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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तुरंत बाद एक्शन, जंतर-मंतर खाली कराने पहुंची पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स

राष्ट्रीय | अवधेश झा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 जुलाई 2026

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ ही समय बाद दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद मार्ग इलाके में घटनाक्रम तेजी से बदल गया। कई सप्ताह से NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन की सबसे बड़ी राजनीतिक मांग पूरी होने के बाद प्रशासन ने प्रदर्शन स्थलों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी। नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा पुलिस और अर्धसैनिक बलों के साथ संसद मार्ग स्थित प्रदर्शन स्थल पहुंचे। प्रधान के इस्तीफे की खबर फैलते ही जंतर-मंतर से बड़ी संख्या में लोगों को बाहर निकलते देखा गया। इस घटनाक्रम ने संकेत दिया कि सरकार अब आंदोलन के राजनीतिक समाधान के साथ-साथ राजधानी में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया। पिछले कई सप्ताह से CJP, छात्र संगठनों और विपक्ष की सबसे प्रमुख मांग यही थी कि NEET-UG पेपर लीक और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सामने आई गंभीर अनियमितताओं की राजनीतिक जवाबदेही तय हो और शिक्षा मंत्री पद छोड़ें। शुक्रवार को CJP प्रतिनिधियों की केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ करीब दो घंटे तक बातचीत हुई थी। बैठक के बाद CJP ने दावा किया था कि सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर विचार करने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है। इसके करीब 24 घंटे के भीतर प्रधान का इस्तीफा सामने आ गया।

इस्तीफे के साथ ही बदली जंतर-मंतर की तस्वीर

प्रधान के इस्तीफे के तुरंत बाद जंतर-मंतर पर पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स की गतिविधियां बढ़ गईं। The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र ने दिल्ली में प्रदर्शन स्थलों को खाली कराने के लिए सुरक्षा बलों को आगे बढ़ाया और नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा भी पैरामिलिट्री फोर्स के साथ संसद मार्ग पहुंचे। उसी दौरान प्रदर्शन स्थल से लोगों को बाहर निकलते देखा गया। लंबे समय से आंदोलन के कारण जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था बनी हुई थी। अब आंदोलन की केंद्रीय मांग पूरी होने के बाद प्रशासन के सामने पहला लक्ष्य इस इलाके में सामान्य आवाजाही और कानून-व्यवस्था बहाल करना दिखाई दे रहा है।

यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले दिनों जंतर-मंतर का आंदोलन केवल एक परीक्षा विवाद तक सीमित नहीं रहा था। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुए टकराव के बाद मामला और गंभीर हो गया था। आंदोलनकारियों ने पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगाए, जबकि पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का हवाला दिया गया। इसके बाद जंतर-मंतर और संसद के आसपास सुरक्षा लगातार कड़ी होती चली गई। अब प्रधान के इस्तीफे के साथ सरकार के पास यह तर्क है कि आंदोलन की सबसे बड़ी मांग पूरी हो चुकी है और प्रदर्शन स्थल खाली करके राजधानी की स्थिति सामान्य की जानी चाहिए।

CJP ने कहा—‘कॉकरोच जीते, लोकतंत्र जीता’

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने इसे छात्र शक्ति और लोकतांत्रिक आंदोलन की बड़ी जीत के रूप में पेश किया। संगठन की प्रतिक्रिया थी—“कॉकरोच जीते, लोकतंत्र जीता।” अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाले CJP ने आंदोलन के दौरान बार-बार कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ स्वीकार नहीं किया जाएगा। सोनम वांगचुक द्वारा अपना अनशन समाप्त किए जाने के बाद भी संगठन ने अपना रुख नहीं बदला था। यही कारण है कि प्रधान का इस्तीफा CJP के लिए केवल प्रतीकात्मक उपलब्धि नहीं बल्कि उस मांग की स्वीकार्यता के रूप में देखा जा रहा है जिस पर संगठन लगातार सरकार से टकराव की स्थिति में था।

इस आंदोलन में एक समय ऐसा भी आया जब यह सवाल उठने लगा था कि सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के बाद आंदोलन कमजोर पड़ेगा या नहीं। लेकिन CJP ने स्पष्ट कर दिया था कि वांगचुक का व्यक्तिगत फैसला आंदोलन की मुख्य मांग को समाप्त नहीं करता। संगठन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कायम रहा और सरकार से बातचीत में भी इसी मांग को निर्णायक मुद्दा बनाए रखा। शनिवार को प्रधान के इस्तीफे ने फिलहाल इस मुद्दे पर CJP की रणनीति को बड़ी राजनीतिक सफलता दिलाई है।

प्रधान ने इस्तीफे में छात्रों और ‘राष्ट्र-विरोधी ताकतों’ का किया जिक्र

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में कहा कि वह छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधार के लिए चार दशकों से समर्पित रहे हैं और देश के युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करते हैं। उन्होंने NEET-UG 2026 परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंपी, परीक्षा रद्द की और दोबारा परीक्षा कराई। उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआत से उन्होंने इस पूरे मामले की जिम्मेदारी ली और परीक्षा माफिया के कारण किसी मेधावी छात्र के भविष्य के साथ अन्याय न होने देने का प्रयास किया।

