राष्ट्रीय/ राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | गांधीनगर | 26 अक्टूबर 2026
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसदीय क्षेत्र से जुड़े गुजरात के खोरज गांव में 150 करोड़ रुपये की जमीन का विवाद अब सत्ता और पुलिस की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहा है। कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी ने सवाल उठाया है कि जमीन के दस्तावेजों के लिए 11 करोड़ रुपये मांगने के आरोपों की जांच कब होगी और गांधीनगर रेंज के IG वीरेंद्र यादव के खिलाफ FIR क्यों नहीं दर्ज की जा रही है?
रवि ठाकोर ने आरोप लगाया है कि जमीन के दस्तावेजों के सिलसिले में 11 करोड़ रुपये मांगे गए। जिग्नेश मेवाणी ने इस मामले को अमित शाह के संसदीय क्षेत्र से जोड़ते हुए उनसे जवाब मांगा है। सवाल यह है कि जब 150 करोड़ रुपये की जमीन के मामले में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पर इतने गंभीर आरोप लगे हैं, तो गुजरात सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
क्या आम नागरिकों की जमीन के मामलों में पुलिस की भूमिका की स्वतंत्र जांच नहीं होनी चाहिए? क्या वरिष्ठ अधिकारी पर शिकायत आने के बाद भी कानून उसी तरह लागू होगा, जैसे किसी आम व्यक्ति के खिलाफ होता है? और सबसे अहम सवाल—अमित शाह इस मामले पर चुप क्यों हैं? क्या वे इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए आगे आएंगे?
कांग्रेस ने IG वीरेंद्र यादव के खिलाफ FIR दर्ज करने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब गुजरात सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि जांच कब और किस एजेंसी से कराई जाएगी, ताकि किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति या अधिकारी को बचाने का सवाल न उठे। आरोपों की जांच हो, सबूत सामने आएं और जिम्मेदार पाए जाने वालों पर कानून के मुताबिक कार्रवाई हो।
150 करोड़ की जमीन, 11 करोड़ रुपये की मांग और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पर आरोप—गुजरात सरकार को इन सवालों का जवाब देना होगा।



