अपील की थी। हालांकि पुतिन ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि उनसे मिलने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने दोहराया कि रूस तब तक युद्ध समाप्त नहीं करेगा जब तक उसके सभी रणनीतिक लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। रूस लगातार यूक्रेन से अपने कब्जे वाले क्षेत्रों को छोड़ने और नाटो में शामिल होने की महत्वाकांक्षा त्यागने की मांग करता रहा है, जबकि कीव ने इन शर्तों को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि लंदन में हो रही यह बैठक यूक्रेन युद्ध के अगले चरण की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यूरोपीय देशों को आशंका है कि यदि अमेरिका का ध्यान पश्चिम एशिया की ओर अधिक केंद्रित रहा तो यूक्रेन को मिलने वाला अंतरराष्ट्रीय समर्थन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी यूक्रेन को दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी देने और यूरोपीय स्तर पर अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की रणनीति तैयार कर रहे हैं।

हालात यह संकेत दे रहे हैं कि युद्ध जल्द समाप्त होने वाला नहीं है। रूस और यूक्रेन दोनों अपनी सैन्य क्षमताओं का विस्तार कर रहे हैं और कूटनीतिक प्रयासों में भी कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में लंदन की यह बैठक यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था और यूक्रेन के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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