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वंदे मातरम् पर कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस आमने-सामने, उमर और फारूक के फैसले पर उठे सवाल

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | श्रीनगर | 10 सितंबर 2026

पूरे वंदे मातरम् पर खड़े हुए उमर और फारूक, कांग्रेस ने जताई आपत्ति

जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच वंदे मातरम् को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। मामला 7 सितंबर को श्रीनगर में हुए इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल जम्मू-कश्मीर के उद्घाटन कार्यक्रम का है। कार्यक्रम में वंदे मातरम् बजाया गया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पूरे गीत के दौरान खड़े रहे। इसके बाद जम्मू-कश्मीर कांग्रेस अध्यक्ष तारिक हामिद कर्रा ने दोनों नेताओं के इस फैसले पर सवाल उठाया।

कांग्रेस ने क्यों जताई नाराजगी?

कांग्रेस का कहना है कि वंदे मातरम् का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन पूरे गीत को लेकर उसके कुछ हिस्सों पर अलग-अलग राय रही है। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि पूरे वंदे मातरम् को लेकर बहस इसलिए भी जरूरी है क्योंकि स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं ने जिस सभी धर्मों को साथ लेकर चलने वाले भारत की कल्पना की थी, उसके साथ पूरे गीत के कुछ हिस्सों को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

वंदे मातरम् का इतिहास क्या है?

वंदे मातरम् भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा बहुत महत्वपूर्ण गीत है। इसे बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था। आजादी की लड़ाई के दौरान इस गीत ने लोगों में देशभक्ति की भावना पैदा करने में बड़ी भूमिका निभाई। हालांकि, पूरे गीत के कुछ हिस्सों को लेकर लंबे समय से विवाद भी रहा है। भारत में वंदे मातरम् को राष्ट्रगीत का दर्जा मिला है और इसके शुरुआती दो छंदों को विशेष रूप से स्वीकार किया गया है।

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उमर और फारूक के फैसले से बढ़ी राजनीतिक बहस

उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला का पूरे गीत के दौरान खड़ा होना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस जम्मू-कश्मीर में सहयोगी दल हैं। दोनों पार्टियां कई मुद्दों पर साथ काम करती हैं। लेकिन वंदे मातरम् के मुद्दे पर दोनों के नेताओं की अलग-अलग सोच सामने आ गई है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने कार्यक्रम में पूरे गीत के दौरान खड़े होकर सम्मान किया, जबकि कांग्रेस ने इस फैसले पर सवाल उठाया। इससे यह साफ है कि दोनों पार्टियों के बीच कुछ मुद्दों पर सोच का अंतर अभी भी मौजूद है।

क्या यह सिर्फ गीत का विवाद है?

यह मामला केवल वंदे मातरम् के दौरान खड़े होने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे भारत की एकता, सभी धर्मों के सम्मान और देश की पहचान जैसे बड़े सवाल भी जुड़े हुए हैं। एक तरफ वंदे मातरम् देश के स्वतंत्रता आंदोलन और देशभक्ति से जुड़ा हुआ है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस पूरे गीत के कुछ हिस्सों को लेकर अपनी अलग राय रखती है।

जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील राज्य में यह बहस और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, जहां धर्म, पहचान और राष्ट्रीय मुद्दे अक्सर राजनीति का हिस्सा बन जाते हैं।

गठबंधन पर पड़ेगा असर?

फिलहाल कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस का गठबंधन कायम है। इस एक मुद्दे से गठबंधन टूटने जैसी कोई बात सामने नहीं आई है। लेकिन सवाल जरूर उठ रहा है कि क्या वंदे मातरम् का विवाद आने वाले दिनों में दोनों पार्टियों के रिश्तों में और तनाव पैदा करेगा?

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सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या देशभक्ति के प्रतीक पर भी राजनीतिक दल एक साझा रास्ता नहीं निकाल सकते? या फिर वंदे मातरम् पर शुरू हुई यह बहस जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा करने जा रही है?

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