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हज यात्रियों को गर्मी से बचाने के लिए सऊदी अरब का मेगा प्लान! मक्का में हरियाली, शेड और कूलिंग सिस्टम का बड़ा विस्तार

अंतरराष्ट्रीय / धर्म | ABC NATIONAL NEWS | मक्का | 27 मई 2026

भीषण गर्मी और लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच Saudi Arabia ने इस साल हज यात्रा को सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए पवित्र स्थलों पर बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय बदलाव शुरू किए हैं। मक्का और आसपास के हज स्थलों पर हरियाली, शेड, कूलिंग सिस्टम और पैदल मार्गों के विकास को लेकर 25 से अधिक बड़े प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम किया गया है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य तीर्थयात्रियों को झुलसा देने वाली गर्मी से राहत देना और उनके धार्मिक सफर को अधिक सुरक्षित बनाना है।

इन परियोजनाओं को Kidana Development Company लागू कर रही है, जो मक्का सिटी और पवित्र स्थलों के लिए गठित रॉयल कमीशन की कार्यकारी इकाई है। कंपनी ने इस बार पहली बार Jabal Al-Rahmah यानी माउंट अराफात के आसपास विशाल कूलिंग और शेडिंग प्रोजेक्ट शुरू किया है। यह परियोजना लगभग 3.92 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली हुई है। इसके अलावा मीना में पैदल यात्रियों के रास्तों पर दो चरणों में 1.03 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में शेडिंग की व्यवस्था की गई है ताकि श्रद्धालुओं को तपती धूप से राहत मिल सके।

सऊदी अरब की “ग्रीन होली साइट्स” पहल के तहत अब तक 60 हजार से अधिक पेड़ लगाए जा चुके हैं। प्रशासन का दावा है कि इससे खुले क्षेत्रों में तापमान कम करने, वायु गुणवत्ता बेहतर बनाने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी बड़ी संख्या में पेड़ लगाने से मक्का और हज स्थलों के माइक्रो-क्लाइमेट पर सकारात्मक असर पड़ सकता है, खासकर उस समय जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच रहा हो।

तीर्थयात्रियों को राहत देने के लिए अत्याधुनिक कूलिंग सिस्टम भी लगाए गए हैं। प्रशासन ने पांच प्रमुख स्टेशनों पर 6000 से अधिक मिस्टिंग पोल्स लगाए हैं, जिनकी क्षमता प्रति घंटे 1500 क्यूबिक मीटर तक है। इसके अलावा 25 हजार से अधिक पेयजल नल भी स्थापित किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को लगातार ठंडा पानी उपलब्ध कराया जा सके। Jamarat Bridge परिसर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में पुराने मिस्टिंग पोल्स हटाकर 400 आधुनिक मिस्टिंग फैन लगाए गए हैं, जो बड़ी संख्या में लोगों को तेज गर्मी में राहत देने के लिए डिजाइन किए गए हैं।

यह पूरा बदलाव ऐसे समय किया जा रहा है जब पिछले वर्षों में भीषण गर्मी के कारण हज के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौतें हुई थीं। 2024 में तापमान 52 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था और 1300 से अधिक श्रद्धालुओं की जान चली गई थी। इसी अनुभव के बाद सऊदी प्रशासन ने हज प्रबंधन को आधुनिक तकनीक और पर्यावरणीय समाधानों से जोड़ने का फैसला लिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल बुनियादी ढांचे का विस्तार नहीं बल्कि “स्मार्ट हज मैनेजमेंट” की दिशा में बड़ा कदम है। सऊदी अरब अब हज को दुनिया के सबसे सुरक्षित और तकनीकी रूप से उन्नत धार्मिक आयोजनों में बदलने की कोशिश कर रहा है। डिजिटल निगरानी, हीट मैनेजमेंट, मेडिकल इमरजेंसी नेटवर्क और पर्यावरणीय सुधारों को एक साथ जोड़कर श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाया जा रहा है।

मक्का में जारी ये बड़े बदलाव यह भी दिखाते हैं कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी अब धार्मिक आयोजनों के स्वरूप को भी बदल रही है। आने वाले वर्षों में हज प्रबंधन केवल धार्मिक व्यवस्था नहीं बल्कि पर्यावरण, स्वास्थ्य और तकनीक के समन्वय का वैश्विक मॉडल बन सकता है।

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