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बलात्कारियों के रक्षक को मोदी ने बनाया शिक्षा मंत्री: राहुल गांधी

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 28 जुलाई 2026

संसद के मानसून सत्र के दौरान देश की राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था में चल रहे उथल-पुथल के बीच विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। देश भर में नीट (NEET) परीक्षा में हुई कथित धांधली, पेपर लीक और शैक्षणिक अव्यवस्थाओं को लेकर लाखों छात्र सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस राष्ट्रव्यापी आक्रोश के बीच जब सरकार ने नए शिक्षा मंत्री के रूप में प्रह्लाद जोशी के नाम की घोषणा की, तो राजनीतिक गलियारों में एक नया घमासान छिड़ गया। राहुल गांधी ने सरकार के इस फैसले पर बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने शिक्षा जैसा अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण मंत्रालय एक ऐसे व्यक्ति के हाथों में सौंप दिया है, जो अतीत में जघन्य अपराधों और बलात्कार के दोषियों के बचाव में खड़ा रहा है। संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने इस नियुक्ति को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ और देश की नैतिकता पर एक गहरा आघात करार दिया।

राहुल गांधी ने सरकार की मंशा पर सीधे सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश का युवा वर्ग पारदर्शी शिक्षा प्रणाली, निष्पक्ष परीक्षाओं और न्याय की मांग को लेकर दिन-रात आंदोलन कर रहा है, तब सरकार को किसी ऐसे योग्य और संवेदनशील व्यक्ति को जिम्मेदारी देनी चाहिए थी जो लाखों छात्रों के विश्वास को बहाल कर सके। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री ने एक ऐसे नेता को इस पद के लिए चुना जिनकी पृष्ठभूमि और बयान सार्वजनिक रूप से बलात्कारियों को संरक्षण देने वाले रहे हैं।

राहुल गांधी ने सख्त शब्दों में कहा कि जो व्यक्ति अपराधियों और बलात्कार के दोषियों को संरक्षण देने या उनके पक्ष में खड़े होने की सोच रखता है, उससे अधिक घृणित मानसिकता और कुछ नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री के पास अपने विस्तृत मंत्रिमंडल में कई वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं के विकल्प मौजूद थे, लेकिन उन्होंने जानबूझकर एक ऐसे विवादित चेहरे को चुना, जिससे यह स्पष्ट संदेश जाता है कि सरकार को न तो देश की शिक्षा व्यवस्था की गरिमा की चिंता है और न ही आंदोलित छात्रों के भविष्य की।

इस मुद्दे ने संसद के दोनों सदनों में जबरदस्त हंगामा खड़ा कर दिया है, जहाँ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लोकसभा में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी राहुल गांधी के सुर में सुर मिलाते हुए नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर कड़ा ऐतराज जताया और कहा कि यह फैसला उन लाखों महिलाओं और बेटियों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है जो देश में न्याय की आस लगाए बैठी हैं।

प्रियंका गांधी ने कहा कि जब पूरा देश परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा था, तब सरकार का यह कदम जनता और युवाओं की आवाज को दबाने की मानसिकता को दर्शाता है। विपक्षी नेताओं के इन तीखे हमलों के बाद संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार तीखी बहस देखने को मिली, जहाँ केंद्रीय मंत्रियों ने विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इसे केवल राजनीतिक लाभ हासिल करने और मंत्री के चरित्र हनन का प्रयास करार दिया।

दूसरी ओर, सरकार की ओर से इस मामले में सफाई देते हुए कहा गया कि विपक्ष नीट परीक्षा और अन्य मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के असंसदीय और व्यक्तिगत आरोप लगा रहा है। संसदीय कार्य मंत्री और अन्य वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के बयानों का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि नए शिक्षा मंत्री पर लगाए गए सभी आरोप निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। सरकार का तर्क है कि सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं और नए कानूनों के जरिए दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। बहरहाल, शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को लेकर उठा यह विवाद अब केवल संसदीय बहस तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसने देश भर के छात्र संगठनों और नागरिक समाजों के बीच भी एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिससे आने वाले दिनों में सरकार के लिए इस राजनीतिक और सामाजिक दबाव से निपटना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

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