राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 जुलाई 2026
NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं को लेकर कई सप्ताह से जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य, देश की एकता और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया है।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब CJP और विपक्ष लगातार उन्हें हटाने की मांग कर रहे थे। शुक्रवार को CJP प्रतिनिधियों की केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ बातचीत हुई थी। बैठक के बाद CJP ने दावा किया था कि सरकार ने प्रधान के इस्तीफे पर फैसला लेने के लिए शनिवार तक का समय मांगा है। करीब 24 घंटे बाद प्रधान ने इस्तीफा दे दिया।
इस्तीफे में बोले प्रधान—युवाओं का भविष्य सर्वोपरि
अपने विस्तृत पत्र में प्रधान ने NEET-UG 2026 में सामने आई अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने मामला CBI को सौंपा, परीक्षा रद्द की और दोबारा परीक्षा कराई। उन्होंने दावा किया कि शुरुआत से उन्होंने इस संकट की जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा।
प्रधान ने कहा कि पिछले दस दिनों की घटनाओं से वह बेहद व्यथित हैं और यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। उन्होंने अपने फैसले को छात्रों के भविष्य और देशहित से जोड़ते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों का फायदा “राष्ट्र-विरोधी ताकतें” न उठा सकें और छात्र कानूनी उलझनों के बजाय अपनी पढ़ाई तथा करियर पर ध्यान दे सकें, इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री को इस्तीफा भेजा है।
CJP का जश्न, अभिजीत दीपके बोले—यह छात्र शक्ति की जीत
इस्तीफे की खबर सामने आते ही जंतर-मंतर पर आंदोलनकारियों में जश्न शुरू हो गया। CJP ने इसे अपनी सबसे महत्वपूर्ण मांग पूरी होने के रूप में देखा और संदेश दिया—“छात्र शक्ति जिंदाबाद।”
अभिजीत दीपके ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बात का प्रमाण है कि यदि लोग सरकार के सामने डरें नहीं और झुकें नहीं, तो जवाबदेही तय कराई जा सकती है।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सोनम वांगचुक द्वारा अपना अनशन समाप्त किए जाने के बावजूद CJP ने प्रधान के इस्तीफे की मांग वापस लेने से इनकार कर दिया था। संगठन का कहना था कि इस मुद्दे पर इससे कम कुछ भी स्वीकार नहीं होगा।
वांगचुक का अनशन खत्म, लेकिन CJP नहीं झुकी
पिछले कुछ दिनों में आंदोलन की दिशा को लेकर सबसे बड़ा सवाल सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के बाद पैदा हुआ था। सरकार से मिले आश्वासनों के बाद वांगचुक ने भूख हड़ताल खत्म कर दी थी, लेकिन CJP और अभिजीत दीपके ने साफ कर दिया था कि आंदोलन की केंद्रीय मांग—धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा—अब भी कायम है।
प्रधान के इस्तीफे ने इस बहस को भी नया मोड़ दे दिया है कि आंदोलन का वास्तविक दबाव किस स्तर पर काम कर रहा था। वांगचुक के पीछे हटने के बाद भी आंदोलन कमजोर नहीं पड़ा और अंततः सरकार को उस मांग पर फैसला करना पड़ा जिसे CJP लगातार अपनी ‘रेड लाइन’ बता रही थी।
तीन मांगों में सबसे बड़ी मांग पूरी
CJP ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी थीं—धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, NEET विवाद से जुड़े मृत छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजा और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन।
शुक्रवार की बैठक के बाद CJP ने कहा था कि सरकार ने दो मांगों पर सैद्धांतिक सहमति जताई है, जबकि प्रधान के इस्तीफे पर फैसला लंबित रखा गया है। शनिवार को प्रधान के पद छोड़ने के साथ आंदोलन की सबसे राजनीतिक और कठिन मांग भी पूरी होती दिखाई दी।
इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर बढ़ी सुरक्षा
प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ने की खबर भी सामने आई। अब सरकार की कोशिश आंदोलन स्थल की स्थिति सामान्य करने और प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने की है।
लेकिन बड़ा सवाल यह होगा कि प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP आंदोलन समाप्त करने की घोषणा करती है या बाकी मुद्दों पर लिखित और ठोस सरकारी कार्रवाई होने तक जंतर-मंतर पर बनी रहती है।
सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल एक मंत्री का पद छोड़ना नहीं है। कई सप्ताह तक चले छात्र आंदोलन के बाद केंद्रीय मंत्री का हटना सरकार के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। शुरुआत में विवाद परीक्षा की निष्पक्षता और पेपर लीक तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे मामला प्रशासनिक विफलता से आगे बढ़कर राजनीतिक जवाबदेही के सवाल में बदल गया।
राहुल गांधी और विपक्ष के खुलकर मैदान में आने के बाद इस मुद्दे का राजनीतिक दबाव और बढ़ा। संसद से सड़क तक प्रधान के इस्तीफे की मांग उठी। हालांकि इस्तीफे का पूरा श्रेय किसी एक नेता या संगठन को देना इस लंबे आंदोलन की तस्वीर को छोटा करना होगा। इसके केंद्र में वे छात्र रहे जिन्होंने परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और अपने भविष्य को लेकर लगातार सवाल उठाए।
अब कहानी का अगला अध्याय सरकार के सामने है—पेपर लीक रोकने के लिए प्रस्तावित कठोर कानून, NTA में सुधार और परीक्षा व्यवस्था में ऐसा बदलाव जिससे छात्रों का भरोसा दोबारा कायम हो सके।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आंदोलन की एक बड़ी जीत हो सकता है, लेकिन परीक्षा व्यवस्था की असली परीक्षा अभी बाकी है। एक मंत्री बदलना तत्काल राजनीतिक जवाब हो सकता है; व्यवस्था बदलना ही स्थायी समाधान होगा।




