राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 9 सितंबर 2026
BRICS में नहीं आए तारिक रहमान, लेकिन भारत से दूरी नहीं चाहते—बांग्लादेशी अधिकारी का बड़ा दावा
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान भारत की यात्रा करना चाहते हैं, लेकिन वह चाहते हैं कि दिल्ली आने से पहले यह साफ हो कि भारत के साथ बातचीत में कौन-कौन से मुद्दे उठाए जाएंगे और यात्रा के बाद वह अपने देश की जनता के सामने क्या उपलब्धियां रख पाएंगे। बांग्लादेश के एक राजनयिक सूत्र ने यह जानकारी दी है। सूत्र ने कहा कि रहमान का BRICS सम्मेलन में शामिल नहीं होना यह नहीं बताता कि वह भारत से दूरी बनाना चाहते हैं।
BRICS सम्मेलन में नहीं पहुंचे तारिक रहमान
भारत की ओर से आमंत्रित किए जाने के बावजूद बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान भारत में आयोजित BRICS सम्मेलन में शामिल नहीं हुए। उनके इस फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएं हुईं। लेकिन बांग्लादेशी अधिकारी का कहना है कि BRICS में शामिल नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि बांग्लादेश भारत के साथ अपने रिश्ते कमजोर करना चाहता है। भारत बांग्लादेश का एक महत्वपूर्ण और पड़ोसी देश है और दोनों देशों के बीच कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर सीधे बातचीत जरूरी है।
भारत-बांग्लादेश रिश्तों में गंगा जल समझौता सबसे बड़ा मुद्दा
भारत यात्रा के पीछे सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में गंगा जल संधि भी शामिल हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, यह समझौता दिसंबर के अंत में खत्म होने वाला है और इसे जल्द से जल्द आगे बढ़ाने की जरूरत है। ऐसे में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को नवंबर या दिसंबर की शुरुआत में भारत की द्विपक्षीय यात्रा करनी पड़ सकती है।
गंगा जल बंटवारे का मुद्दा दोनों देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए इस समझौते को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच बातचीत आने वाले महीनों में खास महत्व रखेगी। अगर समय रहते दोनों देश किसी सहमति तक पहुंचते हैं, तो इससे दोनों देशों के संबंधों में भी सकारात्मक संदेश जा सकता है।
1971 की लड़ाई का भी बांग्लादेश ने किया जिक्र
बांग्लादेशी अधिकारी ने भारत के साथ रिश्तों के ऐतिहासिक पहलू पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश यह बात नहीं भूल सकता कि 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के दौरान भारत ने बड़ी भूमिका निभाई थी और काफी योगदान दिया था। यही ऐतिहासिक संबंध आज भी दोनों देशों के रिश्तों की एक महत्वपूर्ण नींव हैं।
हालांकि समय के साथ दोनों देशों के बीच कई नए मुद्दे भी सामने आए हैं। सीमा, पानी, व्यापार, सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग जैसे विषय भारत और बांग्लादेश के बीच लगातार बातचीत का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के नेतृत्व के बीच सीधी बातचीत का महत्व बना हुआ है।
भारत जाना है, लेकिन खाली हाथ नहीं लौटना चाहते?
तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा को लेकर सामने आई यह बात बेहद महत्वपूर्ण है। बांग्लादेशी सूत्र के अनुसार, रहमान इस बात को लेकर चिंतित हैं कि भारत यात्रा के बाद उन्हें अपने देश के लोगों के सामने क्या उपलब्धियां बतानी होंगी। इसका मतलब यह है कि यात्रा केवल औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं रह सकती। बांग्लादेशी प्रधानमंत्री चाहते हैं कि भारत के साथ बातचीत से कुछ ठोस परिणाम सामने आएं।
यानी दिल्ली यात्रा में अगर गंगा जल समझौते, व्यापार, सीमा और दूसरे महत्वपूर्ण मुद्दों पर कोई प्रगति होती है, तो यह रहमान सरकार के लिए घरेलू राजनीति में भी महत्वपूर्ण संदेश बन सकता है।
भारत के लिए भी यह यात्रा महत्वपूर्ण क्यों है?
बांग्लादेश भारत का महत्वपूर्ण पड़ोसी है और दक्षिण एशिया में उसकी रणनीतिक स्थिति बेहद अहम है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से व्यापार, संपर्क, सुरक्षा और नदी जल से जुड़े मुद्दे हैं। इसलिए नई बांग्लादेशी सरकार के साथ मजबूत और स्थिर संवाद भारत के हित में भी है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत करेगी? क्या गंगा जल समझौते को लेकर कोई बड़ा रास्ता निकलेगा? और क्या दिल्ली यात्रा के बाद बांग्लादेश के प्रधानमंत्री अपने देश लौटकर जनता को कोई ठोस उपलब्धि बता पाएंगे?
BRICS से दूरी की चर्चा के बीच भारत यात्रा की इच्छा का संदेश साफ है—बांग्लादेश भारत से संबंध खत्म नहीं करना चाहता, बल्कि दोनों देशों के बीच बातचीत को नए आधार पर आगे बढ़ाना चाहता है।




