[the_ad id="179"]
Home » International » अमेरिका की नई रणनीति: चीन के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को रोकने के लिए अरबों रुपये की नई तैयारी

अमेरिका की नई रणनीति: चीन के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को रोकने के लिए अरबों रुपये की नई तैयारी

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 29 जुलाई 2026

दुनिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक और सामरिक शक्तियों—अमेरिका और चीन—के बीच प्रतिस्पर्धा अब केवल व्यापार या तकनीक तक सीमित नहीं रही है। यह मुकाबला अब वैश्विक प्रभाव, कूटनीतिक पहुंच और रणनीतिक निवेश के नए मोर्चों पर पहुंच चुका है। इसी रणनीति के तहत ट्रंप प्रशासन चीन के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को चुनौती देने के लिए दुनिया के कई क्षेत्रों में सैकड़ों मिलियन डॉलर के नए निवेश की तैयारी कर रहा है।

अमेरिकी प्रशासन ने कांग्रेस को सूचित किया है कि वह कैरेबियाई और मध्य अमेरिकी देशों में समुद्र के भीतर बिछी पुरानी दूरसंचार केबलों को बदलने के लिए 175.8 मिलियन डॉलर खर्च करना चाहता है। इस परियोजना का उद्देश्य केवल संचार नेटवर्क का आधुनिकीकरण नहीं, बल्कि इन क्षेत्रों के दूरसंचार ढांचे में चीन की बढ़ती पैठ को रोकना भी है। वॉशिंगटन का मानना है कि यदि इन देशों के महत्वपूर्ण डिजिटल और संचार नेटवर्क पर चीन का प्रभाव बढ़ता है, तो इससे अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

पिछले कुछ वर्षों में चीन ने अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के माध्यम से एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के अनेक देशों में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। सड़क, रेल, बंदरगाह, ऊर्जा और दूरसंचार जैसी आधारभूत परियोजनाओं में उसकी बढ़ती भागीदारी ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है। विशेष रूप से पनामा नहर के आसपास चीनी कंपनियों की सक्रियता और लैटिन अमेरिका में बढ़ता निवेश वॉशिंगटन के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक चुनौती बनकर उभरा है।

अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पश्चिमी गोलार्ध में चीन की आर्थिक गतिविधियां अमेरिका की सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए दीर्घकालिक जोखिम पैदा कर सकती हैं। अधिकारी का कहना है कि चीन की परियोजनाएं शुरुआत में कम लागत वाली दिखाई देती हैं, लेकिन समय के साथ अतिरिक्त खर्च, रखरखाव शुल्क और तकनीकी समस्याओं के कारण वे संबंधित देशों के लिए कहीं अधिक महंगी साबित होती हैं।

सूत्रों के मुताबिक, यह केवल एक परियोजना तक सीमित नहीं है। अमेरिकी विदेश विभाग पश्चिमी गोलार्ध, अफ्रीका और एशिया में चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए करीब आधा अरब डॉलर के अतिरिक्त कार्यक्रमों पर भी विचार कर रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य उन देशों में अमेरिका की कूटनीतिक मौजूदगी और रणनीतिक साझेदारी को फिर से मजबूत करना है, जहां हाल के वर्षों में चीन ने तेजी से अपना प्रभाव बढ़ाया है।

विदेश विभाग के एक आंतरिक दस्तावेज में कहा गया है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) की बढ़ती आर्थिक, तकनीकी और कूटनीतिक पहुंच अमेरिका के राष्ट्रीय हितों के लिए चुनौती बनती जा रही है। दस्तावेज के अनुसार, बदलते वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका को अपने सहयोगी देशों के साथ निवेश और विकास साझेदारी को नए स्तर पर ले जाना होगा।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सार्वजनिक रूप से सहयोग और संवाद का संदेश दे रहे हैं। शी जिनपिंग के इस वर्ष अमेरिका दौरे की भी तैयारी चल रही है। हालांकि कूटनीतिक संवाद के बावजूद दोनों देशों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती दिखाई दे रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका अब केवल सैन्य शक्ति के भरोसे चीन का मुकाबला नहीं करना चाहता। वह निवेश, आधारभूत ढांचे के विकास, डिजिटल कनेक्टिविटी, तकनीकी सहयोग और आर्थिक साझेदारी के जरिए उन देशों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है, जहां चीन पहले ही मजबूत पकड़ बना चुका है।

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष एलन मस्क के नेतृत्व वाले डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) द्वारा सरकारी खर्चों में व्यापक कटौती के कारण अमेरिका ने कई अंतरराष्ट्रीय विकास कार्यक्रमों को रोक दिया था। इसी दौरान अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसी USAID की कई गतिविधियां सीमित कर दी गईं और विदेशों में अनेक राजनयिक पद भी समाप्त कर दिए गए। इन फैसलों का असर चीन के प्रभाव का मुकाबला करने वाली कई परियोजनाओं पर पड़ा था।

अब ट्रंप प्रशासन उन्हीं पहलों को नए सिरे से शुरू कर अमेरिका की वैश्विक भूमिका को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। संकेत स्पष्ट हैं कि आने वाले वर्षों में अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा केवल व्यापारिक मोर्चे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि डिजिटल नेटवर्क, वैश्विक निवेश, रणनीतिक अवसंरचना और कूटनीतिक प्रभाव के हर क्षेत्र में दोनों महाशक्तियां आमने-सामने दिखाई देंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *