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ट्रंप-शी जिनपिंग शिखर वार्ता पर ईरान युद्ध का साया, टैरिफ और रेयर अर्थ मुद्दे पीछे छूटने के आसार

अंतरराष्ट्रीय / व्यापार | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग/वॉशिंगटन | 10 मई 2026

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच होने वाली बहुप्रतीक्षित शिखर वार्ता पर इस बार व्यापार नहीं, बल्कि ईरान युद्ध का साया छाया हुआ है। 14 और 15 मई को बीजिंग में होने वाली इस अहम बैठक में दोनों देशों के बीच टैरिफ, रेयर अर्थ सप्लाई और टेक्नोलॉजी विवाद जैसे बड़े आर्थिक मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद थी, लेकिन अब माना जा रहा है कि ईरान संकट पूरी वार्ता का केंद्र बन सकता है।

CNBC की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent पहले ही साफ कर चुके हैं कि ईरान युद्ध इस बैठक का प्रमुख विषय रहेगा। हाल ही में चीन ने ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi की मेजबानी भी की थी, जिसके बाद यह संकेत मिले कि बीजिंग युद्धविराम और होर्मुज संकट को शांत कराने में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चीन और अमेरिका मिलकर ईरान संकट कम करने में सफल होते हैं, तो यह वैश्विक व्यापार और तेल बाजार के लिए बड़ी राहत होगी। चीन की सरकारी थिंक टैंक Chinese Academy of Social Sciences के विशेषज्ञ Hai Zhao ने कहा कि अगर युद्ध थमता है तो यह ट्रंप-शी वार्ता की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।

हालांकि हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट में फिर गोलीबारी हुई है और दोनों देश एक-दूसरे पर संघर्ष शुरू करने का आरोप लगा रहे हैं। इसी बीच एक चीनी स्वामित्व वाले तेल टैंकर पर हमले की खबर ने बीजिंग की चिंता और बढ़ा दी है।

रिपोर्ट के अनुसार इस बार ट्रंप के साथ चीन जाने वाले अमेरिकी उद्योगपतियों का प्रतिनिधिमंडल भी छोटा हो सकता है। बताया जा रहा है कि व्हाइट हाउस ने अभी तक अमेरिकी कंपनियों के प्रमुखों को औपचारिक निमंत्रण नहीं भेजा है। जबकि 2017 में ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान करीब 30 बड़े अमेरिकी CEO साथ गए थे और 250 अरब डॉलर से ज्यादा के व्यापारिक समझौते हुए थे।

फिलहाल Boeing के CEO Kelly Ortberg और Citigroup की CEO Jane Fraser के इस दौरे में शामिल होने की पुष्टि हुई है। अमेरिकी कारोबारी जगत का मानना है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बातचीत जारी रहना बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन इस बैठक में अमेरिका पर टैरिफ कम करने, Taiwan मुद्दे पर नरमी और चीनी टेक कंपनियों पर लगी पाबंदियों में राहत का दबाव बना सकता है। वहीं अमेरिका रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई और व्यापारिक संतुलन पर जोर देगा।

दरअसल, चीन दुनिया में रेयर अर्थ मिनरल्स का सबसे बड़ा सप्लायर है और हाल के महीनों में उसने इनके निर्यात पर सख्त नियंत्रण बढ़ा दिया है। इसका असर पूरी दुनिया की टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री पर पड़ रहा है।

अमेरिकी विश्लेषकों का मानना है कि इस वार्ता में कोई बड़ा व्यापारिक समझौता होने की संभावना कम है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और वैश्विक बाजारों को स्थिर संदेश देने की कोशिश जरूर होगी।

Center for Strategic and International Studies के विशेषज्ञ Scott Kennedy का कहना है कि “यह बैठक संभवतः चीन की उस रणनीतिक बढ़त को और मजबूत करेगी, जो उसने पिछले एक साल में हासिल की है।”

दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि क्या ट्रंप और शी जिनपिंग ईरान संकट के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा दे पाएंगे या फिर भू-राजनीतिक तनाव आर्थिक मुद्दों पर भारी पड़ जाएगा।

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