स्वास्थ्य / अंतरराष्ट्रीय / वैश्विक संकट | ABC NATIONAL NEWS | जिनेवा/कांगो | 19 मई 2026
दुनिया अभी कोविड-19 महामारी के प्रभावों से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई है कि अब वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक नई और गंभीर चेतावनी जारी कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इबोला, हंटावायरस, एमपॉक्स और अन्य संक्रामक बीमारियों के प्रकोप अब पहले से अधिक तेजी से फैल रहे हैं और उनका असर भी ज्यादा विनाशकारी होता जा रहा है। इसी बीच अफ्रीकी देशों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में इबोला संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
ग्लोबल प्रिपेयर्डनेस मॉनिटरिंग बोर्ड (GPMB) की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया संक्रामक रोगों के बढ़ते खतरों के मुकाबले पहले की तुलना में कम तैयार और कम सुरक्षित होती जा रही है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि महामारी का खतरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य तैयारियों और निवेश की गति उससे काफी पीछे है। विशेषज्ञों ने साफ कहा कि “दुनिया अभी भी किसी बड़ी महामारी से निपटने के लिए सार्थक रूप से सुरक्षित नहीं हुई है।”
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, तेजी से शहरीकरण, जंगलों की कटाई, वन्यजीवों और इंसानों के बीच बढ़ता संपर्क तथा वैश्विक यात्रा नेटवर्क संक्रामक बीमारियों के फैलाव को और खतरनाक बना रहे हैं। इबोला और हंटावायरस जैसी बीमारियां पहले सीमित क्षेत्रों तक ही मानी जाती थीं, लेकिन अब इनके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने की आशंका लगातार बढ़ रही है।
अफ्रीका में इबोला संक्रमण को रोकने के लिए स्वास्थ्य टीमें लगातार काम कर रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और स्थानीय एजेंसियां संक्रमित इलाकों में निगरानी, आइसोलेशन और वैक्सीनेशन अभियान चला रही हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर स्वास्थ्य ढांचे वाले देशों में महामारी नियंत्रण बेहद कठिन होता जा रहा है। कई क्षेत्रों में दवाइयों, अस्पतालों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी भी चिंता बढ़ा रही है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कोविड महामारी के बाद दुनिया ने कुछ समय तक स्वास्थ्य सुरक्षा पर ध्यान दिया, लेकिन धीरे-धीरे कई देशों ने निवेश और तैयारियों की गति कम कर दी। इससे भविष्य में किसी नए वायरस या संक्रमण के फैलने पर हालात फिर से गंभीर हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी केवल स्वास्थ्य संकट नहीं बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता भी पैदा करती है।
हंटावायरस को लेकर भी वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ रही है। यह वायरस आमतौर पर संक्रमित चूहों और कृंतकों के संपर्क से फैलता है और कई मामलों में जानलेवा साबित हो सकता है। हाल के वर्षों में अलग-अलग देशों में इसके मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बदलता पर्यावरण और मानव गतिविधियां ऐसे संक्रमणों के जोखिम को और बढ़ा रही हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दुनिया भर की सरकारों से महामारी तैयारियों को राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा मानने की अपील की है। उनका कहना है कि केवल संकट आने के बाद प्रतिक्रिया देना पर्याप्त नहीं होगा। अस्पताल नेटवर्क, वैक्सीन अनुसंधान, निगरानी तंत्र और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना अब अनिवार्य हो चुका है।
विश्लेषकों का मानना है कि कोविड-19 के बाद दुनिया को जो सबक सीखना चाहिए था, वह अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। यदि वैश्विक स्वास्थ्य ढांचे में निवेश और समन्वय नहीं बढ़ाया गया, तो भविष्य में इबोला, हंटावायरस या किसी नए संक्रमण का प्रकोप दुनिया को फिर बड़े संकट में डाल सकता है। सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या दुनिया अगली महामारी के लिए सच में तैयार है, या फिर इतिहास खुद को दोहराने की ओर बढ़ रहा है?




