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भीषण गर्मी और युद्ध के साये में हज! सऊदी अरब की सबसे बड़ी चुनौती- सुरक्षित और विवादमुक्त तीर्थ यात्रा

अंतरराष्ट्रीय / धर्म | सूफियान बिन फरहान | ABC NATIONAL NEWS | मक्का / रियाद | 27 मई 2026

सऊदी अरब इस साल हज यात्रा को लेकर दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। एक तरफ रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और दूसरी ओर पश्चिम एशिया में जारी ईरान – अमेरिका – इजरायल तनाव ने दुनिया की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक हज को बेहद संवेदनशील बना दिया है। लाखों मुस्लिम श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए Saudi Arabia ने व्यापक इंतजाम किए हैं और तीर्थयात्रियों को सीधे धूप में निकलने से बचने की चेतावनी जारी की गई है। सऊदी प्रशासन की कोशिश है कि इस बार हज बिना किसी बड़े हादसे और विवाद के संपन्न हो जाए।

मक्का में मंगलवार को तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि बुधवार को इसके 42 डिग्री सेल्सियस तक जाने की संभावना जताई गई है। अत्यधिक गर्मी को देखते हुए अधिकारियों ने श्रद्धालुओं को दोपहर 4 बजे तक अपने कैंपों में रहने की सलाह दी है। National Center for Meteorology ने भी चेतावनी जारी करते हुए खुले इलाकों में जाने से बचने और निर्धारित छायादार स्थानों पर रहने की अपील की है।

इस वर्ष हज यात्रा सोमवार से शुरू हुई और शनिवार तक चलेगी। सऊदी अधिकारियों के अनुसार अब तक विदेशों से 15 लाख से अधिक श्रद्धालु मक्का पहुंच चुके हैं। मंगलवार को प्रसारित हवाई दृश्यों में हजारों श्रद्धालु Mount Arafat पर इकट्ठा दिखाई दिए, जहां इस्लामी मान्यता के अनुसार पैगंबर मोहम्मद ने अपना अंतिम उपदेश दिया था। हज का यह चरण सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

सऊदी अरब इस बार किसी भी कीमत पर 2024 जैसी त्रासदी दोहराना नहीं चाहता। पिछले वर्ष हज के दौरान 52 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान में 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। अधिकांश मौतों के पीछे भीषण गर्मी, बुजुर्ग उम्र और हृदय संबंधी बीमारियां कारण बनी थीं। बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी थे जो बिना आधिकारिक अनुमति के हज में शामिल हुए थे और उचित सुविधाएं नहीं मिलने से उनकी जान चली गई। हालांकि 2025 में मौतों की संख्या कम हुई थी, लेकिन सऊदी प्रशासन पर इस बार और अधिक सतर्क रहने का दबाव है।

इस बार हज ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया युद्ध जैसे हालात से गुजर रहा है। फरवरी में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष का असर पूरे खाड़ी क्षेत्र पर पड़ा है। हालांकि अब तक मक्का और मदीना जैसे पवित्र स्थलों को किसी हमले का निशाना नहीं बनाया गया है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव लगातार चिंता बढ़ा रहा है। हाल ही में सऊदी अरब ने इराक की दिशा से ड्रोन हमले की सूचना दी थी, जबकि अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लेकर ईरान समर्थित गुटों की धमकियां भी बढ़ी हैं।

ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने मंगलवार को बयान देकर कहा कि मध्य पूर्व के देश अब अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए “ढाल” नहीं बनेंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब सऊदी अरब में 2000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जिनमें से कई रियाद के दक्षिण में स्थित Prince Sultan Air Base पर मौजूद हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक इस बार ईरान और इराक से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु हज के लिए सऊदी अरब पहुंचे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि धार्मिक आयोजन को क्षेत्रीय राजनीति और युद्ध के तनाव से पूरी तरह अलग रखा जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल निगरानी, हीट मैनेजमेंट सिस्टम और मेडिकल इमरजेंसी नेटवर्क के जरिए सऊदी अरब इस बार “हाई-टेक हज” आयोजित करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन भीषण गर्मी और युद्ध के साये के बीच यह हज केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सऊदी प्रशासन की क्षमता और क्षेत्रीय स्थिरता की बड़ी परीक्षा बन चुका है।

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