लेकिन उनके इस्तीफे के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में जंतर-मंतर आंदोलन का संदर्भ था। प्रधान ने कहा कि पिछले दस दिनों की घटनाओं से वह व्यथित हैं और यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों का फायदा “राष्ट्र-विरोधी ताकतें” न उठा सकें, देश की एकता बनी रहे और छात्र कानूनी उलझनों में फंसने के बजाय पढ़ाई तथा करियर पर ध्यान दे सकें—इन परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री को इस्तीफा भेजा है।

तीन बड़ी मांगें लेकर सरकार के पास गई थी CJP

CJP की सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें थीं—धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, NEET विवाद से जुड़े मृत छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजा और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई न करने का आश्वासन। शुक्रवार की बातचीत के बाद CJP ने दावा किया था कि बाकी दो मांगों पर सरकार का रुख सकारात्मक है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अंतिम निर्णय के लिए समय मांगा गया है। अब प्रधान के इस्तीफे के बाद सबसे कठिन राजनीतिक मांग पूरी हो गई है, लेकिन आंदोलन का औपचारिक समापन बाकी दो मुद्दों पर सरकार की अंतिम और स्पष्ट स्थिति से भी जुड़ा हो सकता है।

यही कारण है कि जंतर-मंतर खाली कराने की प्रशासनिक कार्रवाई के बीच यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या प्रदर्शनकारी स्वेच्छा से आंदोलन समाप्त कर रहे हैं या प्रशासन उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट में सुरक्षा बलों के पहुंचने और प्रदर्शन स्थल से लोगों के बाहर निकलने की जानकारी है, लेकिन इससे आगे की परिस्थितियों को लेकर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

अब सरकार के सामने दूसरी चुनौती—आंदोलन खत्म या नया टकराव?

प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार के सामने राजनीतिक चुनौती का एक हिस्सा जरूर कम हुआ है, लेकिन प्रशासनिक चुनौती खत्म नहीं हुई है। यदि CJP अपनी तीनों मांगों पर संतोष जताकर आंदोलन समाप्त करता है तो सरकार राजधानी में हालात तेजी से सामान्य कर सकती है। लेकिन यदि मुआवजे, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों या पुलिस कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर मतभेद बने रहते हैं, तो प्रधान के इस्तीफे के बावजूद आंदोलन का कोई हिस्सा जारी रह सकता है।

सरकार के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि प्रदर्शन स्थल खाली कराने की कार्रवाई किस तरीके से होती है। कई दिनों से पुलिस कार्रवाई खुद इस आंदोलन का एक अलग मुद्दा बनी हुई है। ऐसे में प्रधान के इस्तीफे के बाद यदि प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच फिर किसी तरह का टकराव होता है, तो सरकार को मिली राजनीतिक राहत दोबारा विवाद में बदल सकती है। इसके विपरीत यदि CJP और प्रशासन बातचीत से जंतर-मंतर खाली कराने पर सहमत होते हैं, तो कई सप्ताह से जारी इस टकराव का अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण पटाक्षेप संभव है।

इस्तीफा आंदोलन की जीत, लेकिन परीक्षा व्यवस्था की परीक्षा बाकी

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ है। आंदोलन की शुरुआत परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक से हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे मामला छात्रों के भविष्य, परीक्षा संस्थाओं की विश्वसनीयता, पुलिस कार्रवाई और अंततः राजनीतिक जवाबदेही तक पहुंच गया। अब एक केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा उस दबाव की गंभीरता को रेखांकित करता है जो पिछले कई सप्ताह में सरकार पर बना।

लेकिन इसके बाद भी मूल प्रश्न समाप्त नहीं होता—क्या अगली राष्ट्रीय परीक्षा में छात्र निश्चिंत होकर यह भरोसा कर पाएगा कि उसका पेपर सुरक्षित है और उसकी मेहनत के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होगा? सरकार NTA में कार्रवाई और पेपर लीक के खिलाफ कानून को कठोर करने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। अब इन कदमों को जमीन पर प्रभावी बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

फिलहाल दिल्ली की राजनीति का केंद्र जंतर-मंतर ही बना हुआ है। कुछ घंटे पहले तक यहां धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग गूंज रही थी; अब वही इस्तीफा सामने आ चुका है और सुरक्षा बल प्रदर्शन स्थल खाली कराने के लिए पहुंच चुके हैं। सरकार ने मंत्री का इस्तीफा लेकर आंदोलन की सबसे बड़ी राजनीतिक मांग का जवाब दे दिया है, लेकिन अब उसकी अगली परीक्षा यह है कि जंतर-मंतर को बिना नए टकराव के सामान्य स्थिति में कैसे लौटाया जाता है।

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